Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
गर्भावस्था का समय हर महिला के लिए बहुत संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और इम्यून सिस्टम भी अलग तरीके से काम करता है। ऐसे में अगर प्रेग्नेंसी के दौरान चिकनपॉक्स हो जाता है, तो इसे सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाता। यह स्थिति मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए चिंता का कारण बन सकती है।
जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल की गायनोक्लॉजिस्ट, सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. मंजू गोयल का कहना है कि चिकनपॉक्स एक वायरल संक्रमण होता है, जो बहुत तेजी से फैलता है। आमतौर पर बचपन में होने वाली यह बीमारी कई बार उन महिलाओं को भी प्रभावित करती है जिन्हें पहले कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ होता या जिन्होंने इसका टीका नहीं लिया होता। गर्भावस्था के दौरान जब यह संक्रमण होता है, तब इसके प्रभाव अलग तरह से देखे जाते हैं।
गर्भावस्था में महिला की प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो जाती है। इस कारण शरीर संक्रमण से लड़ने में सामान्य समय की तुलना में थोड़ा कम सक्षम महसूस करता है। जब चिकनपॉक्स का वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो बुखार, थकान, शरीर में दर्द और पूरे शरीर पर पानी भरे दाने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
इन लक्षणों के साथ गर्भवती महिला को अधिक सावधानी की जरूरत महसूस होती है, क्योंकि यह संक्रमण कभी कभी गंभीर रूप भी ले सकता है। कई मामलों में फेफड़ों का संक्रमण यानी निमोनिया जैसी जटिलताएं भी देखी जाती हैं, जो मां की सेहत को प्रभावित करती हैं।
प्रेग्नेंसी के अलग अलग चरणों में चिकनपॉक्स का असर भी अलग देखा जाता है। अगर गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में यह संक्रमण होता है, तो बहुत कम मामलों में बच्चे में जन्मजात समस्याएं देखी जाती हैं। इसे कंजेनिटल वैरिसेला सिंड्रोम कहा जाता है।
इस स्थिति में बच्चे के हाथ पैर का विकास प्रभावित हो सकता है, त्वचा पर निशान बन सकते हैं या आंखों और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएंभी दिखाई दे सकती हैं। हालांकि यह स्थिति दुर्लभ मानी जाती है, लेकिन इसके जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जाता।
अगर गर्भावस्था के अंतिम दिनों में चिकनपॉक्स होता है, खासकर डिलीवरी के कुछ दिन पहले या बाद में, तो नवजात बच्चे में भी संक्रमण होने की संभावना देखी जाती है। ऐसे मामलों में बच्चे को विशेष निगरानी और उपचार की जरूरत पड़ती है।
गर्भवती महिला में चिकनपॉक्स होने पर सामान्य लक्षणों के अलावा कुछ अतिरिक्त परेशानियां भी देखी जाती हैं। तेज बुखार, ज्यादा कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा पर ज्यादा दाने दिखाई देना आम संकेत माने जाते हैं।
कुछ मामलों में फेफड़ों का संक्रमण विकसित होता है, जिसे वैरिसेला निमोनिया कहा जाता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और अस्पताल में इलाज की जरूरत महसूस होती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के दाने या बुखार को नजरअंदाज नहीं किया जाता।
अगर गर्भवती महिला को चिकनपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की जानकारी मिलती है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह ली जाती है। समय रहते जांच और आवश्यक दवाओं से संक्रमण के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
अगर शरीर पर लाल दाने, तेज बुखार, सिर दर्द या अत्यधिक थकान महसूस होती है, तो तुरंत जांच करवाई जाती है। जल्दी पहचान होने पर उपचार बेहतर तरीके से किया जाता है और जटिलताओं का जोखिम कम किया जाता है।
चिकनपॉक्स से बचाव के लिए टीकाकरण को सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। जो महिलाएं गर्भधारण की योजना बना रही होती हैं और जिन्हें पहले कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ होता, उन्हें पहले वैक्सीन लेने की सलाह दी जाती है।
गर्भावस्था के दौरान संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखना भी जरूरी माना जाता है। साफ सफाई, संतुलित आहार और पर्याप्त आराम से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो प्रेग्नेंसी में चिकनपॉक्स एक ऐसी स्थिति होती है जिसे हल्के में नहीं लिया जाता। समय पर सावधानी, सही जानकारी और उचित इलाज से मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।