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What i diabetes ketoacidosis: डायबिटीज एक के समय में एक कोमन बीमारी बनती जा रही है और देखा जा रहा है कि कम उम्र के लोगों में भी डायबिटीज की समस्या बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण अस्वस्थ आहार, लाइफस्टाइल, मोटापा और मानसिक तनाव है। लेकिन यह भी सच है कि डायबिटीज के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन उससे होने वाली कॉम्पलिकेशन्स यानी जटिलताओं के बारे में बहुत ही कम लोगों को सही जानकारी है। क्या आपने कभी डायबिटीज कीटोएसिडोसिस या डायबिटीज में कीटोन बनने के बारे में सुना है? दरअसल, डायबिटीज में कीटोन का बनना एक ऐसी स्थिति है, जब शरीर इंसुलिन की कमी के कारण सही तरीके से चीनी (ग्लूकोज) का उपयोग नहीं कर पाता। इसके बजाय, शरीर ऊर्जा के लिए वसा (फैट) का उपयोग करना शुरू कर देता है, जिससे कीटोन नामक रसायन उत्पन्न होते हैं। अगर कीटोन का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो यह खून में एसिड्स बढ़ा सकता है, जिसे कीटोएसिडोसिस कहा जाता है।
यह स्थिति गंभीर हो सकती है और यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इस कॉम्पलिकेशन के बारे में जरूर पता होना चाहिए। इस लेख में हम आपको इसके बारे में खास जानकारी देने वाले हैं, तो चलिए जानते हैं क्या है डायबिटीज में कीटोन बनना, इसके लक्षण व उपचार।
1. मुंह से फल जैसी गंध: अगर शरीर में कीटोन का स्तर बढ़ता है, तो मुंह से फल जैसी गंध आ सकती है, जो कीटोएसिडोसिस (Ketoacidosis) का संकेत होती है। यह स्थिति तब होती है, जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन की कमी के कारण ऊर्जा के लिए वसा का उपयोग करने लगता है, जिससे कीटोन उत्पन्न होते हैं।
2. कमजोरी और थकावट: शरीर में कीटोन का स्तर बढ़ने से थकावट और कमजोरी महसूस हो सकती है, क्योंकि शरीर वसा का उपयोग करके ऊर्जा प्राप्त करने लगता है, जबकि उसे ग्लूकोज से ऊर्जा मिलनी चाहिए। इस स्थिति में शरीर ठीक से काम नहीं कर पाता, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है।
3. अत्यधिक प्यास लगना: कीटोन की अधिकता से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे किडनी पर दबाव बढ़ता है और अधिक पेशाब आता है। इस स्थिति में शरीर पानी को बचाने की कोशिश करता है, जिससे अत्यधिक प्यास लगने लगती है, जो कि कीटोएसिडोसिस का सामान्य लक्षण है।
4. उल्टी और पेट में दर्द: कीटोन का उच्च स्तर पेट में दर्द और उल्टी की समस्या उत्पन्न कर सकता है, क्योंकि जब शरीर में कीटोन जमा हो जाते हैं, तो यह शरीर को विषाक्त बना सकता है। इससे पेट में ऐंठन, दर्द और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो कीटोएसिडोसिस के लक्षण हैं।
- डायबिटीज के रोगियों को अपने ब्लड शुगर लेवल को नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। इससे कीटोन के स्तर का भी पता चल सकता है।
- कीटोन का स्तर बढ़ने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए पर्याप्त पानी पीना आवश्यक है।
- अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर अपनी इंसुलिन डोज का सही प्रबंधन करें।
- अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट की उचित मात्रा रखें और डॉक्टर द्वारा दी गई डायबिटीज की डाइट को फॉलो करें।
अगर आप इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव करें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि यह स्थिति गंभीर हो सकती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।