
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Pankaj Khatana
Fungal infection (Image Credit- ChatGPT)
बारिश का मौसम हर किसी को पसंद होता है, खासकर बच्चों को। क्योंकि इस मौसम में उन्हें बारिश में भीगने को जो मिलता है। लेकिन यह मौसम अपने साथ कुछ बीमारियां और इंफेक्शन भी लेकर आता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि मानसून आते ही कई तरह के स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। खांसी, जुकाम, बुखार और मलेरिया जैसी बीमारियों के साथ-साथ मानसून में फंगल इंफेक्शन का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
बहुत लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर मानसून में फंगल इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है? यह जानने के लिए हमने बात की मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरूग्राम के इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर पंकज खटाना से। उन्होंने बताया कि "इसका बड़ा कारण यह है कि मानसून में हवा में नमी बढ़ने लगती है, जिससे उमस होती है और लगातार पसीना आने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में जब शरीर के किसी हिस्से में लंबे समय तक नमी रहती है तो वहां फंगस को बढ़ने का मौका मिल जाता है। इससे फंगल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है, जो एक से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है।" आइए डॉक्टर से फंगल इंफेक्शन के लक्षण, उपचार के तरीके और अन्य जानकारी के बारे में जानें।
दाद या रिंगवर्म (Image Credit- ChatGPT)
इस मौसम में सबसे ज्यादा होने वाला इंफेक्शन है दाद या रिंगवर्म। आपने देखा होगा कि कुछ लोगों की गर्दन, पैर या हाथों में लाल रंग की एक रिंग सी बन जाती है। इसे आम बोलचाल की भाषा में दाद कहा जाता है और अंग्रेजी में रिंगवार्म। यह डर्मेटोफाइट्स नाम के एक फंगस की वजह से होता है। इसमें बहुत तेज खुजली होती है। चिंता करने वाली बात यह है कि अगर किसी को दाद हो गया है तो यह छूने से अन्य व्यक्ति में फैल सकता है। इसलिए आप इंफेक्टेड पर्सन के कपड़े या इस्तेमाल होने वाली चीजों से दूर रहें।
एथलीट फुट की समस्या (Image Credit- ChatGPT)
इस इंफेक्शन को टिनिया पेडिस भी कहा जाता है। यह पैरों की उंगियों के बीच की स्किन को इफेक्ट करता है। जैसे आपने देखा होगा कि रोजाना टाइट जूते पहनने, पैरों में पसीना आने और जमीन पर चलने से पैरों की उंगलियों के बीच में छाले पड़ सकते हैं, त्वचा छिलने लगती है और पपड़ी निकलने लगती है। इसके एथलीट फुट कहा जाता है। इस इंफेक्शन से बचने के लिए आप अपने पैरों को हमेशा साफ और सूखा रखें, उंगलियों के बीच के हिस्से को साफ रखें, सूती जुराब पहनें और उन्हें रोजाना बदलें।
कैंडिडा इंफेक्शन कैंडिडा नाम के एक यीस्ट से होता है, हैरानी की बात यह है कि यह हमारे मुंह, स्किन, गले, आंतों, अंडरआर्म्स, कमर या महिलाओं में ब्रेस्ट के नीचे वाले हिस्से में हो जाता है। लेकिन जब बॉडी के अंदर का नेचुरल बैलेंस बिगड़ने लगता है तो यह तेजी से बढ़कर संक्रमण का रूप ले लेता है। इससे मुंह के अंदर, जीभ या गले में सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं। वजाइना में खुजली, जलन और अधिक वाइट डिस्चार्ज हो सकता है। इसलिए आप अपने शरीर के सभी अंगों को साफ और सूखा रखें।
नेल इंफेक्शन (Image Credit- ChatGPT)
आपने देखा होगा कि मानसून में कई लोगों के नाखून या तो पीले पड़ जाते हैं या फिर मोटे और कमजोर हो जाते हैं। इसे ओनिकोमाइकोसिस इंफेक्शन कहा जाता है। यहां तक कि कुछ लोगों के नाखून डार्क ब्राउन तक हो जाते हैं। इस इंफेक्शन में फंगस नाखूनों की पतली और छोटी दरारों के माध्यम से अंदर घुस जाता है। और फिर नाखूनों को खराब कर देता है। डॉक्टर बताते हैं कि अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है तो एंटीफंगल ट्रीटमेंट (दवा या क्रीम) के लिए किसी डर्मेटोलॉजिस्ट या पोडियाट्रिस्ट से परामर्श लें।
