लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवा लेने से क्या होता है? जानिए एक्सपर्ट से

Antibiotic Side Effects: अगर आप भी छोटी-छोटी समस्या के लिए एंटीबायोटिक दवाएं लेते हैं, तो सावधान हो जाइए। लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से कई गंभीर नुकसान हो सकते हैं।

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Written By: priya mishra | Published : August 4, 2025 8:22 PM IST

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Medically Verified By: Dr Vikram Vikhe

Side Effects Of Antibiotics: जहां प्राचीन समय में लोग बीमारियों के इलाज के लिए घरेलू उपचार या आयुर्वेद पर निर्भर रहते थे। वहीं, आजकल की आधुनिक जीवनशैली में एंटीबायोटिक्स दवाओं का प्रचलन ज्यादा देखने को मिलता है। एंटीबायोटिक्स को आधुनिक चिकित्सा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है। इनकी खोज ने मानव स्वास्थ्य की दिशा ही बदल दी – निमोनिया से लेकर सेप्सिस जैसी जानलेवा बीमारियों को नियंत्रित और ठीक करना संभव हो गया। एंटीबायोटिक्स ने लाखों जिंदगियां बचाई हैं और अब भी बचा रही हैं। लेकिन आजकल लोग हल्के सर्दी-जुकाम और सिरदर्द के लिए भी लोग एंटीबायोटिक्स पर निर्भर रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना डॉक्टर के परामर्श के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन हमारे लिए खतरनाक हो सकता है। कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि एंटीबायोटिक्स का गलत या अत्यधिक उपयोग गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवा लेने से क्या होता है? इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने डॉ विक्रम बी. विखे, एचओडी - मेडिसिन विभाग, डीपीयू सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पिंपरी, पुणे से बातचीत की। 

डॉ विक्रम बी. विखे बताते हैं कि हाल के वर्षों में मैंने ऐसे कई मरीज देखे हैं जो पेट की समस्याओं, लगातार थकान, बार-बार संक्रमण या त्वचा से जुड़ी दिक्कतों के साथ मेरे पास आए और उनमें एक बार समान थी कि वे सभी लंबे समय तक या बार-बार एंटीबायोटिक ले चुके थे। अक्सर लोगों को यह अंदाजा  भी नहीं होता कि जिस दवा को वो ठीक होने के लिए खा रहे हैं, वही उनके शरीर के अन्य तंत्रों को नुकसान पहुंचा सकती है।

एंटीबायोटिक्स क्या होते हैं?

एंटीबायोटिक्स वे दवाएं होती हैं, जो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने या उनकी वृद्धि को रोकने का काम करती हैं। एंटीबायोटिक्स का काम बैक्टीरिया से लड़ना होता है। ये या तो बैक्टीरिया को मारते हैं या उनकी वृद्धि को रोकते हैं। लेकिन ये वायरस पर काम नहीं करते, जैसे कि सर्दी या फ्लू। आमतौर पर एंटीबायोटिक्स का कोर्स 3-7 दिन का होता है और इसे डॉक्टर की सलाह से ही लिया जाना चाहिए। जब इनका सही तरीके से और उचित अवधि तक उपयोग किया जाए, तो ये बेहद प्रभावी होती हैं। लेकिन जब इनका लंबे समय तक या बार-बार बिना जरूरत के उपयोग होता है, तो शरीर में कई प्रकार के बदलाव शुरू हो सकते हैं।

लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेने से शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव

पाचन तंत्र पर असर

हमारे शरीर में खरबों सूक्ष्म जीव रहते हैं, खासकर आंतों में। इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को गट माइक्रोबायोम कहा जाता है, और यह पाचन, रोग-प्रतिरोधक क्षमता, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक में भूमिका निभाता है। एंटीबायोटिक्स अक्सर अच्छे और बुरे बैक्टीरिया में फर्क नहीं कर पाते। खासकर ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स पूरे माइक्रोबायोम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक कोर्स अस्थायी असंतुलन ला सकता है, लेकिन बार-बार उपयोग डिसबायोसिस नामक स्थिति को जन्म देता है – यानी गट फ्लोरा में लंबे समय का असंतुलन। इसका संबंध निम्न समस्याओं से पाया गया है:

