
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : August 13, 2025 8:39 AM IST
Khane Mai Namak Ki Matra: दिखने में एकदम बुरादा व छोटे-से क्रिस्टल जैसा नमक हमारी भारतीय रसोई का एक अभिन्न हिस्सा है, जो न सिर्फ भोजन के स्वाद को बढ़ाता है, बल्कि शरीर के सामान्य कार्यों के लिए भी आवश्यक है। साइंटिफिक लैंग्वेज में इसे सोडियम क्लोराइड (NaCl) कहा जाता है, जो सोडियम और क्लोरीन तत्वों के संयोजन से बनता है। यह समुद्र के पानी, नमक की खानों और चट्टानी परतों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। हाल ही में इसी सोडियम क्लोराइड को लेकर एक व्यक्ति चर्चा में है।
जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति ने ChatGPT की मदद से सोडियम क्लोराइड को डाइट से रिमूव करके डाइट प्लान बनाने को कहा, जिसके बाद उसे हॉस्पिटल जाना पड़ा। ऐसे में आपका ये जानना बहुत जरूरी होता है कि सोडियम क्लोराइड क्या होता है? और अगर इसे खाने से बिल्कुल ही अलग कर दिया जाए तो हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है? हाल के वर्षों में ‘कम नमक’ और ‘बिना नमक’ वाली डाइट का चलन बढ़ा है, परंतु नमक को पूरी तरह हटाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
ये एक गंभीर विषय है, इसलिए इसका जवाब पाने के लिए हमने डॉक्टर बृज वल्लभ शर्मा से बातचीत की, जो की वर्तमान में नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर में सीनियर कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने हमें खाने में सोडियम क्लोराइड मात्रा उम्र के हिसाब से बताई, साथ ही यह भी बताया कि अगर आप सोडियम क्लोराइड को लेना बंद कर देते हैं तो क्या-क्या हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार वयस्कों के लिए प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक (करीब 2 ग्राम सोडियम) का सेवन उचित है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) 5–6 ग्राम प्रतिदिन को सुरक्षित मानती है। यह मात्रा केवल भोजन में डाला गया नमक ही नहीं, बल्कि दूध, सब्जियों, मांस तथा विशेष रूप से प्रोसेस्ड फूड से भी प्राप्त होती है।
उम्र के अनुसार प्रतिदिन सोडियम एवं नमक की अनुशंसित मात्रा
अगर आपका बच्चा 1-3 साल का है तो उसके खाने में सिर्फ प्रतिदिन प्रतिदिन सोडियम की अनुशंसित मात्रा 1 ग्राम और अगर नमक के रूप में बात करें तो ये लगभग 2.5 ग्राम होनी चाहिए। ये मात्रा डॉक्टर द्वारा बताई गई हैं, इसलिए इन्हें फॉलो करने से आप अपने बच्चों के शरीर में न अधिक और न ही कम मात्रा में सोडियम पहुंचा सकते हैं।
4-8 साल के बच्चे बढ़ती उम्र में होते हैं, ऐसे में हमें उनकी सेहत का पूरा ख्याल रखना चाहिए। डॉक्टर ने प्रतिदिन प्रतिदिन सोडियम की अनुशंसित मात्रा 1.2 ग्राम (सोडियम) की बताई है और नमक के रूप में 3 ग्राम। डॉक्टर की बताई इन सलाह को फॉलो करके आप अपने बच्चे को हेल्दी रख सकते हैं।
9-13 साल की उम्र में बच्चे स्कूल जाने लगते हैं ऐसे में उनके शरीर को हर पोषण आवश्यकता अनुसार ही चाहिए होता है। डॉक्टर ने नौ से तेरह साल के बच्चे की डाइट में 1.5 ग्राम सोडियम चाहिए होता है। यानी कि अगर हम खाने में नमक की बात करें तो बच्चे तो 3.8 ग्राम नमक देना चाहिए।
एक उम्र के बाद हमारे शरीर की जरूरत भी बढ़ जाती है। हमें भले ही ज्यादा मात्रा में नमक नहीं खाना चाहिए, लेकिन 14-50 साल तक की उम्र ऐसी होती है, जिसमें व्यक्ति के शरीर में कई बदलाव आते हैं। ऐसे में अगर आपका बच्चा 14 से बढ़ा है या आप 50 से कम उम्र के हैं तो 2 ग्राम सोडियम अपनी डाइट में शामिल करें। नमक के रूप में बात करें तो लगभग 5 ग्राम नमक की आपको आवश्यकता होती है।
51 के बाद शरीर व हड्डियां कमजोर होने लगती है, ऐसे में आपके शरीर को 1.5 ग्राम सोडियम लगता है। सीधे और सरल शब्दों में बात करें तो 51 के बाद आपको 3.8 ग्राम नमक अपनी डाइट में शामिल करना ही है।
अगर आप गर्भवती हैं या फिर स्तनपान कराने वाली महिला हैं तो अपने खाने में लगभग 5 ग्राम नमक को शामिल करें। दूसरे शब्दों में कहें तो 2 ग्राम सोडियम गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिला के लिए बेस्ट है।
डॉक्टर वल्लभ ने बताया कि ‘नमक का अत्यधिक कमी या अभाव हाइपोनेट्रेमिया नामक स्थिति उत्पन्न कर सकता है, जिसमें खून में सोडियम का स्तरखतरनाक रूप से घट जाता है।’ इसी के साथ उन्होंने आगे कहते हुए बताया कि ‘इसके प्रारंभिक लक्षणों में सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर, भ्रम, तथा लो ब्लड प्रेशर शामिल हैं। गंभीर स्थिति में दौरे पड़ना या कोमा भी संभव है।’
सोडियम जीवन के लिए आवश्यक खनिज है। यह शरीर के जल संतुलन, रक्तचाप नियंत्रण और तंत्रिका व मांसपेशी कार्यों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नमक की मात्रा को कम करने से उच्च रक्तचाप के मामलों में लाभ देखा गया है, किंतु इसे पूरी तरह हटाना खतरनाक हो सकता है।
अत्यधिक नमक हृदय रोग, स्ट्रोक, और गुर्दे संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है, जबकि इसकी कमी इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारणबन सकती है।
स्वस्थ व्यक्तियों के लिए संतुलित मात्रा में नमक का सेवन आवश्यक है, जबकि विशेष रोग स्थितियों में चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार मात्रा समायोजित की जानी चाहिए।
नमक, जीवन की तरह ही है — न अधिक, न कम; बल्कि संतुलित मात्रा ही सेहत के लिए उपयुक्त है।