
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 13, 2025 7:32 PM IST
कोरोनरी आर्टरी डिजीज़ (CAD) को अक्सर पुरुषों से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन वास्तव में महिलाएं भी उतनी ही जोखिम में हैं। महिलाओं में अक्सर एंजाइना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जो हृदय में रक्त प्रवाह कम होने के कारण होने वाला सीने का दर्द है। फिर भी, जानकारी की कमी के कारण महिलाओं की बीमारी का पता लगाना और इलाज करना अक्सर नाकाफी रहता है।
भारत में सीएडी मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, जहां मृत्यु दर वैश्विक औसत से 20-50% अधिक है।1 विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, 2022 में भारत में 47.7 लाख से अधिक मौतें सीएडी के कारण हुईं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महिलाओं के लिए अपनी हेल्थ को लेकर अधिक सावधान रहना क्यों जरूरी है।
एंजाइना का जल्दी पता लगाने और इसके प्रभावी प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है, ताकि गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम कम हो और मरीजों, खासकर महिलाओं, के लिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम मिल सकें। क्योंकि, ऐसा देखा गया है कि महिलाएं अक्सर अपनी हार्ट हेल्थ को नजरअंदाज कर देती हैं और इसके गम्भीर नुकसान उन्हें उठाने पड़ सकते हैं।
एंजाइना, जो सीने में दर्द, भारीपन या दबाव की अनुभूति के रूप में सामने आता है, सीएडी का सबसे आम लक्षण है। यह मरीजों की जीवन गुणवत्ता को काफी प्रभावित करता है। महिलाओं में अक्सर एंजाइना के असामान्य लक्षण जैसे जबड़े या गर्दन में दर्द, थकान या सीने के बाहर असुविधा देखने को मिलते हैं, जिससे समय पर और सटीक निदान करना मुश्किल हो जाता है। इससे डॉक्टर कभी-कभी केवल लक्षणों से राहत देने वाले उपाय सुझाते हैं, बिना एंजाइना के मूल कारण का इलाज किए, खासकर जब मरीज अपने लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं।
डॉ. रोहिता शेट्टी, मेडिकल अफेयर्स हेड, एबॅट इंडिया, कहती हैं, “हाल के शोध से यह समझने में मदद मिली है कि सीएडी का असर पुरुषों और महिलाओं पर अलग-अलग हो सकता है। महिलाएं अक्सर समय पर इलाज में देरी जैसी समस्याओं का सामना करती हैं, जिससे खतरा बढ़ता है। इन समस्याओं को हल करने और एंजाइना के निदान व प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए, एबॅट ने एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया (एपीआई) के साथ मिलकर ओपीटीए (ऑप्टिमल ट्रीटमेंट ऑफ एंजाइना) टूल्स शुरू किए हैं। ये टूल्स एंजाइना के मरीजों के लिए बेहतर देखभाल और परिणाम सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।”
डॉ. सरिता राव, सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और डायरेक्टर कैथ लैब, अपोलो हॉस्पिटल्स, इंदौर, कहती हैं, “ महिलाओं में हृदय रोग को पहचानने की सबसे बड़ी चुनौती यह मिथक है कि उनका जोखिम स्वाभाविक रूप से कम है। यह सच है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में सीएडी जैसे हृदय रोग आमतौर पर एक दशक बाद सामने आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिलाएं इससे मुक्त हैं। महिलाओं को हृदय रोग के जोखिमों और शुरुआती चेतावनी संकेतों के बारे में शिक्षित करना बड़ा बदलाव ला सकता है। इसलिए, जीवनशैली में बदलाव और समय पर चिकित्सा देखभाल के महत्व के बारे में महिलाओं को जागरूक करना बहुत जरूरी है।”
75 वर्ष की आयु के बाद, हृदय रोग के मरीजों में महिलाओं की संख्या अधिक होती है। मोटापा जैसी स्थितियां, जो एंजाइना से गहराई से जुड़ी हैं, पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करती हैं।6 महिलाओं में पुरुषों की तुलना में इस बात की 50% अधिक संभावना होती है कि उनकी बीमारी का पता नहीं चलेगा, जिससे उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पाता।
समय पर और सही इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है, लक्षणों को कम किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। बीमारी को जल्दी पहचानने और महिलाओं को सही जानकारी मिलने से उन्हें समय पर जरूरी इलाज मिलने में मदद हो सकती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
जी हां, मोटापा हार्ट डिजिज का एक रिस्क फैक्टर होता है।
75 वर्ष की उम्र के बाद, हार्ट डिजिज रोग के मरीजों में महिलाओं की संख्या अधिक होती है।