
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : April 29, 2026 10:18 AM IST
Image credits by: हीट स्ट्रोक से बचने के लिए सिर्फ बाहर का तापमान जानना काफी नहीं है।
देश के विभिन्न राज्यों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। भारतीय मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मई और जून में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे कई राज्यों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। गर्मियों में हम अक्सर तापमान देखकर ही अंदाजा लगाते हैं कि आज कितनी गर्मी है। लेकिन सच यह है कि हीट स्ट्रोक (लू) का खतरा सिर्फ बाहर के तापमान से नहीं, बल्कि एक और अहम फैक्टर से तय होता है। इसे कहा जाता है हीट इंडेक्स। गर्मियों में लोगों को हीट इंडेक्स का पता होने से न सिर्फ हीट स्ट्रोक की समस्या से बचा सकता है, बल्कि विभिन्न प्रकार की परेशानियों का खतरा भी कम होता है। इन दिनों जब देश के विभिन्न हिस्सों में तापमान तेजी से ऊपर जा रहा है, तब हम आपको बताने जा रहे हैं हीट इंडेक्स के बारे में।
नेशनल वेदर सर्विस की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट बताती है कि हीट इंडेक्स मुख्य रूप से महसूस करने वाला तापमान है। हीट इंडेक्स को तापमान और हवा में नमी को जोड़कर तय किया जाता है। आसान भाषा में कहे तो अगर बाहर का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस है और हवा में नमी ज्यादा है, तो एक इंसान के शरीर को यह 45 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ज्यादा महसूस हो सकता है।
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हमारा शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीना निकलाता है, लेकिन जब हवा में नमी ज्यादा होने के कारण पसीना जल्दी सूखना नहीं है। इस प्रक्रिया के कारण शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल होने लगता है और शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। हीट इंडेक्स ज्यादा होने के कारण शरीर को गर्मी जल्दी और ज्यादा लगती है। इससे हीट स्ट्रोक की संभावना कई गुणा ज्यादा बढ़ जाती है। शरीर का हीट इंडेक्स ज्यादा होने के कारण बेहोशी, चक्कर आना, उल्टी आना और मतली की समस्या भी देखी जाती है।
कई स्टडी के अनुसार, ज्यादा नमी + ज्यादा तापमान = गर्मी से होने वाली ज्यादा मौतें। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि बहुत ज्यादा गर्मी की घटनाओं में नमी एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। हीट इंडेक्स बढ़ने से हॉस्पिटलाइजेशन और मृत्यु दर दोनों बढ़ते हैं।
| S. NO | हीट इंडेक्स | खतरे का स्तर |
| 1. | 27- 32 डिग्री सेल्सियस | बहुत ही हल्का खतरा |
| 2. | 32- 41 डिग्री सेल्सियस | Heat exhaustion का जोखिम |
| 3. | 41- 54 डिग्री सेल्सियस | हीट स्ट्रोक आने का सबसे ज्यादा खतरा |
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में हीट स्ट्रोक और अन्य परेशानियों से बचाव करने सिर्फ बाहर का तापमान नहीं बल्कि शरीर का तापमान देखना जरूरी है। शरीर का तापमान देखने से आप हीट स्ट्रोक और अन्य समस्या से बच सकते हैं।
हीट स्ट्रोक घातक होता है। (Image: AI Generated)
आपके शरीर का हीट इंडेक्स ज्यादा है, इसका पता आप नीचे बताए गए लक्षणों से लगा सकते हैं।
रिसर्च बताती है कि अगर किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाए, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है।
हीट इंडेक्स एक प्रकार का मान है जो तापमान और नमी के आधार पर महसूस होने वाली गर्मी को दर्शाता है। यह हर व्यक्ति पर अलग प्रभाव डाल सकता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों में। यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है, मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है। अत्यधिक गर्मी, चक्कर, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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