ब्लड प्रेशर बढ़ने का क्या मतलब होता है? जानें जब बीपी बढ़ता है तो शरीर में क्या होता है

जब हृदय सामान्य दबाव के साथ रक्त पंप करता है, तो यह स्थिति नॉर्मल बीपी का होता है। आपको बता दें कि सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg होता है। जब बीपी इससे ज्यादा होता है, तो यही हाई बीपी कहलाता है।

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Written By: Anju Rawat | Published : February 9, 2026 3:08 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Monika Sharma

High Blood Pressure: हाई ब्लड प्रेशर एक आम समस्या है, जिससे आजकल अधिकतर लोग जूझ रहे हैं। जब बिना लक्षण के ही शरीर में विकसित होती है और धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को खराब कर देती है। इसलिए इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। आपको बता दें कि ब्लड प्रेशर वह दबाव है, जो हृदय द्वारा पंप किए जाने वाले रक्त धमनियों की दीवारों पर पड़ता है। जब हृदय सामान्य दबाव के साथ रक्त पंप करता है, तो यह स्थिति नॉर्मल बीपी का होता है। आपको बता दें कि सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg होता है। अगर यह 140/90 mmHg से ऊपर हो, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) माना जाता है। इस स्थिति में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेल्यिर का खतरा बढ़ता है।

दरअसल, बीपी को दो अंकों में मापा जाता है। इसमें सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (Systolic BP) और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (Diastolic BP) शामिल हैं। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर वह स्थिति होती है, जब दिल सिकुड़कर खून पंप करता है और डायस्टोलिक प्रेशर वह होता है, जब दिल आराम की स्थिति में होता है। आइए, आकाश हेल्थकेयर की सीनियर कंसल्टेंट-एंडोक्रिनोलॉजी डॉ. मोनिका शर्मा से जानते हैं इसके बारे में-

high BP Normal

  • सामान्य सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर: 120 mmHg
  • सामान्य डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर: 80 mmHg

जब सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 mmHg या उससे अधिक होता है, तो यह स्थिति हाई बीपी की होती है। वहीं, जब डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90 mmHg या उससे अधिक आए, तो यह हाई बीपी कहलाता है।

बीपी बढ़ने के लक्षण क्या होते हैं?

वैसे तो बीपी बढ़ने पर ज्यादातर मामलों में लक्षण महसूस नहीं होता है, लेकिन आपको कुछ सामान्य संकेत महसूस हो सकते हैं।

  • सिर दर्द होना
  • चक्कर आना
  • घबराहट महसूस होना
  • नाक से खून आना
  • सीने में भारीपन
  • नींद न आना

बीपी बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

  • ज्यादा नमक का सेवन करने से बीपी बढ़ सकता है।
  • अगर आप अक्सर ही तनाव और चिंता से घिरे रहते हैं तो आपका बीपी बढ़ सकता है।
  • मोटापा भी हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है।
  • शारीरिक गतिविधि की कमी बीपी बढ़ने की वजह बन सकता है।
  • अगर आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, तो बीपी हाई हो सकता है।
  • जेनेटिक कारणों से भी बीपी बढ़ सकता है।
  • जिन लोगों को डायबिटीज और थायरॉइड है, उनमें हाई बीपी की संभावना ज्यादा रहती है।

ब्लड प्रेशर बढ़ने का क्या मतलब होता है?

  • जब ब्लड प्रेशर बढ़ता है तो इसका मतलब होता है कि दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • इस स्थिति में धमनियों पर लगातार अधिक दबाव पड़ता है।
  • इसके साथ ही, रक्त नलिकाएं भी सख्त और संकरी होने लगती हैं।
  • जब बीपी लंबे समय तक हाई बना रहता है तो इस स्थिति में शरीर का संतुलन भी बिगड़ने लगता है।

बीपी बढ़ने से होने वाली दिक्कतें

दिल पर असर

बीपी बढ़ने का सबसे पहला असर दिल पर पड़ता है। इस स्थिति में दिल की मांसपेशियां मोटी होने लगती हैं और दिल को खून पंप करने में ज्यादा मुश्किल होती है। इस स्थिति में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है और हार्ट फेलियर की संभावना ज्यादा रहती है। बीपी बढ़ने पर दिल को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचता है और व्यक्ति को खबर तक नहीं पहुंचती है, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

दिमाग पर असर

बीपी बढ़ने का असर दिमाग पर भी पड़ता है। ब्लड प्रेसर बढ़ने से दिमाग की नसों पर दबाव पड़ता है और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बना रहता है। इस स्थिति में नस फटने या ब्लॉकेज की संभावना भी ज्यादा रहती है। इतना ही नहीं, याद्दाश्त भी कमजोर होने लगता है और चक्कर आने लगते हैं। इतना ही नहीं, जब लंबे समय तक बीपी हाई रहता है तो डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ जाता है।

किडनी पर असर

हाई बीपी किडनी पर भी बुरा असर डालता है। दरअसल, किडनी खून को साफ करने का काम करती है। हाई बीपी इसमें एक बड़ी रुकावट पैदा कर सकती है। हाई बीपी की वजह से किडनी की रक्त नलिकाएं खराब होने लगती हैं और शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। इस स्थिति में पेशाब में झाग यानी प्रोटीन आने लगता है और यह स्थिति किडनी फेलियर का खतराभी बढ़ाता है।

आंखों पर असर

हाई बीपी का आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है। इससे आंखों की नसों को नुकसान पहुंचता है और इसकी वजह से आपके आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। इससे आंखों में दर्द हो सकता है और रेटिना डैमेज हो सकता है। कुछ गंभीर मामलों में अंधापन तक हो सकता है। आपको शरीर में थकान और कमजोरी का अनुभव भी हो सकता है।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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