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क्या गले में खराश, आवाज बैठना या मुंह का घाव न भरना हेड और नेक कैंसर का संकेत है?

हेड और नेक कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो लोगों में अधिक देखा जाता है। लेकिन समस्या की बात यह है कि इसके लक्षण, पैदा होने के कारण और बचाव के बारे में सभी को सही जानकारी नहीं है। आइए इस लेख में हेड और नेक कैसंर के बारे में विस्तार से जानें।

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Written By: Vidya Sharma | Updated : July 28, 2026 12:01 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Akshat Malik

भारत में हेड एंड नेक कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक है। चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। अगर शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए और समय रहते जांच कराई जाए, तो इस कैंसर का सफल इलाज संभव है। लेकिन बात वहीं आकर अटक जाती है और वह यह कि लोगों में जागरूकता कैसे फैलाई जाए?

एक आम व्यक्ति अक्सर यह नहीं समझ पाता कि हेड एंड नेक कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और कौन से संकेत इस बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं।  लोगों तक यह महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने के लिए हमने बात की अपोलो हॉस्पिटल्स दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट, हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर अक्षत मलिक से। उन्होंने हेड और नेक कैंसर के लक्षण, प्रभावित होने वाले अंग, फैक्टर्स और बचाव के बारे में बताया है। आइए विस्तार से जानते हैं।

किन अंगों को प्रभावित करता है?

डॉक्टर के अनुसार "हेड एंड नेक कैंसर मुंह, जीभ, मसूड़ों, गाल के अंदरूनी हिस्से, होंठ, गले, वॉयस बॉक्स, नाक, साइनस और लार ग्रंथियों (Salivary glands में विकसित हो सकता है। इन अंगों पर कैंसर के शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर ने बताया कि यदि नीचे बताए गए लक्षणों में से कोई भी दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। जैसे-

  • मुंह में ऐसा घाव जो लंबे समय तक न भरे।
  • आवाज का लगातार बैठना या भारी होना।
  • निगलने में दर्द या कठिनाई।
  • गर्दन में गांठ या सूजन।
  • मुंह खोलने में परेशानी।
  • मुंह से लगातार खून आना या बदबू आना।
  • बिना कारण वजन कम होना।
  • कान में लगातार दर्द, खासकर जब अन्य कारण न हों।

इन लक्षणों को सामान्य इंफेक्शन या मौसमी परेशानी समझकर टालना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है।

हेड और नेक कैंसर के पीछे क्या कारक हैं?

डॉक्टर बताते हैं कि भारत में हेड एंड नेक कैंसर के कई प्रमुख कारण हैं, जैसे-

  • तंबाकू (सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, पान मसाला आदि) का सेवन।
  • ज्यादा शराब का सेवन।
  • तंबाकू और शराब का एक साथ सेवन, जिससे खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण, जो विशेष रूप से गले के कुछ कैंसर से जुड़ा है।
  • खराब ओरल हाइजीन और लंबे समय तक मुंह की समस्याओं को नजरअंदाज करना।

डॉक्टर ने सलाह दी कि तंबाकू छोड़ना हेड एंड नेक कैंसर की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है। इसलिए अगर आप इस लत का शिकार हैं तो आज से ही इस आदत को छोड़ें।

क्या करें बचाव के लिए?

  • किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन न करें।
  • शराब का सेवन सीमित रखें या पूरी तरह छोड़ दें।
  • मुंह और दांतों की नियमित सफाई करें।
  • संतुलित आहार लें, जिसमें ताजे फल और हरी सब्जियां शामिल हों।
  • मुंह या गले में कोई भी असामान्य बदलाव दिखे तो स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ से जांच कराएं।
  • अगरपरिवार में हेड एंड नेक कैंसर का इतिहास हैया आप लंबे समय से तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, तो नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें।

हेड एंड नेक कैंसर से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। इसे काफी हद तक रोका जा सकता है और समय रहते पहचान होने पर इसका सफलतापूर्वक इलाज संभव है। दुर्भाग्य से लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे इलाज जटिल हो जाता है।

डिस्क्लेमर: आधुनिक चिकित्सा की बदौलत हेड एंड नेक कैंसर का इलाज पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी हो गया है। यानी अगर बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ लिया जाए, तो सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक उपचार विधियों से अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। कई मरीज इलाज के बाद सामान्य जीवन जीते हैं और अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां पहले की तरह कर पाते हैं।