
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : August 7, 2025 5:20 PM IST
Medically Verified By: Dr. Narendra Jha
Premature Baby
Preterm baby complications : हर साल लाखों की संख्या में प्रीट्रम बेबी यानि 37 सप्ताह से पहले बच्चे जन्म लेते हैं। इन्हें प्रीट्रम बेबी इसलिए कहा जाता है क्योंकि 37 सप्ताह से पहले गर्भ में शिशु का विकास पूरी तरह से नहीं हुआ होता है। ऐसे नवजात शिशुओं को कई तरह की स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के सीनियर पेडियाट्रिक्स कंसल्टेंट डॉ. नरेंद्र झा से जानते हैं समय से पहले यानि प्रीटम बच्चों में किन-किन बीमारियों के होने का खतरा रहता है?
समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। कई बार इन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। हालांकि, सभी बच्चों में इस तरह की परेशानी नहीं होती है।
इन शिशुओं का वजन आमतौर पर 2.5 किलोग्राम से कम होता है। इनका शरीर खुद को गर्म नहीं रख पाता, जिससे हाइपोथर्मिया (Hypothermia) का खतरा रहता है। ऐसे में इन्हें विशेष देखभाल यूनिट (NICU) में रखा जाता है।
समय से पहले जन्मे शिशुओं की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिससे उन्हें बार-बार संक्रमण (Infection), न्यूमोनिया और सेप्सिस जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। इसलिए इन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
प्रीमैच्योर बच्चों में इंट्रावेंट्रिकुलर हेमरेज (मस्तिष्क में रक्तस्राव) का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP) नामक आंखों की बीमारी भी हो सकती है, जो गंभीर होने पर अंधेपन का कारण बन सकती है।
इन बच्चों का पाचन तंत्र पूरी तरह से विकसित नहीं होता, जिससे इन्हें दूध पचाने में कठिनाई, अल्सर और नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस (NEC) जैसी आंतों की गंभीर समस्या हो सकती है।
समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं को भविष्य में बोलने में देरी, सीखने में कठिनाई और हाइपरएक्टिविटी जैसी न्यूरो-डिवेलपमेंट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में उनके विकास पर ध्यान दें और डेवलपमेंट माइलस्टोन की निगरानी करें।
समय से पहले जन्मे बच्चों में कई स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं, लेकिन आधुनिक चिकित्सा और समय पर देखभाल से ये बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। माता-पिता को जागरूक और सतर्क रहना बहुत ज़रूरी है।