  • गैस, डायरिया या कब्ज
  • पोषक तत्वों का सही अवशोषण न होना
  • C. difficile जैसे संक्रमणों की संभावना बढ़ना
  • इम्यून सिस्टम की कमजोरी
  • एलर्जी और सूजन संबंधी रोग
  • मूड संबंधी दिक्कतें जैसे एंग्जायटी और डिप्रेशन

शरीर के अंगों पर असर

एंटीबायोटिक्स शरीर में मेटाबोलाइज़ होने के लिए लिवर और किडनी पर निर्भर करते हैं। अगर ये अंग पहले से कमजोर हों, जैसे बुजुर्गों में, तो लंबे समय तक दवा लेने से अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है या टॉक्सिसिटी हो सकती है। कुछ दवाएं जैसे अमीनो ग्लाइकोसाइड, खासतौर पर किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

सकेंडरी इंफेक्शन और इम्यून असंतुलन

हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता में गट बैक्टीरिया का अहम रोल होता है। जब बार-बार एंटीबायोटिक्स से इन बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर संक्रमण से लड़ने में कमजोर पड़ने लगता है। इसके कारण व्यक्ति संक्रमण और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।

दिमाग और पेट का संबंध

हमारे पेट और दिमाग के बीच एक गहरा संबंध है – जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। लंबे समय तक गट माइक्रोबायोम के असंतुलन से डिप्रेशन, बेचैनी, या ब्रेन फॉग जैसी मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

पोषक तत्वों की कमी

कुछ एंटीबायोटिक्स शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण या निर्माण को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, टेट्रासाइक्लिन कैल्शियम और मैग्नीशियम से जुड़ कर उन्हें अवशोषित होने से रोकते हैं। लंबे समय में विटामिन-के और विटामिन-बी ग्रुप की कमी हो सकती है, जिससे ऊर्जा, रक्त जमने की प्रक्रिया और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकते हैं।

कैंडिडा या फंगल इंफेक्शन का खतरा

लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेने से शरीर में फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, खासकर महिलाओं में वजाइना में यीस्ट इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है।

लिवर और किडनी पर असर

कुछ एंटीबायोटिक दवाएं लीवर और किडनी पर बोझ डालती हैं। अगर इन्हें ज्यादा समय तक लिया जाए, तो लिवर एंजाइम्स बढ़ सकते हैं आय किडनी फ़ंक्शन कमजोर हो सकता है।

कब जरूरी होता है एंटीबायोटिक का उपयोग?

कुछ मेडिकल स्थितियों में लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स देना जरूरी होता है, जैसे -

  • निमोनिया
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)
  • टॉन्सिलिटिस (गंभीर केस)
  • बैक्टीरियल त्वचा संक्रमण
  • टाइफाइड, टीबी, ब्रोंकाइटिस (बैक्टीरियल)

खुद की सुरक्षा कैसे करें?

अगर आपको बार-बार एंटीबायोटिक्स लेनी पड़ रही हैं, तो ध्यान रखें:

  • हमेशा डॉक्टर से सलाह लेकर ही एंटीबायोटिक लें।
  • खुद से दवा न लें और न ही बची हुई दवा का उपयोग करें।
  • पूरा कोर्स पूरा करें, भले ही आप पहले ठीक महसूस करें।
  • दवा के साथ प्रोबायोटिक्स या फर्मेंटेड फूड (जैसे दही, कांजी, अचार, केफिर) लें।
  • अपने स्वास्थ्य पर नजर रखें – थकान, पेट की दिक्कतें या बार-बार संक्रमण की सूचना डॉक्टर को दें।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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