Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
What is the most common cancer in children : बच्चों का कैंसर उन बीमारियों के ग्रुप को कहते हैं, जो शिशुओं, बच्चों और टीनएज में होती हैं, आमतौर पर 15 साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाले कैंसर को ही बच्चों का कैंसर कहा जाता है। बड़ों में होने वाले दूसरे तरह के कैंसर के उलट, जो हेल्थ, लाइफस्टाइल और एनवायरनमेंटल फैक्टर से काफी हद तक जुड़े होते हैं। बच्चों में में होने वाले ज्यादातर कैंसर बढ़ते सेल्स में बदलाव की वजह से होते हैं। जल्दी इलाज और खास देखभाल से बच्चों के कैंसर का इलाज करना काफी आसान हो जाता है। अगर बच्चों के कैंसर का सही समय पर पता चल जाए, तो इसका बेहतर ढंग से इलाज किया जा सकता है। इस विषय की जानकारी के लिए हमने , कंसल्टेंट , हीमेटो-ऑन्कोलॉजी और BMT, मुंबई स्थित नारायण हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कृति हेगड़े से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से जानते हैं इस विषय के बारे में विस्तार से-
बड़ों के कैंसर की तुलना में बच्चों के कैंसर बहुत कम होते हैं। हालांकि, ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम ट्यूमर जैसे कई तरह के कैंसर क्लिनिकल प्रैक्टिस में ज्यादा बार देखे जाते हैं-
ल्यूकेमिया : बच्चों में ब्लड कैंसर सबसे आम है, जो डायग्नोसिस का एक बड़ा और अहम हिस्सा है। एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) इसका मुख्य प्रकार है, खासकर दो से दस साल के बच्चों में।
ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम ट्यूमर: ये ट्यूमर बच्चों में होने वाले सबसे आम सॉलिड कैंसर हैं।
लिम्फोमा : हॉजकिन और नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा जैसे इम्यून सिस्टम के कैंसर भी बचपन में होने वाली गंभीर बीमारियां हैं।
न्यूरोब्लास्टोमा : यह कैंसर नर्व टिशू से होता है, जो अक्सर पेट या छाती में होता है, और बहुत छोटे बच्चों को प्रभावित करता है।
विल्म्स ट्यूमर और रेटिनोब्लास्टोमा: ये कैंसर के ऐसे प्रकार हैं जो क्रमशः किडनी और आंखों को टारगेट करते हैं। ये ज्यादातर बचपन में देखे जाते हैं।
दूसरे कम आम प्रकारों में बोन कैंसर और सॉफ्ट टिशू सारकोमा शामिल हैं।
डॉक्टर का कहना है कि बच्चों में कैंसर बहुत कम होता है, जो भारत में होने वाले सभी कैंसर का लगभग चार से पांच प्रतिशत है। स्टडीज से पता चलता है कि हर साल 50,000 से ज्यादा बच्चों में कैंसर का पता चलता है। हालांकि, अभी भी कम रिपोर्टिंग और देर से पता चलना बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत में कोई नेशनल कैंसर रजिस्ट्री नहीं है, ये नंबर सिर्फ हॉस्पिटल के मामलों पर आधारित अंदाजे हैं।
कैंसर वाले बच्चों में आमतौर पर ऐसे संकेत और लक्षण दिख सकते हैं जो अक्सर आम बीमारियों जैसे होते हैं, जिन्हें अक्सर हमलोग नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए बच्चों के शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है। कुछ संकेतों पर आपको विशेष ध्यान देने की जरूरत है, जैसे-
पिछले दस सालों में, बच्चों के कैंसर के डायग्नोसिस और इलाज में काफी तरक्की हुई है। इमेजिंग और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स में तरक्की के साथ-साथ खास पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी सेंटर तक बेहतर पहुंच ने कई बच्चों के इलाज को काफी बेहतर बनाया है।
पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जन, रेडिएशन स्पेशलिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और साइकोसोशल सपोर्ट टीमों की टीम वाला एक मल्टीडिसिप्लिनरी केयर मॉडल अब हेल्थकेयर सेंटर्स में तेजी से अपनाया जा रहा है।
मेडिकल साइंस और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से लगातार तरक्की कर रही है, जिससे कैंसर से पीड़ित बच्चों का इलाज भी काफी आसान होता जा रहा है। ऐसे में हर एक पेरेंट्स को अपने बच्चों में दिखने वाले बदलावों को नजर रखनी चाहिए, ताकि कैंसर की समय से पहचान हो सके और उसका इलाज जल्द से जल्द शुरू हो सके।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।