
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr Rakesh Pandit
Electrolyte Imbalance
घूप-गर्मी में जैसे ही हमारे शरीर में कमजोरी दिखती है, जो इलैक्ट्रोलाइट पीने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या यह इलेक्ट्रोलाइट पीना हेल्दी है या इसके भी कुछ हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? यह जानने के लिए हमने आकाश हेल्थकेयर के प्रिंसिपल डायरेक्टर एंव एचओडी, इंटरन मेडिसिन डॉक्टर राकेश पंडित से बात की। उन्होंने बताया कि
“गर्मी के मौसम में तेज धूप, ज्यादा पसीना, उल्टी-दस्त या शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लेकिन ऐसे में एक ऐसी परेशानी भी पैदा हो सकती है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यह इलेक्ट्रोलाइट का इंबैलेंस होना है। यह सिर्फ थकान या कमजोरी तक ही सीमित समस्या नहीं है, बल्कि सीरियस सीचुएशन में यह दिल, दिमाग और मसल्स की फंक्शनिंग को भी प्रभावित कर सकता है।” आइए हम डॉक्टर से थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में मौजूद खनिज है, जो तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने, नसों के जरिए मैसेज पहुंचाने और मांसपेशियों को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं। इनमें सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और क्लोराइड प्रमुख हैं। जब शरीर में इन मिनर्लस का लेवल नॉर्मल से कम या ज्यादा हो जाता है, तो उसे इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस कहा जाता है। यह स्थिति ज्यादा पसीना आने, पर्याप्त पानी न पीने, लंबे समय तक दस्त या उल्टी रहने, किडनी की बीमारी, कुछ दवाओं के इस्तेमाल या गंभीर संक्रमण की वजह से हो सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि “इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में एक तरह से इलेक्ट्रिकल सिस्टम की तरह काम करते हैं। यानी कि दिल की धड़कन को कंट्रोल रखने से लेकर मांसपेशियों और दिमाग तक मैसेज पहुंचाने में इलेक्ट्रोलाइट्स की अहम भूमिका होती है।” डॉक्टर ने इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस के दौरान शरीर में दिखने वाले लक्षणों के बारे में भी विस्तार से बताया है। जैसे-
सोडियम या पोटैशियम का लेवल कम होने पर बॉडी में एलर्जी की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को रोज के नॉर्मल काम करने में भी परेशानी होने लगती है और हर समय थकान महसूस हो सकती है।
अगर इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस हो जाता है तो पैरों, हाथों या शरीर के अन्य हिस्सों में बार-बार ऐंठन होना भी इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मांसपेशियों के सिकुड़ने और शिथिल होने की प्रक्रिया इलेक्ट्रोलाइट्स पर निर्भर करती है।
वहीं डॉक्टर बताते हैं कि पोटैशियम और मैग्नीशियम के लेवल बिगड़ने पर हार्टबीट प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों में धड़कन तेज, धीमी या अनियमित हो सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में एरिदमिया कहा जाता है।
अगर आपके शरीर में सोडियम की मात्रा बहुत कम हो जाए, तो चक्कर आना, ध्यान लगाने में दिक्कत, बेचैनी या भ्रम जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। गंभीर मामलों में दौरे पड़ने का खतरा भी रहता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। लेकिन अगर इनका बैलेंस बिगड़ दाए तो डिहाइड्रेशन के साथ-साथ अन्य गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर कम होने और बेहोशी की आशंका बढ़ जाती है।
डॉक्टर ने बताया कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे, खिलाड़ी, खुले वातावरण में काम करने वाले लोग और किडनी या हार्ट डिजीज से पीड़ित मरीज इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।” डॉक्टर आगे कहते हैं कि "गर्मियों में शरीर से केवल पानी ही नहीं, बल्कि अन्य कई जरूरी खनिज भी पसीने के साथ बाहर निकल जाते हैं। इसलिए सिर्फ पानी पीना ही नहीं, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।"
इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस बड़ी समस्या पैदा कर सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन भर खूब पानी पिएं। इसके अलावा नारियल पानी, छाछ और जरूरत पड़ने पर ओआरएस जैसे पेय पदार्थों का सेवन भी फायदेमंद हो सकता है। अगर उल्टी या दस्त की समस्या हो, तो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को जल्द पूरा करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: अगर लगातार कमजोरी, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन, अत्यधिक थकान या दिल की धड़कन में बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और इलाज से इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस से होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।