
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : April 17, 2026 10:16 AM IST
Medically Verified By: Dr Sana Bhamla
Image credits by: Fifth disease
Fifth Disease Symptoms : छोटे बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा काफी ज्यादा रहता है। जन्म के 5 साल तक बच्चे अक्सर किसी न किसी संक्रमण से प्रभावित होते रहते हैं, जिसमें फिफ्थ डिजीज (fifth disease) भी शामिल है। हम में से कई लोग इस इंफेक्शन के बारे में शायद ही जानते हों। यह एक ऐसा संक्रमण है, जो बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। इस संक्रमण की अधिक जानकारी के लिए हमने मुंबई स्थित नारायणा हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सना भामला से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से जानते हैं फिफ्थ डिजीज क्या है, इसके लक्षण और कारण क्या हैं?
फिफ्थ डिजीज, जिसे आम बोलचाल की भाषा में स्लैप्ड चीक सिंड्रोम (Slapped Cheek Syndrome) कहा जाता है, बच्चों में होने वाला एक सामान्य वायरल संक्रमण है। यह बीमारी पार्वोवायरस B19 इंफेक्शन के कारण होती है। यह वायरस मुख्य रूप से सांस की बूंदों के जरिए फैलता है यानी जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो उसके संपर्क में आने वाले बच्चों को यह संक्रमण हो सकता है।
डॉक्टर सना कहती हैं कि यह बीमारी मुख्य रूप से 5 से 15 साल के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि इस उम्र में बच्चे स्कूल जाते हैं और एक-दूसरे के करीब रहते हैं, जिससे संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, यह बीमारी आमतौर पर हल्की होती है और ज्यादातर मामलों में बिना किसी गंभीर समस्या के अपने आप ठीक हो जाती है।
फिफ्थ डिजीज का सबसे प्रमुख लक्षण चेहरे पर दिखाई देने वाला लाल चकत्ता (rash) है। इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण हैं, जैसे-बच्चों के गाल अचानक बहुत लाल हो जाना, जैसे किसी ने थप्पड़ मारा हो। इसके बाद शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे हाथ, पैर और धड़ पर जालीदार पैटर्न वाला रैश दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे-
ये लक्षण आम सर्दी-जुकाम जैसे लग सकते हैं, इसलिए शुरुआत में इसे पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि जब तक रैश दिखाई देता है, तब तक बच्चा आमतौर पर दूसरों के लिए कम संक्रामक हो जाता है।
इस बीमारी की एक खास बात यह भी है कि रैश कभी-कभी दोबारा उभर सकता है। खासकर जब बच्चा धूप में जाए, गर्मी लगे या ज्यादा शारीरिक गतिविधि करे, तो रैश फिर से दिख सकता है। हालांकि. यह कोई गंभीर बात नहीं होती और धीरे-धीरे अपने आप ठीक हो जाती है।
डॉक्टर सना कहती हैं कि फिफ्थ डिजीज का कोई विशेष इलाज नहीं होता, क्योंकि यह एक वायरल संक्रमण है। इसलिए इसका उपचार मुख्य रूप से लक्षणों को कम करने पर आधारित होता है। बस आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे- बच्चों को आराम देना। पर्याप्त पानी पिलाना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से हल्की दवाएं देना काफी होता है।
अधिकांश बच्चों में यह बीमारी बिना किसी जटिलता के ठीक हो जाती है। हालांकि, जिन बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होती है या जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी है, उनमें डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है। कुल मिलाकर डॉक्टर का कहना है कि फिफ्थ डिजीज एक सामान्य और हल्की बीमारी है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं होती। सही देखभाल और साफ-सफाई का ध्यान रखकर इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
फिफ्थ डिजीज 5 से 15 साल के बच्चों में होने की संभावना अधिक होती है।
फिफ्थ डिजीज होने पर बच्चों के गाल पर थप्पड़ जैसे निशान दिख सकते हैं।
फिफ्थ डिजीज एक कॉमन संक्रमण बीमारी है।
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