
Also Read
Medically Verified By: Dr. Neetu Jain
ventilator
किसी मरीज के बारे में जब हम सुनते हैं कि "उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है", तो सबसे पहले मन में डर बैठ जाता है। कई लोगों को लगता है कि वेंटिलेटर पर जाने का मतलब अब मरीज का बचना मुश्किल है। जबकि, सच इससे थोड़ा अलग है। वेंटिलेटर कोई बीमारी का इलाज नहीं है। यह एक ऐसी मेडिकल मशीन है, जो तब मरीज की सांस लेने में मदद करती है, जब उसके फेफड़े या शरीर खुद यह काम ठीक से नहीं कर पाते हैं। आइए, PSRI Hospital के सीनियर कंसल्टेंट-पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन डॉ. नीतू जैन से जानते हैं वेंटिलेटर क्या होता है और डॉक्टर मरीज को कब वेंटिलेटर पर रखने का फैसला लेते हैं?
वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है, जो मरीज के फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने और शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने में मदद करती है। सामान्य परिस्थितियों में यह काम हमारे फेफड़े खुद करते हैं, लेकिन जब किसी बीमारी, चोट या संक्रमण की वजह से सांस लेना मुश्किल होता है, तब वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
अगर मरीज खुद पर्याप्त सांस नहीं ले पा रहा हो, तो डॉक्टर एक ट्यूब (एंडोट्रेकियल ट्यूब) मुंह या नाक के जरिए श्वासनली में डालते हैं और उसे वेंटिलेटर से जोड़ दिया जाता है। कुछ मामलों में लंबे समय तक वेंटिलेटर की जरूरत होने पर गर्दन के सामने एक छोटा छेद बनाकर ट्यूब डाली जाती है, जिसे ट्रेकियोस्टॉमी कहा जाता है।
डॉक्टर नीतू जैन बताती हैं, किसी जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही होती या मरीज प्रभावी ढंग से सांस नहीं ले पा रहा होता है। ऐसी स्थिति कई कारणों से हो सकती है, जैसे-
हर मरीज को ऑक्सीजन देने का मतलब यह नहीं है कि उसे वेंटिलेटर की जरूरत है। कई मरीज सिर्फ ऑक्सीजन मास्क से भी ठीक हो जाते हैं.
ज्यादातर मामलों में वेंटिलेटर की जरूरत तब पड़ती है, जब मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मरीज के ठीक होने की उम्मीद खत्म हो गई है।
डॉक्टर वेंटिलेटर का इस्तेमाल इसलिए करते हैं, ताकि शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे और फेफड़ों को आराम मिल सके। कई मरीज संक्रमण या सर्जरी से उबरने के बाद कुछ दिनों में वेंटिलेटर से हटा दिए जाते हैं।
डॉ. नीतू जैन बताती हैं, यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि वेंटिलेटर बीमारी का इलाज करता है। वेंटिलेटर बीमारी का इलाज नहीं करता, बल्कि तब तक शरीर को सहारा देता है, जब तक इलाज असर नहीं दिखाता है। जैसे- अगर मरीज को गंभीर निमोनिया है, तो उसका इलाज एंटीबायोटिक और अन्य दवाओं से होगा, वहीं वेंटिलेटर इस दौरान सांस लेने में मदद करेगा।
हर मेडिकल प्रक्रिया की तरह वेंटिलेटर से भी कुछ जोखिम जुड़े हो सकते हैं, खासकर अगर लंबे समय तक इसकी जरूरत पड़े। इनमें शामिल हैं-
Disclaimer: अगर किसी मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। वेंटिलेटर को आखिरी उम्मीद नहीं, बल्कि एक जीवनरक्षक सहायक तकनीक के रूप में समझना चाहिए। यह सही समय पर मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए अगर आप या आपका कोई परिजन-दोस्त वेंटिलेटर पर है, तो घबराएं नहीं। बल्कि, डॉक्टर से समय-समय पर उसकी स्थिति पूछते रहें।