
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : May 6, 2026 1:40 PM IST
Medically Verified By: Dr Satyendra Katewa
thalassemia
थैलेसीमिया मेजर एक गंभीर जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है, जिसमें बच्चे का शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता है। हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में मौजूद वह प्रोटीन है, जो शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी के कारण बच्चे को जीवन के शुरुआती महीनों, आमतौर पर 6 से 12 महीने की उम्र में ही गंभीर एनीमिया होने लगती है। मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के हीमैटो-ऑन्कोलॉजी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी, सीनियर डायरेक्टर डॉ. सत्येंद्र कटेवा का कहना है कि थैलेसीमिया सिर्फ एक अंग की बीमारी नहीं है, यह मुख्य रूप से रेड ब्लड सेल्स और बोन मैरो को प्रभावित करता है, लेकिन लंबे समय तक शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकता है, जो अलग-अलग हो सकते हैं। आइए पहले थैलेसीमिया के बारे में विस्तार से समझते हैं-
यह बीमारी जीन में बदलाव के कारण होती है, जो बच्चे को माता-पिता दोनों से विरासत में मिलती है। आमतौर पर ऐसे मामलों में माता-पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर होते हैं। इस बीमारी से प्रभावित बच्चों में कुछ सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे- स्किन का पीला पड़ना, शारीरिक विकास में रुकावट, जल्दी थकान महसूस होना, चिड़चिड़ापन और स्प्लीन का बढ़ जाना, इत्यादि। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह बीमारी बच्चे के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है और जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकती है।
थैलेसीमिया मेजर की पहचान ब्लड टेस्ट के जरिए की जाती है।
सीबीसी टेस्ट : इससे हीमोग्लोबिन का स्तर कम और लाल रक्त कोशिकाएं छोटी होने का पता चलता है।
हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस (HPLC) : यह टेस्ट थैलेसीमिया के प्रकार (मेजर या माइनर) की पुष्टि करता है।
जेनेटिक टेस्टिंग : परिवार को सही काउंसलिंग देने और बीमारी की पुष्टि के लिए यह जांच की जा सकती है।
गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग : प्रेग्नेंसी में जांच के जरिए गर्भ में पल रहे शिशु में इस बीमारी का जोखिम पहले ही पहचाना जा सकता है, ताकि डॉक्टर की सलाह से सही निर्णय लिया जा सके।
डॉक्टर कहते हैं कि यह ब्लड से जुड़ी बीमारी है, ऐसे में सीधे तौर पर थैलेसीमिया किसी अंग को प्रभावित नहीं करता है। लेकिन अगर लंबे समय तक यह बीमारी रहती है, तो शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं इन अंगों के बारे में-
Image credits: ChatGPT
थैलेसीमिया के कारण तिल्ली यानि प्लीहा Spleen प्रभावित हो सकता है। यह खराब रेड ब्लड सेल्स को हटाने के कारण बढ़ सकती है। कई मरीजों में स्प्लीन बहुत बड़ी हो जाती है।
Disclaimer : ध्यान रखें कि थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है। अगर आपको अपने बच्चों में इसके लक्षण दिखे, तो फौरन अपने डॉक्टर से सलाह लें और समय पर इलाज शुरू करा लें।
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