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Stretch marks during pregnancy : प्रेग्नेंसी एक खूबसूरत सफर होता है, लेकिन इसके साथ शरीर में कई तरह के बदलाव भी देखे जाते हैं। इन्हीं बदलावों में से एक होता है, पेट पर स्ट्रेच मार्क्स का दिखना। यह समस्या आम मानी जाती है, लेकिन हर महिला में इसका असर अलग-अलग दिखता है। स्ट्रेच मार्क्स तब बनते हैं जब त्वचा तेजी से फैलती है और स्किन की अंदरूनी परतों में खिंचाव आता है। इस दौरान कोलेजन और इलास्टिन फाइबर कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे त्वचा पर लकीरें दिखाई देने लगती हैं। इस लेख में हम डॉक्टर नारायणा हॉस्पिटल की डॉक्टर इंदीरा सरीन से जानेंगे कि प्रेग्नेंसी में स्ट्रेच मार्क्स किन लोगों को अधिक होती है और इस परेशानी को कम करने के क्या उपाय हैं?
प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ महिलाओं में स्ट्रेच मार्क्स ज्यादा स्पष्ट रूप से नजर आते हैं। यह कई कारणों पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं इन कारणों के बारे में-
मोटापा - सबसे पहले, जिन महिलाओं का वजन प्रेग्नेंसी के दौरान तेजी से बढ़ता है, उनमें स्ट्रेच मार्क्स ज्यादा बनने की संभावना रहती है। त्वचा को अचानक ज्यादा खिंचाव सहना पड़ता है, जिससे निशान गहरे हो जाते हैं।
अनुवांशिक कारक - अगर परिवार में पहले से स्ट्रेच मार्क्स की समस्या देखी जाती है, तो यह जेनेटिक कारण भी माना जाता है। ऐसे मामलों में त्वचा की इलास्टिसिटी कम होती है।
ड्राई स्किन वाली महिलाएं - जिन महिलाओं की त्वचा ड्राई होती है, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। ड्राई स्किन जल्दी फटती है और उस पर निशान बनने का खतरा बढ़ जाता है।
जुड़वा बच्चे होना - जुड़वा या अधिक बच्चों की प्रेग्नेंसी में पेट ज्यादा तेजी से बढ़ता है, जिससे स्ट्रेच मार्क्स अधिक दिखाई देते हैं।
हार्मोनल बदलाव - हार्मोनल बदलाव भी एक बड़ा कारण माना जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोन स्किन की संरचना को प्रभावित करते हैं, जिससे स्ट्रेच मार्क्स बनने लगते हैं।
डॉक्टर का कहना है कि शुरुआत में स्ट्रेच मार्क्स का रंग गुलाबी, लाल या बैंगनी रंग के दिखाई देते हैं। समय के साथ इनका रंग हल्का होकर सफेद या सिल्वर हो जाता है। ये आमतौर पर पेट, जांघों, हिप्स और ब्रेस्ट पर देखे जाते हैं।
डॉक्टर सरीन का कहना है कि स्ट्रेच मार्क्स को पूरी तरह हटाना मुश्किल माना जाता है, लेकिन सही देखभाल से इन्हें हल्का जरूर किया जा सकता है। शुरुआती समय में ध्यान देने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। आइए जानते हैं स्ट्रेच मार्क्स कम करने के आसान टिप्स -
अगर आप प्रेग्नेंसी के दौरान स्ट्रेच मार्क्स नहीं चाहते हैं, तो सबसे पहले अपनी स्किन को हाइड्रेट रखें। प्रेग्नेंसी के दौरान पेट, जांघ और बाजू पर रोजाना नारियल तेल, बादाम तेल या कोकोआ बटर का लगाएं। ऐसा करने से स्किन काफी सॉफ्ट हो सकता है, इससे त्वचा पर खिंचाव कम हो सकता है।
पर्याप्त रूप से पानी न पीने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है, जिसकी वजह से स्किन ड्राी होने लगती है। अगर आप रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीते हैं, तो इससे आपकी स्किन हेल्दी नजर आती है। इससे स्ट्रेच मार्क्स की समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है।
प्रेग्नेंसी में वजन का बढ़ना सामान्य होता है, लेकिन इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर माना जाता है। अगर आपका वजन अचानक से काफी ज्यादा बढ़ने लगता है, तो इसकी वजह से स्ट्रेच मार्क्स आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में स्किन पर दबाव पड़ता है, जो स्ट्रेच मार्क्स का कारण बन सकता है। इसलिए अपने वजन को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें। र दबाव ज्यादा पड़ता है।
सही आहार लेने से आपकी स्किन की क्वालिटी बेहतर होती है। मुख्य रूप से विटामिन C, E और प्रोटीन से भरपूर आहार लें। इस तरह के आहार का सेवन करने से स्किन की इलास्टिसिटी बनाए रखने में मदद करता है। हरी सब्जियां, फल और नट्स का सेवन फायदेमंद माना जाता है।
डॉक्टर की सलाह से हल्की एक्सरसाइज करें। नियमित रूप से हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे आपकी स्किन हेल्दी रहती है और स्किन से जुड़ी परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। नेचुरल और माइल्ड प्रोडक्ट्स का चयन बेहतर माना जाता है।
अगर स्ट्रेच मार्क्स के साथ खुजली, जलन या स्किन में इन्फेक्शन जैसे लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है। इसके अलावा, अगर निशान बहुत ज्यादा गहरे हो जाते हैं, तो विशेषज्ञ की मदद ली जा सकती है।
प्रेग्नेंसी में स्ट्रेच मार्क्स एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, जिसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही देखभाल से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित मॉइस्चराइजिंग, हेल्दी डाइट और संतुलित जीवनशैली अपनाने से त्वचा को बेहतर रखा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह मानी जाती है कि इस बदलाव को आत्मविश्वास के साथ स्वीकार किया जाए, क्योंकि यह मातृत्व की एक स्वाभाविक निशानी होती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।