ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए अप्लाई करने के बाद क्या होता है?

13 अगस्त को वर्ल्ड ऑर्गन डोनर डे मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए अप्लाई करने के बाद क्या-क्या होता है। एक मरीज को सही ऑर्गन मिलने में कितना समय लगता है इसके बारे में-

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : August 11, 2026 3:15 PM IST

आपको ट्रांसप्लांट की जरूरत है। हम आपका नाम लिस्ट में डाल देते हैं। डॉक्टर के ये दो लाइन सुनते ही दुनिया बदल जाती है। एक तरफ उम्मीद होती है नई जिंदगी मिलेगी। तो दूसरी तरफ डर कब आएगा वो फोन? ज्यादातर लोग सोचते हैं ऑर्गन ट्रांसप्लांट की लिस्ट मतलब लंबी लाइन। जैसे राशन की दुकान में होती है। पहले नंबर वाला पहले पाएगा। असल में ऐसा नहीं है। कोई भी मरीज जब ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए अप्लाई करता है तो बहुत सारी चीजों को फॉलो किया जाता है, जांचा जाता है और कई पैरामीटर होते हैं, जिनके आधार पर किसी मरीज को अंग देने का फैसला होता है। 13 अगस्त को हम वर्ल्ड ऑर्गन ट्रांसप्लांट डे मना रहे हैं, तब हम आपको बताने जा रहे हैं ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए अप्लाई करने के बाद क्या होता है?

Step 1- इवैल्यूएशन - क्या आप इसके लिए तैयार हैं?

लखनऊ स्थिति मेदांता अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. धर्मेंद्र सिंह भदौरिया बताते हैं कि नाम लिस्ट में डालने से पहले अस्पताल आपकी 10 तरह की जांच करेगा। यह आपको रिजेक्ट करने के लिए नहीं, बल्कि ये पक्का करने के लिए है कि नया ऑर्गन लगने के बाद आप उसे संभाल पाएंगे या नहीं। इस प्रोसेस को करने में अस्पताल को 2 से 3 सप्ताह का समय लगता है। इस दौरान मरीज का ब्लड ग्रुप, टिश्यू टाइप और एंटीबॉडी चेक होगी। इसी से पता चलेगा डोनर का ऑर्गन आपके शरीर से मैच करेगा या नहीं। इसके साथ ही मरीज का CT, MRI, इको, एक्स-रे भी करते हैं। इस टेस्ट के बाद मरीज को डॉक्टरों की टीम से मिलवाया जाता है। इस दौरान हार्ट स्पेशलिस्ट, किडनी स्पेशलिस्ट, डेंटिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और सोशल वर्कर से बात करवाई जाती है, क्योंकि ट्रांसप्लांट के बाद पूरी लाइफ दवाइयां खानी हैं, इसलिए मेंटल और फाइनेंशियल सपोर्ट भी जरूरी है।

आपको बताया जाएगा सर्जरी के रिस्क, बाद की दवाइयों का खर्च और लाइफस्टाइल में बदलाव आएगा। इस प्रोसेस के बाद आखिर में डॉक्टरों की कमेटी मीटिंग करके फैसला लेती है। अगर सब ठीक रहा तो आप "लिस्टेड" हो जाते हैं। अगर कोई प्रॉब्लम है तो पहले उसे ठीक करने को कहा जाएगा।

ऑर्गन ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को करने में 1 से 6 महीने का समय लगता है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को करने में 1 से 6 महीने का समय लगता है।

Step 2- लिस्ट में नाम - लेकिन लाइन नहीं है ये

भारत में ऑर्गन अलॉटमेंट NOTTO यानी National Organ & Tissue Transplant Organization और हर राज्य की अपनी रजिस्ट्री देखती है। लिस्ट में जाने के बाद हर मरीज को एक स्कोर मिलता है। य स्कोर ही तय करता है आपको ऑर्गन कितनी जल्दी मिलेगा।

