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फेफड़ों में पानी भर जाना क्या है? खांसी-जुकाम जैसे लक्षण न करें नजरअंदाज

Pulmonary Edema: फेफड़ों में पानी भर जाना कोई आम समस्या नहीं बल्कि एक जानलेवा स्थिति बन सकती है और इससे होने वाले इसके शुरुआती लक्षण आमतौर पर कई समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।

फेफड़ों में पानी भर जाना क्या है? खांसी-जुकाम जैसे लक्षण न करें नजरअंदाज

Written by Mukesh Sharma |Published : September 7, 2025 7:14 PM IST

Fefdo me Pani Bharna Kya Hai: आपने फेफड़ों में पानी भरने की बात कहीं न कहीं जरूर सुनी होगी। यह सुनकर आपको हैरानी भी हुई होगी कि आखिर फेफड़ों में पानी कैसे भर सकता है? लेकिन यह एक वास्तविक और गंभीर मेडिकल कंडीशन है, जिसे मेडिकल भाषा में पल्मोनरी एडिमा कहा जाता है। इसमें फेफड़ों के अंदर छोटे एयर सैक्स यानी हवा की थैलियों में तरल जमा हो जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। पल्मोनरी एडिमा के बारे में ज्यादातर लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं है। विशेषज्ञों अनुसार यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

फेफड़ों में पानी भर जाना क्या है?

फेफड़ों में पानी भर जाना गंभीर चिकित्सा स्थिति है। इस स्थिति में फेफड़ों के छोटे-छोटे एयर सैक्स में पानी भर जाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। परिणामस्वरूप, सांस लेने में कठिनाई होने लगती है और व्यक्ति को तेज सांस फूलने, खांसने और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति जीवन के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए इसे तुरंत गंभीरता से लेना चाहिए।

लक्षणों को नजरअंदाज न करें

विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़ों में पानी भर जाने के कारण शुरुआत में खांसी, सीने में जकड़न, थकान और सांस फूलने जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं, जिन्हें आप जैसे अधिकतर लोग सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर अनदेखा कर देते हैं, जो कि लाजमी है। लेकिन जब फेफड़ों में पानी जमा होने लगता है, तो यह लक्षण तेजी से गंभीर रूप ले सकते हैं, जिसे आपको लगती से भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे, सांस लेने में दिक्कत होती रहे या बिना श्रम, परिश्रम, या कठिन मेहनत के भी सांस फूलने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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(और पढ़ें - फेफड़ों में पानी भर जाए तो क्या करें)

कैसे पहचानें लक्षण?

फेफड़ों में पानी भरने की स्थिति धीरे-धीरे भी विकसित हो सकती है और अचानक भी। इसलिए आपको अपना पूरा ध्यान रखना है और किसी भी लक्षण को इग्नोर नहीं करना है। सामान्य रूप से यह लगातार खांसी, थकान, सांस लेने में तकलीफ (विशेषकर लेटने पर), पैरों व टखनों में सूजन, वजन बढ़ने और नींद में रुकावट के रूप में सामने आते हैं। जबकि तीव्र अवस्था की बात की जाए तो इसमें अचानक तेज सांस फूलना, खांसी के साथ गुलाबी झागदार बलगम, सीने में दबाव, दिल की धड़कन तेज होना, त्वचा का नीला पड़ना और भ्रम या चक्कर जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, जिसे आप पहचान सकते हैं।

(और पढ़ें - सांस लेने में दिक्कत होने लगे तो क्या करें)

फेफड़ों में पानी क्यों भरता है?

फेफड़ों में पानी भरने के कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है- कार्डियोजेनिक (हृदय से संबंधित) और नॉन-कार्डियोजेनिक (अन्य कारणों से)। कार्डियोजेनिक पल्मोनरी एडिमा तब होता है, जब हृदय सही ढंग से रक्त को पंप नहीं कर पाता और रक्त का दबाव फेफड़ों की नसों में बढ़ने लगता है और तरल पदार्थ फेफड़ों में रिसने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा होने के मुख्य कारणों में हार्ट फेल्योर, दिल का दौरा, हृदय वॉल्व की खराबी और उच्च रक्तचाप शामिल हैं। वहीं नॉन-कार्डियोजेनिक पल्मोनरी एडिमा के कारणों में फेफड़ों में संक्रमण (जैसे निमोनिया), फेफड़ों पर चोट, विषैली गैसों या धुएं का संपर्क, अधिक ऊंचाई पर जाना, किडनी फेल्योर, ड्रग ओवरडोज या शरीर में अत्यधिक तरल पदार्थ इंजेक्ट किया जाना शामिल है। इन सभी कारणों से फेफड़ों में तरल जमा हो जाते हैं और सांस लेने में गंभीर समस्या उत्पन्न होने लगती है।

पल्मोनरी एडिमा का इलाज

पल्मोनरी एडिमा एक आपातकालीन स्थिति होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिसका इलाज लक्षणों की गंभीरता और इसके मूल कारण पर निर्भर करता है। इलाज का प्रमुख उद्देश्य फेफड़ों से पानी को निकालना, ऑक्सीजन के स्तर को सामान्य करना और कारणों को नियंत्रित करना होता है। इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले ऑक्सीजन थेरेपी देते हैं, जिससे पीड़ित सही ढंग से सांस ले पाता है। वहीं गंभीर मामलों में वेंटिलेटर की आवश्यकता तक पड़ सकती है। विशेषज्ञ डाययूरेटिक्स दवा से भी इसका इलाज किया जाता है, जो शरीर से अतिरिक्त तरल निकालने में मदद करती हैं। साथ ही हृदय और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली दवाएं दी जाती हैं।

बचाव के उपाय

अगर आप इस स्थिति से बचना चाहते हैं तो सबसे जरूरी है कि इसके कारणों को समय रहते पहचाना जाए और सही उपाय किए जाएं। सबसे पहले आप दिल की सेहत का खास ध्यान रखें। हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने पर ध्यान दें और हृदय से जुड़ी किसी भी समस्या का इलाज समय पर कराएं। नमक और पानी का सेवन सीमित करें, क्योंकि ज्यादा नमक शरीर में पानी जमा का कारण बन सकता है। धूम्रपान, शराब आदि से दूर रहें, क्योंकि ये फेफड़ों और दिल दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। वजन को नियंत्रित रखें, क्योंकि मोटापा इन बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। वहीं अगर सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न या बार-बार थकान महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

कब करें डॉक्टर से संपर्क?

यह एक गंभीर स्थिति है। इसके लक्षण अक्सर सर्दी-जुकाम या सामान्य थकान जैसे लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना आपके लिए खतरनाक हो सकता है। यदि आपको या आपके किसी करीबी को अचानक तेज सांस फूलने लगे, खांसी के साथ झागदार या खून युक्त बलगम आए, सीने में दर्द या भारीपन महसूस हो, त्वचा या होंठ नीले पड़ने लगें या बेहोशी और भ्रम जैसी स्थिति बने, तो हो सकता है कि यह पल्मोनरी एडिमा हो सकते। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।