
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Arvind Mehra
यात्रा के दौरान फोन का इस्तेमाल (AI Generated Image)
ट्रैफिक में फंसे-फंसे मैसेज चेक करना, सिग्नल पर रुके हुए 2 मिनट रील देख लेना, साथ ही साइड और पीछे बैठे पैसेंजर का अधिकतर समय फोन इस्तेमाल करने में जाता है। गाड़ी चलाते हुए व ट्रेवल करते समय फोन का इस्तेमाल अब कई लोगों की आदत बन चुका है। हम सब जानते हैं कि ये सड़क हादसों का कारण बनता है, लेकिन बता दें कि हर बार फोन उठाने से आपकी गर्दन और कंधे भी धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं।
पारस हेल्थ में बतौर सीनियर डायरेक्टर एंड एचओडी- ऑर्थोपेडिक्स डॉक्टर अरविंद मेहरा के अनुसार, "पिछले 3-4 साल में मेरे पास 25 से 40 साल के ऐसे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है जिनकी शिकायत सिर्फ एक है- गर्दन में जकड़न और कंधे में लगातार दर्द। और वजह पूछने पर तो अधिकतर लोग गाड़ी में फोन इस्तेमाल करने की बात कहते हैं।" आइए जानते हैं कि कार में फोन का इस्तेमाल शरीर पर क्या असर डालता है।
टेक्स्ट नेक को डॉक्टर आसान शब्दों में बताते हैं "जब आप गाड़ी में फोन देखते हैं तो सिर अपने आप 30–45 डिग्री नीचे झुक जाता है। सामान्य हालत में हमारा सिर करीब लगभग 5 किलो का होता है। लेकिन सिर को आगे झुकाने पर गर्दन पर पड़ने वाला प्रभावी (Effective) भार काफी बढ़ जाता है और लगभग 20–25 किलोग्राम के बराबर हो सकता है। यह वास्तविक वजन नहीं, बल्कि गर्दन पर पड़ने वाले बल का अनुमान है।"
ट्रैफिक, सिग्नल, जाम मिलाकर ये 1 घंटा या उससे ज्यादा भी हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि गर्दन की नसों पर दबाव पड़ता है और मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ जाता है। इसे डॉक्टर टेक्स्ट नेक कहते हैं।
इसके अलावा डॉक्टर ने बताया कि फोन देखने के लिए एक हाथ स्टीयरिंग व्हील पर रहता है और दूसरे हाथ में फोन होता है। इस पोजीशन में कंधे आगे की तरफ झुक जाते हैं और एक तरफ का दबाव बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा करने से ट्रैपेजियस मसल यानी गर्दन से कंधे तक की मसल टाइट हो जाती है। फिर शुरू होती है कंधे में चुभन, हाथों में झनझनाहट और सिरदर्द की समस्या। कई लोग इसे सर्वाइकल की शुरुआत समझते हैं। गाड़ी का वाइब्रेशन और झटके इस दर्द को और बढ़ा देते हैं क्योंकि मांसपेशियां पहले से टाइट होती हैं।
सिरदर्द और माइग्रेन- गर्दन की जकड़न सीधे सिर की नसों से जुड़ी है। इसलिए शाम तक सिर भारी लगना आम है।
फोकस में कमी- यात्रा के दौरान फोन का इस्तेमाल गर्दन के दर्द के साथ दिमाग को भी थका सकता है। ऐसे में फोकस करने में परेशानी आ सकती है।
नींद में दिक्कत- टाइट मांसपेशियों के कारण रात को करवट बदलने में दर्द होता है।
लंबे समय में सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस- गलत पॉजीशन बनाए रखने से कुछ लोगों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, डिस्क से जुड़ी समस्याओं या लगातार गर्दन दर्द का जोखिम बढ़ सकता है।
डॉक्टर कहते हैं कि ड्राइविंग के दौरान फोन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें तो सबसे अच्छा है। लेकिन अगर जरूरी है तो ये आदतें अपनाएं:-
डिस्क्लेमर: गाड़ी में फोन चलाना सिर्फ चालान और एक्सीडेंट का मुद्दा नहीं है। ये आपकी रीढ़ की सेहत का भी सवाल है। लगभग 45–60 डिग्री तक गर्दन झुकाने पर गर्दन पर पड़ने वाला प्रभावी भार 20–25 किलो तक पहुंच सकता है। अगर आज गर्दन में हल्की जकड़न है तो उसे नजरअंदाज न करें। आदतें आज बदल लेंगे तो कल बड़े इलाज और दवाओं से बच जाएंगे। याद रखें - सड़क भी सुरक्षित रहे और आपकी गर्दन भी।