फेफड़ों में फाइब्रोसिस होने का क्या कारण है? डॉक्टर से जानते हैं कैसे होता है इसका इलाज

Lungs fibrosis : फेफड़ों से जुड़ी तमाम परेशानियों में लंग्स फाइब्रोसिस की परेशानी शामिल है। यह बड़ों से लेकर बच्चों को हो सकता है। आइए डॉक्टर से जानते हैं इस समस्या के बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : February 16, 2026 2:35 PM IST

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Medically Verified By: Dr Indu Khosla

Causes of Lungs fibrosis : आज के समय में लोगों को कई तरह की परेशानी हो रही है, जिसमें फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं। लंग्स से जुड़ी परेशानी मं फेफड़ों में फाइब्रोसिस की परेशानी काफी लोगों को हो रही है। यह परेशानी बच्चों को भी हो सकती है, लेकिन बच्चों में यह काफी रेयर होता है। मुंबई स्थिति नारायण हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. इंदु खोसला का कहना है कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस की स्थिति में फेफडों के कुछ हिस्सों में स्कार टिशू बन जाता है। स्कार टिशू सख्त हो जाते हैं। यह खिंचता नहीं है। इस सख्तपन की वजह से फेफड़े पूरी तरह से फैल नहीं पाते और ऑक्सीजन का फ्लो कम होने लगता है। इस स्थिति में काफी ज्यादा थकान होने लगती है। साथ ही हल्के-फुल्के काम करने में भी परेशानी होती है। वहीं, बच्चे को अगर इस तरह की दिक्कत हो जाए, तो वे खेलने-कूदने से कतराते हैं।

किन कारणों से फेफड़ों में होता है फाइब्रोसिस - Causes of Lungs fibrosis

डॉ. इंदु खोसला काा कहन है कि फेफड़ों में फाइब्रोसिस के कई कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन कारणों के बारे में-

  1. अगर किसी को गंभीर वायरल या बैक्टीरियल निमोनिया हुआ है, तो फेफड़ों में इन्फेक्शन की वजह से कुछ हद तक लंग्स डैमेज हो जाते हैं। ऐसे में फेफड़ों में फाइब्रोसिस होने का खतरा रहता है।
  2. शरीर की इम्यून सिस्टम कमजोर होने की वजह से इंटरस्टीशियल लंग डिजीज होने का खतरा रहता है, जिसमें लंग्स में फाइब्रोसिस होने का खतरा रहता है।
  3. फेफड़ों की बनावट या सर्फेक्टेंट प्रोडक्शन पर असर डालने वाले जेनेटिक डिसऑर्डर के कारण भी  फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो सकता है।
  4. क्रोनिक एस्पिरेशन, जिसमें बार-बार निगलने में दिक्कतहोने पर खाना या दूध सांस की नली में चला जाता है। ऐसे में बच्चे को फेफड़ों में फाइब्रोसिस होने का खतर रहता है।
  5. ऑटोइम्यून बीमारियां, जैसे कि बच्चों में कनेक्टिव टिशू डिसऑर्डर के कारण भी इस तरह की परेशानी हो सकती है।

डॉक्टर का कहना है कि बहुत कम मामलों में कोई साफ कारण पता नहीं चलता। इसे इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस कहते हैं, हालांकि यह बच्चों में आम नहीं है। वयस्कों को इस तरह की परेशानी होने का खतरा अधिक रहता है।

फेफड़ों में फाइब्रोसिस के लक्षण क्या हैं? - Symptoms of Lungs fibrosis

फेफड़ों में फाइब्रोसिस होने के शुरुआती लक्षण काफी कम दिखाई देते हैं, ऐसे में स्थिति का पता चलने में देरी हो सकती है। कुछ लक्षण आपको दिखाई दे सकते हैं, जो निम्न हैं-

फेफड़ों में फाइब्रोसिस का कैसे पता चलता है?

डॉक्टर का कहना है कि इस स्थिति का पता लगाने के लिए आमतौर पर हाई-रिजॉल्यूशन CT (HRCT) स्कैन, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, ऑक्सीजन सैचुरेशन मॉनिटरिंग और कभी-कभी एयरवे की डिटेल जांच के लिए ब्रोंकोस्कोपी शामिल होती है।

कैसे होता है फेफड़ों में फाइब्रोसिस का इलाज?

डॉक्टर का कहना है कि फेफड़ों में फाइब्रोसिस का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि फाइब्रोसिस किस वजह से हुआ है और यह कितना बढ़ा हुआ है। इसका इलाज करने के लिए डॉक्टर कुछ इस तरह की सलाह दे सकते हैं-

  1. सूजन वाली ILD में कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स या इम्यूनोमॉड्यूलेटरी थेरेपी होना
  2. कुछ खास प्रोग्रेसिव मामलों में एंटीफाइब्रोटिक दवा दी जाती है।
  3. हाइपोक्सिया होने पर ऑक्सीजन थेरेपी की भी सलाद दी जा सकती है।
  4. पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन और ब्रीथिंग एक्सरसाइज भी जरूरी होता है।
  5. ग्रोथ और इम्यूनिटी को सपोर्ट करने के लिए न्यूट्रिशन ऑप्टिमाइजेशन के लिए कह सकते हैं।
  6. इसके अलावा गंभीर मामलों में प्रोग्रेसिव बीमारी में लंग ट्रांसप्लांटेशन भी हो सकता है।

पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. इंदु खोसला का कहना है कि स्कार टिश्यू को हमेशा ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन जल्दी डायग्नोसिस और लगातार फॉलो-अप से प्रोग्रेस धीमी हो सकती है और रोजाना के काम करने के तरीके बेहतर हो सकते हैं। इसके लिए आपको मॉनिटरिंग और मल्टीडिसिप्लिनरी देखभाल की जरूरत होती है। वहीं, अगर किसी बच्चे को यह डायग्नोसिस हुआ है, जो वे स्कूल जाना जारी रखते हैं, लेकिन खेल-कूद को थोड़ा लिमिट में कर दिया जाता है। लेकिन वे एक सामान्य लाइफ जी सकते हैं।

Highlights

  • फेफड़ों में फाइब्रोसिस का कारण कमजोर इम्यूनिटी हो सकती है।
  • किसी तरह के चोट की वजह से फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो सकता है।
  • बैक्टीरियल निमोनिया के कारण यह स्थिति गंभीर हो सकती है।