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Medically Verified By: Dr Indu Khosla
Causes of Lungs fibrosis
Causes of Lungs fibrosis : आज के समय में लोगों को कई तरह की परेशानी हो रही है, जिसमें फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं। लंग्स से जुड़ी परेशानी मं फेफड़ों में फाइब्रोसिस की परेशानी काफी लोगों को हो रही है। यह परेशानी बच्चों को भी हो सकती है, लेकिन बच्चों में यह काफी रेयर होता है। मुंबई स्थिति नारायण हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. इंदु खोसला का कहना है कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस की स्थिति में फेफडों के कुछ हिस्सों में स्कार टिशू बन जाता है। स्कार टिशू सख्त हो जाते हैं। यह खिंचता नहीं है। इस सख्तपन की वजह से फेफड़े पूरी तरह से फैल नहीं पाते और ऑक्सीजन का फ्लो कम होने लगता है। इस स्थिति में काफी ज्यादा थकान होने लगती है। साथ ही हल्के-फुल्के काम करने में भी परेशानी होती है। वहीं, बच्चे को अगर इस तरह की दिक्कत हो जाए, तो वे खेलने-कूदने से कतराते हैं।
डॉ. इंदु खोसला काा कहन है कि फेफड़ों में फाइब्रोसिस के कई कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन कारणों के बारे में-
डॉक्टर का कहना है कि बहुत कम मामलों में कोई साफ कारण पता नहीं चलता। इसे इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस कहते हैं, हालांकि यह बच्चों में आम नहीं है। वयस्कों को इस तरह की परेशानी होने का खतरा अधिक रहता है।
फेफड़ों में फाइब्रोसिस होने के शुरुआती लक्षण काफी कम दिखाई देते हैं, ऐसे में स्थिति का पता चलने में देरी हो सकती है। कुछ लक्षण आपको दिखाई दे सकते हैं, जो निम्न हैं-
डॉक्टर का कहना है कि इस स्थिति का पता लगाने के लिए आमतौर पर हाई-रिजॉल्यूशन CT (HRCT) स्कैन, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, ऑक्सीजन सैचुरेशन मॉनिटरिंग और कभी-कभी एयरवे की डिटेल जांच के लिए ब्रोंकोस्कोपी शामिल होती है।
डॉक्टर का कहना है कि फेफड़ों में फाइब्रोसिस का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि फाइब्रोसिस किस वजह से हुआ है और यह कितना बढ़ा हुआ है। इसका इलाज करने के लिए डॉक्टर कुछ इस तरह की सलाह दे सकते हैं-
पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. इंदु खोसला का कहना है कि स्कार टिश्यू को हमेशा ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन जल्दी डायग्नोसिस और लगातार फॉलो-अप से प्रोग्रेस धीमी हो सकती है और रोजाना के काम करने के तरीके बेहतर हो सकते हैं। इसके लिए आपको मॉनिटरिंग और मल्टीडिसिप्लिनरी देखभाल की जरूरत होती है। वहीं, अगर किसी बच्चे को यह डायग्नोसिस हुआ है, जो वे स्कूल जाना जारी रखते हैं, लेकिन खेल-कूद को थोड़ा लिमिट में कर दिया जाता है। लेकिन वे एक सामान्य लाइफ जी सकते हैं।