दिल में छेद होना क्या होता है, जानिए दिल में छेद होने के शुरुआती लक्षण और उपचार

Hole in Heart: दिल में छेद होना या वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट बच्चों के लिए जानलेवा भी हो सकती है। आमतौर पर माता-पिता शुरुआती स्तर पर इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाते, जिससे परेशानियां बढ़ जाती हैं।

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Written By: Atul Modi | Published : May 18, 2024 3:38 PM IST

Dil Me Chhed Hona Kya Hota Hai: 'दिल में छेद होना', इस बीमारी के बारे में आमतौर पर सभी ने सुना होता है, लेकिन इसकी गंभीरता को देखते हुए इसके बारे सभी जानकारियां होना भी जरूरी है। दरअसल, मेडिकल भाषा में इसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (Ventricular Septal Defect) कहा जाता है। यह एक जन्मजात हृदय दोष है जिसमें हृदय के दो निचले कक्षों यानी वेंट्रिकल्स के बीच की दीवार में छेद होता है। इस छेद के कारण रक्त गलत दिशा में बहने लगता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और फेफड़ों में रक्त का संचार बढ़ जाता है। कई बार इस बीमारी का पता शिशु अवस्था में ही चल जाता है। वहीं कई बार माता-पिता इसके लक्षण समय पर नहीं पहचान पाते हैं। इसलिए इसके लक्षण और उपचार के विषय में जानकारी होना जरूरी है।

दिल में छेद होने के लक्षण - Dil Me Chhed Hone Ke Lakshan

शिशुओं में वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट के कई लक्षण (Ventricular Septal Defect Symptoms) नजर आते हैं। इन पर माता-पिता को ध्यान देना चाहिए, जैसे- तेज सांस लेना, सांस के साथ आवाज आना, थकान, रंग नीला पड़ना, विकास धीरे होना और भूख कम लगना। वहीं किशोरावस्था तक के बच्चों में इन सभी लक्षणों के साथ कुछ अतिरिक्त लक्षण भी नजर आते हैं। थकान, सांस लेने में तकलीफ, दिल की धड़कन तेज होने के साथ ही उनके पैरों और टखनों में सूजन आने लगती है।

दिल में छेद का इलाज - Dil Me Chhed Ka Ilaj

वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट का उपचार छेद के आकार और स्थान पर निर्भर करता है। छोटे छेद अक्सर समय के साथ अपने आप बंद हो जाते हैं। वहीं बड़े छेदों को सर्जरी या कैथेटर प्रक्रिया द्वारा बंद करने की आवश्यकता हो सकती है।

इसलिए खतरनाक है वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट

आमतौर पर छोटा वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट खतरनाक नहीं होता है, यह समय के साथ भर भी जाता है। लेकिन मध्यम या बड़े वीएसडी जानलेवा हो सकते हैं। इनके कारण दिल की धड़कन रुकने का डर रहता है। क्योंकि इस स्थिति में रक्त पंप करने में हृदय अधिक मेहनत करता है और फेफड़ों में बहुत अधिक रक्त पंप होता है। समय पर उपचार नहीं करवाने पर हृदय गति बंद होने की आशंका रहती है। इसी के साथ ईसेनमेंजर सिंड्रोम होने का डर बना रहा है। क्योंकि अनियमित रक्त प्रवाह के कारण फेफड़ों में रक्त वाहिकाएं कठोर और संकरी हो जाती हैं। फेफड़ों की धमनियों में रक्तचाप बढ़ने लगता है। जिससे परेशानी बढ़ सकती है। एंडोकार्डिटिस भी वीएसडी के कारण ही होता है। इसमें हृदय के कक्षों और वाल्वों की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है, जो जानलेवा हो सकती है।

शिशु को ऐसे बचाएं खतरे से

वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट रोकने का कोई सटीक तरीका अभी तक नहीं मिल सका है। लेकिन कुछ सावधानियां रखकर आप इससे अपने शिशु का बचाव कर सकती हैं। गर्भवती होने से पहले और गर्भावस्था के दौरान अपनी जीवनशैली में सुधार लाएं। हमेशा बैलेंस डाइट लें। डॉक्टर की सलाह पर फोलिक एसिड युक्त मल्टीविटामिन लें। यह प्रतिदिन करीब 400 माइक्रोग्राम हो सकता है, इससे मस्तिष्क, हृदय और रीढ़ की हड्डी के दोष कम हो सकते हैं। गर्भावस्था में शराब का सेवन न करें। धूम्रपान से दूर रहें। गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की ओर से बताए गए सभी टीकें जरूर लगवाएं।

(डिस्क्लेमर: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।)

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