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महिलाओं में एस्ट्रोजन कम होने के संकेत, कारण और इलाज कब जरूरी है?

महिलाओं में लो एस्ट्रोजन होने पर उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें पीरियड्स अनियमित होना, मूड स्विंग्स, हॉट फ्लैशेज, नींद की समस्या और हड्डियों की कमजोरी जैसे लक्षण शामिल हैं। लेकिन एस्ट्रोजन क्या है और यह शरीर को कैसे प्रभावित करता है? आइए जानते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : August 1, 2026 1:22 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Rita Bakshi

महिलाओं की सेहत कैसी होगी, इस पर काफी हद तक कई हार्मोन्स का बहुत बड़ा रोल होता है। ऐसा ही सबसे अहम हार्मोन है एस्ट्रोजन (estrogen)। जिस तरह पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन होता है, उसी तरह एस्ट्रोजन फीमेल सेक्स हार्मोन है। यह महिलाओं में यौन विकास, मेंस्ट्रुअल साइकिल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ को कंट्रोल करने का काम करता है। यह मुख्य रूप से अंडाशय (ओवरी) में बनता है, हालांकि एड्रेनल ग्रंथियां और फैट सेल्स भी इसकी थोड़ी मात्रा बनाते हैं।

कई बार महिलाओं को पीरियड्स में गड़बड़ी, अचानक मूड खराब होना या नींद न आना जैसी दिक्कतें महसूस होती हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि इसके पीछे की वजह लो एस्ट्रोजन भी हो सकता है। आज हम इस लेख में RISAA IVF की को-फाउंडर और सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर रीता बक्शी से आसान भाषा में समझेंगे कि आखिर जब महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन लेवल कम हो जाता है, तो उनके शरीर में क्या बदलाव दिखते हैं। साथ ही, समस्या कब गंभीर हो सकती है और डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?

एस्ट्रोजन कम होने का क्या मतलब?

low estrogen (Image Credit- ChatGPT) low estrogen (Image Credit- ChatGPT)

एस्ट्रोजन एक स्टेरॉयड हार्मोन है, जो मुख्य रूप से ओवरीज में बनता है। यह पीरियड्स साइकिल को नियमित रखने के साथ-साथ हड्डियों, स्किन, दिल और मूड को भी मैनेज करता है। जब यह हार्मोन शरीर में सामान्य से कम बनने लगता है, तो इसे लो एस्ट्रोजन कहा जाता है। यह सिर्फ मेनोपॉज की उम्र में ही नहीं, बल्कि 20 से 30 साल की युवा महिलाओं में भी हो सकता है।

इसके सामान्य लक्षण क्या हैं?

डॉक्टर बताती हैं कि लो एस्ट्रोजन के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ में यह हल्के होते हैं, तो कुछ में ज्यादा परेशान करने वाले हो सकते हैं। लेकिन अगर हम कुछ कॉमन बदलावों की बात करें तो वह इस प्रकार हैं-

पीरियड्स का अनियमित होना या बिल्कुल रुक जाना

  • हॉट फ्लशेज और रात में पसीना आना
  • वैजाइनल ड्राईनेस और यौन संबंध के दौरान दर्द
  • मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और उदासी
  • नींद न आना
  • हड्डियों का कमजोर होना
  • बाल झड़ना और स्किन का रूखा होना
  • बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) होना
  • कुछ महिलाओं में, खासकर मेनोपॉज के आसपास, शरीर में फैट का वितरण बदल सकता है और पेट के आसपास चर्बी बढ़ सकती है।

अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या एक साथ कई नजर आएं, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

क्या इसे घर पर मैनेज किया जा सकता है?

डॉक्टर के अनुसार "हल्के मामलों में लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके राहत पाई जा सकती है, जैसे बैलेंस्ड डाइट लेना, नींद पूरी करना, तनाव कम करना और हल्की एक्सरसाइज करना। सोया प्रोडक्ट, अलसी के बीज और कुछ अन्य पौधों में पाए जाने वाले फाइटोएस्ट्रोजन कुछ महिलाओं को फायदा पहुंचा सकते हैं, लेकिन इनके प्रभाव सीमित हैं और इन्हें इलाज का विकल्प नहीं माना जाता, खासकर जब लक्षण ज्यादा हों या लंबे समय से बने हुए हों।"

डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी है?

कुछ स्थितियों में सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं होता, बल्कि डॉक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है-

ऐसे मामलों में डॉक्टर आमतौर पर हार्मोन पैनल टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, जिसमें एस्ट्राडियोल (estradiol), FSH, LH और थायरॉइड लेवल चेक किए जाते हैं, ताकि सही वजह पता चल सके और सही इलाज शुरू हो सके।

डॉक्टर ने दी सलाह

डॉक्टर ने सभी महिलाओं को सलाह देते हुए कहा कि लो एस्ट्रोजन सिर्फ एक हार्मोनल बदलाव नहीं है, बल्कि इसका असर पीरियड्स, हड्डियों, स्किन, मूड और दिल तक, शरीर के लगभग हर हिस्से पर पड़ता है। इसलिए इन बदलावों को "सिर्फ उम्र का असर" समझकर नजरअंदाज न करें। सही जांच और उपचार से इस स्थिति को प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ की सलाह पर आधारित है, लेकिन यह किसी चिकित्सीय परामर्श या उपचार का विकल्प नहीं है। अगर आपको पीरियड्स देर से आ रहे हैं या रुक गए हैं या अन्य कोई परेशानी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।