
डॉक्टर आशीष चौधरी
डॉक्टर आशीष चौधरी एक अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, जो हाल में आकाश हेल्थ केयर में अपनी सेवाएं प्रदान कर ... Read More
Written By: Dr. Aashish Chaudhry | Updated : May 19, 2026 9:12 AM IST
मेनोपॉज और बोन डेंसिटी
महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होती है। इस दौरान मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है और शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं। ज्यादातर महिलाएं मेनोपॉज को सिर्फ पीरियड्स बंद होने या मूड स्विंग्स से जोड़कर देखती हैं, लेकिन इसका असर शरीर की हड्डियों पर भी गहराई से पड़ता है।
सही जानकारी और समय पर सावधानी न बरतने पर महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर होने की समस्या तेजी से बढ़ सकती है। मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से कम होने लगता है। यह हार्मोन महिलाओं की हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
एस्ट्रोजन की कमी होने पर हड्डियों का घनत्व धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे वे पतली और कमजोर हो जाती हैं। यही कारण है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, खासकर कूल्हों, रीढ़ और कलाई की हड्डियों में।
कई बार महिलाएं मेनोपॉज के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं। कमर दर्द, जोड़ों में दर्द, शरीर का झुकना, लंबाई कम होना या मामूली चोट में हड्डी टूट जाना ऐसे संकेत हो सकते हैं कि हड्डियां कमजोर हो रही हैं। दुर्भाग्य से ऑस्टियोपोरोसिस को साइलेंट डिजीज कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण तब तक स्पष्ट नहीं होते जब तक कोई फ्रैक्चर न हो जाए।
भारत में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूप में कम निकलना और कैल्शियम व विटामिन D की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। कई महिलाएं घर और परिवार की जिम्मेदारियों में अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं देतीं, जिसका असर बढ़ती उम्र में साफ दिखाई देता है।
मेनोपॉज के बाद हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है संतुलित आहार। रोजाना पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम लेना चाहिए। दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोया और तिल जैसे खाद्य पदार्थ कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। इसके साथ विटामिन D भी जरूरी है, क्योंकि यह शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। सुबह की धूप लेना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना फायदेमंद हो सकता है।
इसके अलावा नियमित व्यायाम भी बेहद जरूरी है। वॉकिंग, योग, हल्का स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वजन उठाने वाले व्यायाम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। जो महिलाएं शारीरिक रूप से सक्रिय रहती हैं, उनमें हड्डियों के कमजोर होने का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए इन आदतों से दूरी बनाना जरूरी है। साथ ही, कैफीन और जंक फूड का अत्यधिक सेवन भी हड्डियों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
मेनोपॉज के बाद महिलाओं को समय-समय पर बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) टेस्ट करवाना चाहिए। यह जांच हड्डियों की मजबूती का पता लगाने में मदद करती है। जिन महिलाओं के परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास रहा हो, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। मेनोपॉज के बाद अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें। सही जानकारी, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत रखा जा सकता है।
डिस्क्लेमर- यह समझना जरूरी है कि मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं है, बल्कि जीवन का एक नया चरण है। अगर महिलाएं इस समय अपनी सेहत, खानपान और जीवनशैली पर ध्यान दें तो वे लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ जीवन जी सकती हैं। हड्डियों की मजबूती केवल चलने-फिरने के लिए ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी जीवन के लिए भी बेहद जरूरी है।