मानसून आते ही हमारे बाल झड़ने लगते हैं, रूसी, जूं, और स्कैल्प पर फोड़े हो जाते हैं, स्कैल्प पर खुजली होने लगती है, जो स्कैल्प इंफेक्शन का खतरा बढ़ाते हैं। ऐसे में सिर में बहुत ही ज्यादा खुजली होती है, पपड़ी जम सकती है और खुजली करते-करते स्कैल्प पर फोड़े और रैशेज हो सकते हैं। ऐसे में आप कोशिश करें कि अपनी कंघी, तौलिया और सिर को कवर करने वाला स्कार्फ किसी के साथ शेयर न करें। साथ ही अगर समस्या अधिक बढ़ जाए तो तुरंत अच्छे डॉक्टर को दिखाएं।
डॉक्टर बताते हैं कि मानसून में होने वाले इंफेक्शन की शुरुआत हमेशा हल्की खुजली और रेडनेस से होती है। अक्सर लोग इसे सामान्य रैश समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर खुजली लगातार बढ़ती जा रही हो, त्वचा पर गोल निशान बन रहे हों, जलन हो रही हो या त्वचा छिलने लगे तो यह फंगल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। सामान्य रैश कुछ दिनों में ठीक हो सकता है, लेकिन फंगल इंफेक्शन धीरे-धीरे फैलता है। फंगल इंफेक्शन का किनारा ज्यादा लाल या उभरा हुआ दिखाई देता है। कई बार इसमें बदबू या सफेद परत भी बनने लगती है।
लोगों को लगता है कि इंफेक्शन गंदगी के कारण होता है, जबकि फंगल इंफेक्शन का मुख्य कारण हवा और शरीर के अलग-अलग अंगों में मौजूद नमी है। जिन लोगों को बहुत ज्यादा पसीना आता है, जो लंबे समय तक गीले कपड़ों या जूतों में रहते हैं, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि आप पसीने वाले कपड़ों को दोबारा न पहनें, रोजाना कपड़े बदलें और इस मौसम में जूतों की बजाय सैंडल या स्लिपर्स का इस्तेमाल करें।
डॉक्टर बताते हैं कि डायबिटीज, कमजोर इम्यूनिटी और मोटापे से ग्रस्त लोगों में इंफेक्शन का रिस्क ज्यादा होता है। साथ ही छोटे बच्चों में भी इसका खतरा अधिक होता है क्योंकि वह ज्यादा फिजीकल एक्टिविटी करते हैं और उनकी स्किन काफी संवेदनशील होती है। वहीं अगर बीमारियों से हटकर लोगों की बात करें तो जिम जाने वालों या दूसरों के तौलिए, कपड़े या फुटवियर इस्तेमाल करने वालों में भी संक्रमण का खतरा रहता है।
डॉक्टर बताते हैं कि "इसके कारण में ही बचाव का उपाय भी छिपा है। शरीर को सूखा रखना, बारिश में भीगने पर तुरंत कपड़े बदलना और ढीले व कॉटन के कपड़े पहनना ऐसे संक्रमण से बचा सकते हैं। पैरों को लंबे समय तक गीला न रहने दें और रोज साफ मोजे पहनें। ज्यादा पसीना आता हो तो डॉक्टर की सलाह से एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
जब हमने डॉक्टर से मानसून में होने वाले फंगल इंफेक्शन के लिए घरेलू उपायों के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि "हल्के मामलों में कुछ घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन इन्हें इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। आप डॉक्टर की सलाह के बाद नारियल का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि इसमें हल्के एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जबकि नीम और हल्दी त्वचा को शांत करने में मदद कर सकते हैं।
डॉक्टर आगे कहते हैं कि "हालांकि अगर इंफेक्शन फैल रहा हो या दर्द और जलन बढ़ रही हो, तो सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं है। इसी तरह अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से स्टेरॉयड वाली क्रीम खरीदना भी खतरनाक हो सकता है। इससे कुछ समय के लिए खुजली कम हो सकती है, लेकिन बाद में इंफेक्शन ज्यादा गंभीर हो जाता है। अगर खुजली बढ़ती जाए, दाने फैल रहे हों, त्वचा में दर्द या पस बनने लगे और घरेलू उपायों से राहत न मिले तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खुजली बंद होते ही इलाज रोक देना भी सही कदम नहीं है। डायबिटीज के मरीजों को विशेष ध्यान रखना चाहिए।"
डिस्क्लेमर: मानसून के मौसम में अगर आपको अपने शरीर के किसी भी हिस्से में रेडनेस, रिंगवार्म, खुजली या जलन महसूस हो तो इसकी अनदेखी न करें। समस्या गंभीर होने से पहले एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाएं।