
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : November 19, 2025 9:30 AM IST
Medically Verified By: Dr. Akshay Budhraja
World COPD Day 2025: क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) दुनिया में तेजी से बढ़ती श्वसन-समस्या है, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर इतने साधारण दिखते हैं कि लोग उन्हें महीनों तो कभी-कभी सालों तक नजरअंदाज करते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फेफड़ों को सबसे पहले जो नुकसान होता है, वह शरीर कई संकेतों के माध्यम से बताता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग इन्हें 'सामान्य सर्दी-खांसी' समझ कर टाल देते हैं।
COPD की शुरुआत आमतौर पर लगातार खांसी, हल्के बलगम, सांस फूलने, सीढ़ियां चढ़ते समय थकान और सुबह के समय भारीपन जैसे संकेतों से होती है। यह लक्षण बहुत मामूली लगते हैं, लेकिन यह फेफड़ों में चल रही सूजन और एयरवे ब्लॉकेज का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। आकाश हेल्थकेयर के रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अक्षय बधुराज बताते हैं कि इनमें से कई लक्षण धूम्रपान करने वालों, धूल-धुएं वाले माहौल में काम करने वालों या घरेलू धुएं के संपर्क में रहने वालों में ज्यादा देखे जाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं
भारत में COPD के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। WHO के अनुसार, भारत में यह मौत के प्रमुख कारणों में से एक बन चुका है और आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि COPD की रोकथामका सबसे अच्छा तरीका है लक्षणों को जल्द पहचानना और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना। परंपरागत सोच के कारण कई लोग मानते हैं कि सांस फूलना सिर्फ बढ़ती उम्र या कमजोरी की निशानी है, लेकिन यह गंभीर बीमारी की शुरुआत भी हो सकती है।
स्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान छोड़ना, प्राणायाम, नियमित व्यायाम, घर और कार्यस्थल पर साफ हवा सुनिश्चित करना, ये सभी कदम COPD से बचाव में बेहद प्रभावी माने जाते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से सुबह भारीपन, छाती में जकड़न, तेज सांस चलना या बलगम वाली खांसी अनुभव कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
World COPD Day का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती है। फेफड़ों की बीमारी जितनी जल्दी पकड़ी जाए, उसका उपचार उतना ही प्रभावी और जीवन बेहतर बना रहता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।