पेनकिलर शरीर के किस अंग को सबसे ज्यादा नुकसान करती है? आसा भाषा में समझें

Pain Killer Khane Ke Side Effects: अगर आप सर्दी-जुकाम या हल्के-फुलके दर्द में भी पेनकिलर खा रहे हैं तो सावधान हो जाएं! डॉक्टर ने बताया कि आपकी एक गलती शरीर के इस अंग को बर्बाद कर सकती है।

WrittenBy

Written By: Vidya Sharma | Updated : July 16, 2025 12:27 PM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr Vivek Sukumar

Jyada Dard Ki Goli Khane Se Kya Hota Hai: बात चाहे आज के नौजवानों की हो या फिर माता-पिता की, हर किसी की ये आदत बन गई है कि थोड़ा सा शरीर दुखता नहीं है या नाक बहती नहीं है कि पेनकिलर खाना शुरु कर देते हैं। पेनकिलर तो होती ही दर्द को खत्म करने के लिए है, लेकिन ये बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करती है। भले ही एक दर्द की एक गोली खाने से आपको आराम महसूस होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं ये हमारे शरीर के एक हिस्से को बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित करता है!

जी हां, आपका बार-बार हर छोटी-मोटी समस्या को दबाने के लिए पेनकिलर खाना लिवर की हेल्थ को खराब कर देता है। ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि आपको सटीक जानकारी देने के लिए हमने एसएसओ कैंसर अस्पताल के जीआई और हेपेटोबिलरी पैंक्रियाटिक सर्जनडॉक्टर विवेक सुकुमार से बात की। उन्होंने लोगों के अत्यधिक पेनकिलर खाने से लिवर यानी कि कलेजे को होने वाले नुकसानों के बारे में बताया है। नीचे दी गई सभी जानकारी डॉक्टर के इनपुट्स पर आधारित है।

लोगों की पेनकिलर लेने की बुरी आदत है खतरनाक

इसे सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य, भारत में दर्द निवारक दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के आसानी से उपलब्ध हैं। भारतीय लोग सिरदर्द, शरीर में दर्द या हल्का बुखार जैसी छोटी-मोटी समस्याओं के इलाज के लिए भी खुद से दवा लेते हैं। खासकर आइबुप्रोफेन या पैरासिटामोल जैसी दर्द निवारक दवाएं खुलेआम खाते हैं।

मरीज को बीमारी का पता चलने से पहले ही दर्द निवारक दवाएं निगलना एक ऐसी आदत बन जाती है जिसे छोड़ना मुश्किल होता है। ये अक्सर मरीज की जानकारी के बिना ही लिवर को नुकसान पहुंचाने का काम करती हैं। यह एक हानिकारक आदत है क्योंकि बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से दवा लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

पेनकिलर दवाएं हमारे पेट में कैसे काम करती हैं?

डॉक्टर ने बताया कि दर्द निवारक दवाएं निगलने पर पेट में टुकड़ो में बिखरकर और शरीर में घुलकर सीधे रक्त प्रवाह में प्रवाहित हो जाती हैं। ये प्रोस्टाग्लैंडीन नाम के रसायन को संश्लेषित करने वाले एंजाइम को रोकती हैं, जो दर्द और सूजन का कारण बनता है। इससे असुविधा कम होती है और चयापचय के दौरान लिवर पर पर प्रभाव डाल सकती हैं।

अत्यधिक मात्रा में पेनकिलर का सेवन लिवर पर क्या प्रभाव डालता है?

हम अपने दर्द को कम करने के लिए तो पेनकिलर खा लेते हैं, लेकिन इस बात से बिल्कुल ही अनजान होते हैं कि ये एक गोली हमारे लिवर को कितना प्रभावित कर सकती है। अत्यधिक मात्रा में पेनकिलर का सेवन करने के लेकर डॉक्टर ने बताया कि लिवर दर्द निवारक दवाओं, खासकर पेरासिटामोल, को तोड़ देता है। कम मात्रा में यह खतरनाक नहीं है।

हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन से हानिकारक उप-उत्पाद (Harmful By-Products) उत्पन्न होते हैं जिन्हें लिवर आसानी से बाहर नहीं निकाल पाता। लंबे समय तक कि बात करें तो यह विषाक्तता (Toxicacy) लिवर की कोशिकाओं को नष्ट कर देती है जिससे लिवर में सूजन, घाव (फाइब्रोसिस) और कुछ मामलों में तीव्र लिवर फेलियर (Acute Liver Failure)हो जाती है।

डॉक्टर ने बताया अत्यधिक पेनकिलर खाने से लिवर को क्या नुकसान होता है?