  1. किडनी के लिए: ब्लड मैच + कितने समय से डायलिस पर हैं + कितनी देर से लिस्ट में हैं।
  2. लीवर के लिए: MELD स्कोर। खून की 3 रिपोर्ट से निकलता है। नंबर जितना ज्यादा, हालत उतनी गंभीर, प्राथमिकता उतनी ज्यादा।
  3. हार्ट और लंग्स के लिए: कितने इमरजेंसी में हैं और टिश्यू मैच कितना है। आप अकेले नहीं हैं। जब भी कोई डोनर मिलता है, कंप्यूटर पूरे देश की लिस्ट में सबसे बेस्ट मैच ढूंढता है। इसलिए जरूरी नहीं कि जो पहले आया उसे पहले मिले।

Step 3-  इंतजार - सबसे मुश्किल हिस्सा

ऑर्गन ट्रांसप्लांट में नाम डालने के बाद यही वो समय है जब जिंदगी पॉज पर लग जाती है। कुछ मामलों में ऑर्गन तुरंत मिल जाता है। लेकिन कुछ मामलों में मरीज को लंबे समय तक इंतजार भी करना पड़ता है। डॉक्टर बताते हैं कि किडनी ऑर्गन डोनेशन के मामले में 2 से 5 साल, लिवर के मामले में 3 महीने से 1 साल और हार्ट व लंग्स के मामले में 6 महीने से 1 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।

Step 4- वो फोन- हमारे पास आपके लिए ऑर्गन है

ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए अप्लाई करने के बाद आपको ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए आधी रात को भी फोन आ सकता है। फोन करने के बाद कोऑर्डिनेटर कहेगा- कुछ खाना-पीना नहीं है। तुरंत अस्पताल पहुंचिए। अस्पताल पहुंचकर फिर से खून और फाइनल टेस्ट होंगे। 10-15% केस में लास्ट में ऑर्गन रिजेक्ट भी हो जाता है। अगर सब ठीक रहा तो सीधा OT में आपको जाना होगा। अगर लिविंग डोनर है यानी घर का कोई किडनी या लीवर का हिस्सा दे रहा है, तो वहां डेट फिक्स करके सर्जरी होती है। इंतजार नहीं करना पड़ता है।

ऑर्गन डोनर परिवार का सदस्य हो तो प्रक्रिया आसान हो जाती है।

स्टेप 5: सर्जरी और पहले 48 घंटे

ऑर्गन मैच होने के बाद सर्जरी 3 से 12 घंटे तक चलती है, आर्गन के हिसाब से। इसके बाद मरीज को होश आने के बाद आप ICU में होंगे। शरीर में कई ट्यूब लगी होंगी। सर्जरी के कुछ घंटों के अंदर ही एंटी-रिजेक्शन दवाइयां शुरू हो जाएंगी। ये दवाइयां ही आपकी नई जिंदगी की चाबी हैं। ये आपके इम्यून सिस्टम को बताती हैं कि यह नया ऑर्गन दुश्मन नहीं, दोस्त है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद आपको अस्पताल में 4 से 5 दिन तक रहना पड़ सकता है।

डॉक्टर कहते हैं कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए अप्लाई करना लाइन में लगना नहीं है। यह एक सिस्टम में जाना है जो सबसे सही मैच सबसे सही समय पर ढूंढने की कोशिश करता है। इसमें इंतजार है, टेस्ट हैं उम्मीद है और फिर उस गिफ्ट को संभालने की मेहनत भी है। अगर आप या आपके कोई अपने इस प्रोसेस से गुजर रहे हैं तो 3 बातें याद रखें - सवाल पूछें, परिवार को साथ रखें और एक दिन एक स्टेप। लिस्ट लंबी है, लेकिन लिस्ट में उन लोगों की संख्या भी लंबी है जो आज नई जिंदगी जी रहे हैं।

Disclaimer: ये जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। हर अस्पताल और हर ऑर्गन का प्रोसेस थोड़ा अलग हो सकता है। अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।