
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. (Prof) Vinit Banga
Brain stroke symptoms
Signs of Weak Blood Vessels : दिमाग हमारे शरीर का कंट्रोल सेंटर है और इसे लगातार ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने का काम ब्लड वेसेल्स करती हैं। जब इन नसों में ब्लॉकेज, कमजोरी, ब्लड सर्कुलशन में कमी या कोई अन्य समस्या होती है, तो ब्रेन सही तरीके से काम नहीं कर पाता। फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और एचओडी व जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर विनीत बांगा का कहना है कि आम भाषा में इस स्थिति को लोग दिमाग की नसें कमजोर होना कहते हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस में यह स्ट्रोक, ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक, एन्यूरिज्म या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में शरीर कई चेतावनी संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
दिमाग की नसें कमजोर होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, जिसपर हमें ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-
अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द शुरू हो जाए और दर्द इतना अधिक हो कि पहले कभी ऐसा अनुभव न हुआ हो, तो इसे सामान्य माइग्रेन या तनाव का सिरदर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई मामलों में यह मस्तिष्क की रक्त वाहिका फटने या स्ट्रोक का शुरुआती संकेत हो सकता है। अगर सिरदर्द के साथ उल्टी, चक्कर, बेहोशी या गर्दन में अकड़न भी हो, तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
Headache
चेहरे, हाथ या पैर के सिर्फ एक ओर अचानक कमजोरी महसूस होना स्ट्रोक का सबसे सामान्य लक्षण माना जाता है। कई बार व्यक्ति को हाथ उठाने में दिक्कत होती है, पैर लड़खड़ाने लगता है या चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा दिखाई देने लगता है। कुछ लोगों को झुनझुनी या सुन्नपन भी महसूस होता है। यह संकेत बताता है कि ब्रेन के उस हिस्से तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच रहा है जो शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
डॉक्टर कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति अचानक साफ-साफ बोलना बंद कर दे, शब्द लड़खड़ाने लगें या सामने वाले की बात समझने में कठिनाई होने लगे, तो यह दिमाग की नसों में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। कई बार मरीज सही शब्द बोलना चाहता है, लेकिन मुंह से गलत शब्द निकलते हैं या आवाज अस्पष्ट हो जाती है। ऐसी स्थिति में समय गंवाना खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह स्ट्रोक का प्रमुख लक्षण है।
अचानक चक्कर आना, चलते समय लड़खड़ाना, खड़े रहने में कठिनाई होना या बिना कारण गिर जाना भी दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन की समस्या का संकेत हो सकता है। यदि चक्कर के साथ धुंधला दिखना, उल्टी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी भी महसूस हो रही हो, तो इसे सामान्य कमजोरी या लो ब्लड प्रेशर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
यदि एक या दोनों आंखों से अचानक धुंधला दिखाई देने लगे, दो-दो चीजें दिखाई दें या कुछ समय के लिए नजर चली जाए, तो यह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में रुकावट का संकेत हो सकता है। कई बार यह लक्षण कुछ मिनटों के लिए आता है और फिर ठीक हो जाता है, लेकिन इसे हल्के में लेना बड़ी भूल हो सकती है क्योंकि यह भविष्य में स्ट्रोक का खतरा बढ़ने का संकेत हो सकता है।
अगर व्यक्ति को अचानक चीजें याद रखने में परेशानी होने लगे, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो, भ्रम की स्थिति बने या रोजमर्रा के सामान्य काम करने में दिक्कत आने लगे, तो यह भी मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम होने या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है। हालांकि यह लक्षण कई अन्य बीमारियों में भी दिखाई देता है, इसलिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) केे मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का सबसे बड़ा जोखिम कारक है और इसे नियंत्रित रखकर स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन की FAST (Face, Arm, Speech, Time) गाइडलाइन बताती है कि यदि चेहरा टेढ़ा हो जाए, हाथ में कमजोरी आ जाए या बोलने में परेशानी हो, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक (NINDS) के अनुसार स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर इलाज मिलने से मस्तिष्क को होने वाले स्थायी नुकसान का खतरा काफी कम हो जाता है।
अगर किसी व्यक्ति में अचानक चेहरा टेढ़ा हो जाए, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी आ जाए, बोलने में दिक्कत हो, तेज सिरदर्द हो, नजर धुंधली हो जाए या बार-बार संतुलन बिगड़ने लगे, तो बिना देरी किए इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। ऐसे मामलों में समय पर इलाज ही जीवन बचाने और स्थायी विकलांगता के खतरे को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
Disclaimer : दिमाग की नसों की कमजोरी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का शुरुआती संकेत हो सकता है। अगर ऊपर बताए गए लक्षण अचानक दिखाई दें तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या इमरजेंसी मेडिकल सुविधा लें। समय पर इलाज से स्ट्रोक और अन्य गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।