अगर डायबिटीज का इलाज न किया जाए तो क्या होगा? जानिए डॉक्टर से

Untreated Diabetes: अगर डायबिटीज का इलाज न किया जाए, तो कई तरह की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आइए, जानते हैं इसके बारे में  विस्तार से -

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Written By: priya mishra | Published : August 20, 2025 11:58 AM IST

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Medically Verified By: Dr Gaurav Jain

What Happens If Diabetes Goes Untreated: डायबिटीज आज दुनिया भर में सबसे तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक है। भारत को तो "डायबिटीज कैपिटल" तक कहा जाने लगा है क्योंकि यहां करोड़ों लोग इससे प्रभावित हैं। यह रोग तब होता है जब शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन का सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता या पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनता। इंसुलिन की कमी से रक्त में शुगर का स्तर लगातार बढ़ता रहता है। डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब जाना, वजन घटना आदि शामिल है। अधिकांश लोग डायबिटीज को केवल "शुगर बढ़ना" मानकर हल्के में ले लेते हैं। वे सोचते हैं कि जब तक तकलीफ न हो, तब तक इलाज या दवा की जरूरत नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि अगर डायबिटीज का समय पर इलाज और नियंत्रण न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि यह "साइलेंट किलर" है, यानी यह बिना बड़े लक्षण दिए शरीर के अंदर गंभीर समस्याएं पैदा करता रहता है। ऐसे में, डायबिटीज के लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी हो जाता है। आज इस लेख में डॉ गौरव जैन, कंसल्टेंट – इंटरनल मेडिसिन, धरमशिला नरायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली से जानते हैं कि अगर डायबिटीज का इलाज न किया जाए तो क्या होगा?

समय पर इलाज न करने के खतरे

1. हृदय और स्ट्रोक का खतरा

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 2-4 गुना अधिक होता है। लगातार हाई ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, जिससे उनमें प्लाक जमने लगता है। इससे हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर और ब्रेन स्ट्रोक की संभावना बहुत बढ़ जाती है।

2. किडनी फेल्योर

डायबिटीज किडनी की छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। यदि इलाज न किया जाए, तो धीरे-धीरे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता खत्म हो जाती है और मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है। भारत में किडनी फेल होने के सबसे बड़े कारणों में डायबिटीज प्रमुख है।

3. आंखों की रोशनी पर असर (डायबिटिक रेटिनोपैथी)

लगातार हाई शुगर आँखों की रेटिना को प्रभावित करती है। शुरुआत में धुंधला दिखना, रोशनी में तकलीफ़ जैसे लक्षण आते हैं, और अगर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थायी अंधेपन का कारण बन सकती है।

4. नर्व डैमेज (न्यूरोपैथी)

उच्च शुगर स्तर नसों को भी प्रभावित करता है। इससे हाथ-पाँव में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन, दर्द जैसी समस्याएं होती हैं। कई बार मरीज को पैरों में चोट लगने या घाव का पता तक नहीं चलता और धीरे-धीरे यह गंभीर संक्रमण या अंग काटने (एम्प्यूटेशन) तक पहुँचा सकता है।

5. इंफेक्शन का बढ़ा खतरा

डायबिटीज इम्यून सिस्टम को कमजोर करती है। इसका असर यह होता है कि मरीज को बार-बार संक्रमण (फेफड़े, मूत्रमार्ग, त्वचा आदि) होने लगते हैं और घाव भी देर से भरते हैं।

6. गर्भावस्था में खतरे

अगर गर्भवती महिला को डायबिटीज है और वह इसे नियंत्रित नहीं करती, तो बच्चे के जन्म में जटिलताएँ आ सकती हैं। शिशु का वजन अधिक हो सकता है, समय से पहले डिलीवरी का खतरा रहता है और मां-बच्चे दोनों की सेहत प्रभावित होती है।

क्यों जरूरी है समय पर इलाज?

डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज पूरी तरह ठीक नहीं की जा सकती, लेकिन इसे सही खानपान, नियमित व्यायाम, समय पर दवा और नियमित शुगर मॉनिटरिंग से नियंत्रित रखा जा सकता है। समय पर इलाज मिलने से:

  • जटिलताओं को रोका जा सकता है।
  • जीवन की गुणवत्ता बेहतर रहती है।
  • मरीज लंबा और सामान्य जीवन जी सकता है।

बचाव और नियंत्रण के उपाय

1. नियमित जांच कराएं – 35 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए।

2. संतुलित आहार लें – मीठे और तैलीय भोजन से परहेज करें, फल-सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त आहार लें।

3. नियमित व्यायाम करें – रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, योग या कोई शारीरिक गतिविधि करें।

4. दवा और इंसुलिन का पालन करें – डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें।

5. तनाव कम करें – मेडिटेशन, योग और पर्याप्त नींद तनाव को कम करने में मददगार है।

6. धूम्रपान और शराब से परहेज करें – ये आदतें डायबिटीज की जटिलताओं को और बढ़ाती हैं।

डायबिटीज कोई साधारण बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित कर सकती है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि समय पर इलाज, स्वस्थ जीवनशैली और नियमित जांच से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टरों की राय है कि यदि मरीज शुरुआती दौर में ही सतर्क हो जाए, तो गंभीर जटिलताओं से आसानी से बचा जा सकता है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।