पीरियड्स में लंबे समय तक पैड न बदलने से क्या होगा? जानिए कितने घंटे में बदलना चाहिए नैपकिन

World Menstrual Hygiene Day: पीरियड्स के दौरान अगर सेनेटरी पैड को हर 4 से 5 घंटे में नहीं बदला जाए तो कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

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Written By: priya mishra | Published : May 28, 2025 11:20 AM IST

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Periods Hygiene: प्रत्येक वर्ष 28 मई को वर्ल्ड मेंस्ट्रुएशन हाइजीन डे (World Menstrual Hygiene Day 2025) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों को मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना है। दरअसल, पीरियड्स के दिनों में महिलाओं को हाइजीन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कई बार महिलाएं लापरवाही के चलते घंटो तक एक ही पैड या नैपकिन लगाए रखती हैं, जिससे उनमें इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ब्लड का फ्लो कम हो या ज्यादा, हर महिला को प्रत्येक चार से पांच घंटे के अंतराल में पैड जरूर बदलना चाहिए। एक्सपर्ट की मानें तो लंबे समय तक पैड न बदलने से महिलाओं में यूरिन इन्फेक्शन की समस्या बढ़ जाती है, जिससे उन्हें पेशाब के दौरान जलन, खुजली और प्राइवेट पार्ट में कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। यदि आप इस तरह की समस्या से बचना चाहती हैं, तो आपको पीरियड्स के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तो आइए, इस लेख में नई दिल्ली स्थित पीएसआरआई के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ राहुल मनचंदा से जानते हैं कि पीरियड्स में लंबे समय तक पैड न बदलने से क्या-क्या समस्या हो सकती हैं और पीरियड्स के दौरान कितने समय में पैड बदलते रहना चाहिए?

पीरियड्स में लंबे समय तक पैड न बदलने से क्या होगा?

यूटीआई

यदि आप पीरियड्स के दौरान अपनी स्वच्छता का ख्याल नहीं रखती हैं, तो आपको यूटीआई हो सकता है। यदि आप इस तरह की समस्या से बचना चाहती हैं, तो आपको पीरियड्स के दिनों में मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करना चाहिए या सैनिटरी नैपकिन को बार-बार बदलते रहना चाहिए।

टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम

लंबे समय तक सैनिटरी नैपकिन या मेंस्ट्रुअल कप लगाने से बैक्टीरियल इंफेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे में महिलाओं में तेज बुखार, उल्टी, दस्त और ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

कैंसर का खतरा

सैनिटरी पैड को साफ रखने और कीटाणु से बचाने के लिए क्लोरीन ब्लीच का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें, ब्लीचिंग प्रक्रिया के दौरान डाइऑक्सिन उत्पन्न होता है। यह एक खतरनाक विषैला प्रदूषक होता है, जो महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में महिलाओं में कैंसर का खतरा बढ़ने की संभावना अधिक रहती है।

ल्यूकोरिया

पीरियड्स के दौरान ज्यादा समय तक पैड या नैपकिन लगाने से महिलाओं को ल्यूकोरिया भी हो सकता है। दरअसल, ऐसी स्थिति में महिलाओं को वाइट डिस्चार्ज बहुत ज्यादा होता है, जिससे उन्हें अधिक थकान और कमजोरी होने लगती है।

कितने घंटे में बदलना चाहिए नैपकिन?

एक्सपर्ट की मानें तो यदि आपका फ्लो हल्का है, तो आपको 5 से 6 घंटे में एक बार बार पैड बदलना चाहिए और यदि आपको मीडियम फ्लो है, तो 4 से 5 घंटे के अंतराल में पैड बदलना जरूरी है। वहीं, यदि आपको बहुत ज्यादा फ्लो हो रहा है, तो आपको 3 से 4 घंटे में नैपकिन को बदलना चाहिए। साथ ही रात को सोने के दौरान नाइट पैड का इस्तेमाल  जरूर करें और सुबह उठते ही तुरंत पैड चेंज करें।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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