C-Section के बाद महिलाओं को किन हेल्थ समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
आजकल बहुत महिलाओं की डिलीवरी सी-सेक्शन के द्वारा हो रही है। नेचुरल डिलीवरी की तुलना में इसमें दर्द तो कम होता है, लेकिन सिजेरियन के बाद आती हैं चुनौतियों की बाढ़। कैसे? आइए जानते हैं।
C-Section Ke Baad Konsi Pareshani Hoti Hai: बच्चे की डिलीवरी दो तरीकों से होती है, पहली तो नेचुरल डिलीवरी जिसे वेजाइनल डिलीवरी कहा जाता है और दूसरी सिजेरियन सेक्शन के जरिए। आज हम बात करेंगे सिजेरियन सेक्शन से हुई डिलीवरी के बाद महिलाओं के सामने आने वाली उन चुनौतियों की, जिनके बारे में सिर्फ एक महिला ही जानती है और उस परेशानी को समझ सकती है। सी सेक्शन एक बड़ा पेट का ऑपरेशन है जो पेट और गर्भाशय में चीरे लगाकर बच्चे को जन्म देने के लिए किया जाता है।
यह तब किया जाता है जब पेट में बच्चे की पोजीशन सही न हो या फिर कोई अन्य कॉम्प्लिकेशन हो। हालांकि कई बार यह मां और बच्चे की जान बचाने के लिए जरूरी होता है, लेकिन इसके बाद ठीक होने का सफर काफी चुनौतीपूर्ण होता है। हर साल लाखों महिलाओं का ऑपरेशन होता है, फिर भी बहुत सी महिलाएं इसके बाद होने वाली शारीरिक और मानसिक दिक्कतों के लिए तैयार नहीं होतीं। आइए हम नारायण हेल्थ सिटी, बेंगलुरु की ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर सपना रैना से जानते हैं कि सी सेक्शन के बाद महिलाओं की क्या चुनौतियां होती है।
सर्जरी के बाद दर्द होने वाली असुविधा
सिजेरियन सेक्शन ऑपरेशन के तुरंत बाद सबसे बड़ी समस्या चीरे वाली जगह पर दर्द होना है। कई हफ्तों तक वहां सूजन और दर्द रहता है। उठने-बैठने, चलने, यहां तक कि हंसने या खांसने में भी बहुत तकलीफ हो सकती है। डॉक्टर बताती हैं कि वह दर्द की दवाएं तो देते हैं, लेकिन स्तनपान कराने वाली माताएं इस बात को लेकर परेशान रहती हैं कि दवा का असर बच्चे पर न पड़े।
रिकवरी में लगने वाला लंबा समय
नॉर्मल डिलीवरी के मुकाबले, सी सेक्शन के बाद ठीक होने में बहुत समय लगता है। पूरी तरह ठीक होने में भी लगभग 6 से 8 हफ्ते लग ही जाते हैं। इस दौरान भारी सामान उठाना, गाड़ी चलाना या मेहनत वाला काम करना मना होता है। यह उन माताओं के लिए बहुत मुश्किल होता है जिनके घर में छोटे बच्चे हैं या मदद करने वाला कोई नहीं है।
घाव में इंफेक्शन और कठिनाइयां
महिलाओं को अक्सर टांकों वाली जगह पर इंफेक्शन होने का डर रहता है। इसलिए डॉक्टर बताती हैं कि अगर आपको वहां रेडनेस दिखे, सूजन हो या पस निकले, तो यह खतरे की घंटी है। कभी-कभी पेट के अंदर भी इन्फेक्शन हो सकता है। साथ ही, ज्यादा आराम करने और न चलने-फिरने से खून के थक्के जमने का खतरा भी बढ़ जाता है।
अंदरूनी दर्द और निशान
डॉक्टर बताती हैं कि सर्जरी के बाद पेट के अंदरूनी अंगों पर भी निशान रह जाते हैं। ये निशान कभी-कभी सालों बाद पेट दर्द या पेशाब की समस्याओं का कारण बनते हैं। बाहर की तरफ टांकों वाली जगह पर कभी-कभी सुन्नपन महसूस होता है जो कई महीनों तक रह सकता है।
स्तनपान में आती हैं कठिनाइयां
कई रिसर्च कहती है कि ऑपरेशन के बाद मां के शरीर में दूध बनने में थोड़ा समय लग सकता है। चूंकि यह एक नेचुरल प्रोसेस नहीं है, इसलिए शरीर को दूध बनाने के लिए जरूरी हार्मोन रिलीज करने में वक्त लगता है। साथ ही, टांकों के दर्द की वजह से बच्चे को सही स्थिति में पकड़कर दूध पिलाना भी मुश्किल हो जाता है।
भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव
ऑपरेशन के बाद कई महिलाएं अलग-अलग भावनाओं से गुजरती हैं। कुछ को जान बचने की खुशी होती है, तो कुछ को इस बात का दुख या पछतावा होता है कि वे नॉर्मल डिलीवरी नहीं कर पाईं। इससे पोस्टपार्टम डिप्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर ऑपरेशन अचानक या इमरजेंसी में हुआ हो, तो मां के मन में उस घबराहट का गहरा असर रह सकता है।
फ्यूचर में कंसीव करने में जोखिम
गर्भाशय पर लगा ऑपरेशन का निशान अगली प्रेगनेंसी में खतरा पैदा कर सकता है। सबसे बड़ा डर पुराने निशान के फटने का होता है। इसके अलावा, अगली बार अम्बिलिकल कॉर्ड से जुड़ी समस्याएं होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए अगले बच्चे की योजना बनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।
डिस्क्लेमर- जागरूकता बेहतर रिकवरी की दिशा में पहला कदम है। महिलाओं को सभी फॉलो-अप अपॉइंटमेंट में शामिल होने, स्कार्स मैनेजमेंट के लिए फिजियोथेरेपी लेने और व्यावहारिक और भावनात्मक दोनों तरह की मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। C-section आसान रास्ता नहीं है यह एक बड़ी सर्जरी है जिसमें करुणा, धैर्य और सूचित देखभाल की आवश्यकता होती है।