  1. हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन)

दर्द निवारक दवाओं के ज्यादा सेवन करने से लिवर में सूजन आ सकती है। विषाक्त पदार्थों (Toxins) के जमाव के कारण लिवर में कोमलता और सूजन आ जाती है। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसे दवा-प्रेरित हेपेटाइटिस कहा जाता है, जिसका पता तब तक नहीं चलता जब तक कि इसमें पीलिया या थकान जैसे गंभीर लक्षण न दिखाई दें।

  1. लिवर एंजाइम का असंतुलन

दवाओं के संयोजन से रक्त में लिवर एंजाइम बढ़ जाते हैं, जो लिवर की चोट या तनाव का संकेत है। इस स्थिति में शुरुआत में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे सकते हैं, लेकिन रक्त परीक्षण (Blood Test) से इसका पता लगाया जा सकता है। एंजाइम्स का बढ़ता असंतुलन समय के साथ लिवर फंक्शन के कामकाज को बाधित कर सकता है।

  1. एक्यूट लिवर फेलियर

किसी भी पेनकिलर का अत्यधिक मात्रा का उपयोग करने पर अचानक लिवर फेलियर हो सकता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी सिचुएशन है और इसमें लिवर ट्रांसप्लांट की भी आवश्यकता पड़ सकती है। पैरासिटामोल जैसी पेनकिलर की एक खुराक का ओवरडोज समय पर दवा न मिलने पर व्यक्ति की मृत्यु का कारण भी बन सकता है।

  1. कोलोनिक लिवर डैमेज ( सिरोसिस)

पेनकिलर दवाओं के लगातार दुरुपयोग से लिवर में घाव जिसे अंग्रेजी में सिरोसिस कहा जाता है, हो सकता है। ये एक एक दीर्घकालिक, अपरिवर्तनीय स्थिति है। सिरोसिस लिवर की कार्य करने की क्षमता को गंभीर रूप से सीमित कर देता है, जिससे पाचन, डिटॉक्सीफिकेशन और ब्लड फिल्ट्रेशन यानी कि रक्त निस्पंदन प्रभावित होता है।

  1. लिवर कैंसर का जोखिम

हालांकि ये बहुत ही दुर्लभ है कि दवाओं के अत्यधिक उपयोग से होने वाली दीर्घकालिक सूजन (Chronic Inflammation ) या सिरोसिस (cirrhosis) यकृत कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ा सकता है। डैमेज लिवर सेल्स समय के साथ उत्परिवर्तित हो सकते हैं, जिससे उन्नत मामलों में कैंसरयुक्त वृद्धि हो सकती है।

पेनकिलर न लें तो क्या करें?

  • डॉक्टर विवेक ने कुछ गैर-औषधीय पेन थेरेपी बताए हैं, जिनकी लिस्ट हम नीचे दे रहे हैं- 
  • डॉक्टर ने बताया कि आप व्यायाम करें- जैसे एरोबिक, जलीय या प्रतिरोध व्यायाम
  • एक्सरसाइज थेरेपी- शारीरिक चिकित्सा की एक प्रमुख पद्धति
  • मन-शरीर अभ्यास करें जैसे योग, ताई ची और चीगोंग)
  • वजन घटाने की कोशिश करें
  • आप चाहें तो मनोवैज्ञानिक थेरेपी ले सकते हैं जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा
  • इसके अलावा मैनुअल थेरेपी का ऑप्शन भी चुन सकते हैं।

डॉक्टर विवेक के बातए उपायों को अपनाकर आप अपने लिवर को खराब होने से बचा सकते हैं और बार-बार दवाई खाने की आदत में भी सुधार ला सकते हैं।