प्रेगनेंसी में विटामिन डी की कमी से होने वाले खतरे

विटामिन-डी की कमी को 'सनशाइन विटामिन' के रूप में भी जाना जाता है. इसे हृदय रोग, कैंसर, मल्टीपल स्केलेरोसिस और टाइप 1 मधुमेह के खतरे से जोड़ा जाता है. विटामिन डी इन प्रेगनेंसी, शरीर में उत्पादित विटामिन-डी का लगभग 95 प्रतिशत धूप से आता है. शेष पांच प्रतिशत अंडे, वसा वाली मछली, फिश लिवर ऑयल, दूध, पनीर, दही और अनाज जैसे खाद्य पदार्थो से मिलता है.

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 9, 2019 10:37 AM IST

विटामिन डी की कमी हाल के वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ती हुयी परेशानी हैं. भारत जैसे देश में भी विटामिन डी की कमी के मामले बढ़ रहे हैं. शरीर में जब किसी विटामिन की कमी होती है तो उसके कई तरह के साइड इफेक्ट्स होते हैं. प्रेगनेंसी में विटामिन डी की कमी मां के साथ होने वाले बच्चे के स्वास्थ पर भी असर डालती है. गर्भावस्था के दौरान विटामिन-डी की कमी होने पर बच्चों में जन्मजात और वयस्क होने पर मोटापा बढ़ने की अधिक संभावना रहती है. एक शोध में यह पता चला है. ऐसी मां की कोख से जन्म लेने वाले बच्चे, जिनमें विटामिन-डी का स्तर बहुत कम है, उनकी कमर चौड़ी होने या 6 वर्ष की आयु में मोटा होने की संभावना अधिक होती है.

विटामिन डी की कमी का बच्चे पर प्रभाव

इन बच्चों में शुरुआती दौर में पर्याप्त विटामिन-डी लेने वाली मां के बच्चों की तुलना में 2% अधिक वसा होती है. अमेरिका में दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर वइया लिदा चाटझी ने कहा, "ये बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं दिखती, लेकिन हम वयस्कों के बारे में बात नहीं कर रहे, जिनके शरीर में 30 प्रतिशत वसा होती है."

कैंसर और हृदय रोग का खतरा 

विटामिन-डी की कमी को 'सनशाइन विटामिन' के रूप में भी जाना जाता है. इसे हृदय रोग, कैंसर, मल्टीपल स्केलेरोसिस और टाइप 1 मधुमेह के खतरे से जोड़ा जाता है.

विटामिन डी के आहार

शरीर में उत्पादित विटामिन-डी का लगभग 95 प्रतिशत धूप से आता है. शेष पांच प्रतिशत विटामिन डी खाद्य पदार्थ से आता है. अंडे, वसा वाली मछली, फिश लिवर ऑयल, दूध, पनीर, दही और अनाज जैसे खाद्य पदार्थो से विटामिन डी मिलता है.

विटामिन डी कैप्सूल्स

जिन लोगों में विटामिन डी की बहुत ज्यादा कमी हो जाती है, उनको विटामिन डी की कैप्सूल्स दी जाती हैं. अलग-अलग विटामिन डी की कमी के स्तर के अनुसार डॉक्टर विटामिन डी की कैप्सूल्स देते हैं. uprise capsule विटामिन डी3 की सबसे चर्चित कैप्सूल्स है. इसके उपयोग से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.

भारत में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग विटामिन डी की कमी के शिकार 

हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि दुनिया भर में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग विटामिन-डी की कमी से जूझ रहे हैं, जिनमें ज्यादातर गर्भवती महिलाएं शामिल हैं. विटामिन-डी की कमी होने से लोगों की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं और शरीर में हर समय दर्द की शिकायत बनी रहती है.

'पेडिएट्रिक ओबेसिटी' मैगजीन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, टीम ने 532 मां-बच्चों के जोड़े की जांच की, जिसमें बच्चे के जन्म से पहले मां में विटामिन-डी को मापा गया. जिसमें यह बात सामने निकलकर आई कि लगभग लगभग 66 फीसदी महिलाएं तीन महीने के बाद विटामिन-डी की कमी से जूझ रहीं थी. चाटझी ने कहा, "गर्भावस्था में ओपटिमल विटामिन-डी का स्तर बचपन के मोटापे से बचा सकता है, लेकिन हमारे शोध को सुनिश्चित करने के लिए अधिक शोध आवश्यक है. गर्भावस्था के प्रारंभिक दिनों में विटामिन-डी की खुराक लेते रहना भावी पीढ़ियों को ठीक रखने का अच्छा उपाय है."

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