
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Akshat Malik
हेड और नेक कैंसर की पहचान
भारत में हेड एंड नेक कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक है। चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। अगर शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए और समय रहते जांच कराई जाए, तो इस कैंसर का सफल इलाज संभव है। लेकिन बात वहीं आकर अटक जाती है और वह यह कि लोगों में जागरूकता कैसे फैलाई जाए?
एक आम व्यक्ति अक्सर यह नहीं समझ पाता कि हेड एंड नेक कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और कौन से संकेत इस बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। लोगों तक यह महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने के लिए हमने बात की अपोलो हॉस्पिटल्स दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट, हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर अक्षत मलिक से। उन्होंने हेड और नेक कैंसर के लक्षण, प्रभावित होने वाले अंग, फैक्टर्स और बचाव के बारे में बताया है। आइए विस्तार से जानते हैं।
डॉक्टर के अनुसार "हेड एंड नेक कैंसर मुंह, जीभ, मसूड़ों, गाल के अंदरूनी हिस्से, होंठ, गले, वॉयस बॉक्स, नाक, साइनस और लार ग्रंथियों (Salivary glands में विकसित हो सकता है। इन अंगों पर कैंसर के शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर ने बताया कि यदि नीचे बताए गए लक्षणों में से कोई भी दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। जैसे-
इन लक्षणों को सामान्य इंफेक्शन या मौसमी परेशानी समझकर टालना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है।
डॉक्टर बताते हैं कि भारत में हेड एंड नेक कैंसर के कई प्रमुख कारण हैं, जैसे-
डॉक्टर ने सलाह दी कि तंबाकू छोड़ना हेड एंड नेक कैंसर की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है। इसलिए अगर आप इस लत का शिकार हैं तो आज से ही इस आदत को छोड़ें।
हेड एंड नेक कैंसर से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। इसे काफी हद तक रोका जा सकता है और समय रहते पहचान होने पर इसका सफलतापूर्वक इलाज संभव है। दुर्भाग्य से लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे इलाज जटिल हो जाता है।
डिस्क्लेमर: आधुनिक चिकित्सा की बदौलत हेड एंड नेक कैंसर का इलाज पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी हो गया है। यानी अगर बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ लिया जाए, तो सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक उपचार विधियों से अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। कई मरीज इलाज के बाद सामान्य जीवन जीते हैं और अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां पहले की तरह कर पाते हैं।