लिफ्ट में फंस जाएं, तो घबराने से शरीर में क्या होता है?
क्या आप कभी लिफ्ट में फंस गए हैं? इस दौरान आपको कैसा महसूस हुआ? क्या आपने कभी सोचा है कि इस दौरान जब हमें घबराते हैं, तो हमारे शरीर में किस तरह के बदलाव दिखते हैं? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं इस बारे में-
ऑफिस, मॉल, अस्पताल या हाईराइज सोसायटी में लिफ्ट का इस्तेमाल आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। हालांकि, कभी-कभी तकनीकी खराबी या बिजली जाने की वजह से लिफ्ट बीच में रुक सकती है। ऐसे हालात में कई लोग घबरा जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लिफ्ट में फंसने के दौरान घबराहट आपके शरीर पर तुरंत असर डाल सकती है?
नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. अभिनव कुमार गुप्ता का कहना है कि बंद जगह में फंसने का एहसास शरीर के फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स को एक्टिव कर देता है। यह वही बायोलोजिक्ट प्रोसेस है जो शरीर किसी खतरे को महसूस करने पर देता है।
लिफ्ट में फंसने पर घबराने पर शरीर में क्या होता है?
- अमेरिकन साइकोलॉजिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक, जब व्यक्ति डरता है, तो शरीर एड्रेनालिन नामक हार्मोन रिलीज करता है। इससे दिल तेजी से धड़कने लगता है ताकि शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन और ऊर्जा मिल सके।
- पैनिक की स्थिति में व्यक्ति सामान्य से अधिक तेजी से सांस लेने लगता है। इसे हाइपरवेंटिलेशन कहा जाता है। इससे चक्कर आना, हाथ-पैरों में झुनझुनी और कमजोरी महसूस हो सकती है।
- तनाव के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए स्वेट ग्लैंड्स सक्रिय हो जाती हैं। इसलिए घबराए हुए व्यक्ति को अधिक पसीना आ सकता है, भले ही लिफ्ट के अंदर तापमान सामान्य हो।
- अचानक डर लगने से रक्तचाप अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग है, उनमें यह स्थिति अधिक परेशानी पैदा कर सकती है।
- पैनिक के दौरान मस्तिष्क का अमिगडाला एक्टिवय हो जाता है, जो भावनाओं और डर को कंट्रोल करता है। इससे व्यक्ति को लग सकता है कि स्थिति वास्तव में जितनी गंभीर है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक है।
- यह एक आम मिथक है। आधुनिक लिफ्ट पूरी तरह एयरटाइट नहीं होतीं। इनमें वेंटिलेशन की व्यवस्था होती है, जिससे हवा का आदान-प्रदान बना रहता है। इसलिए कुछ घंटों तक लिफ्ट में फंसे रहने से सामान्यतः ऑक्सीजन खत्म होने का खतरा नहीं होता।
लिफ्ट में फंसने पर क्या करें?
इस स्थिति में डरने के बजाय हमें कुछ बाातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-
- इमरजेंसी अलार्म या हेल्प बटन दबाएं।
- बिल्डिंग मैनेजमेंट या मेंटेनेंस टीम से संपर्क करें।
- मोबाइल नेटवर्क हो तो परिवार या सुरक्षा कर्मियों को सूचना दें।
- जमीन पर आराम से खड़े रहें या दीवार का सहारा लें।
- धीरे-धीरे और गहरी सांस लें।
- लिफ्ट का दरवाजा जबरदस्ती खोलने की कोशिश न करें।
- बार-बार उछलने या लिफ्ट को हिलाने की कोशिश न करें।
Disclaimer : लिफ्ट में फंसना निश्चित रूप से तनावपूर्ण अनुभव हो सकता है, लेकिन अधिकांश मामलों में यह जानलेवा स्थिति नहीं होती। असली खतरा अक्सर घबराहट से पैदा होने वाली शारीरिक प्रतिक्रियाओं से जुड़ा होता है। इसलिए शांत रहना, धीरे-धीरे सांस लेना और मदद का इंतजार करना सबसे सुरक्षित तरीका है। जितना अधिक व्यक्ति अपने डर को नियंत्रित कर पाता है, उतना ही उसका शरीर सामान्य स्थिति में बना रहता है।