
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : December 17, 2023 10:01 AM IST
Risk of ear infection in winter: सर्दियों का मौसम कई तरह की बीमारियां लेकर आता है और इनमें से एक है कान में होने वाली कई अलग-अलग तरह की बीमारियां। ठंड के मौसम में कान में होने वाली बीमारियों में प्रमुख कान का संक्रमण है, जो आमतौर के भीतरी हिस्से में विकसित होता है। यह आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस से होने वाले संक्रमण और फिर उसके कारण विकसित हो रही सूजन के कारण होता है। अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल करोल बाग में ईएनटी सर्जन डॉक्टर संजीव डांग के अनुसार ठंड के मौसम से कान का संक्रमण होने के कारण कई मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। अस्पताल के ओपीडी डिपार्टमेंट में रोजाना 7 से 8 मरीज कान से जुड़ी बीमारियों के ही आ रहे हैं, जिनमें खुजली, सूजन आदि के मामले देखे जा रहे हैं।
ठंड के मौसम में होने वाली अलग-अलग बीमारियों के अलावा हाल ही में सभी आयु वर्ग में कान के संक्रमण के मामले भी देखे जा रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ठंड के मौसम में बैक्टीरिया और वायरस जैसे रोगाणुओं के पनपने और फैलने की क्षमता बढ़ जाती है। आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस सूजन व लालिमा पैदा करते हैं, जो कान को नुकसान पहुंचा सकती है। कान की सूजन का मुख्य कारण ठंड में कमजोर प्रतिरक्षा को माना जा सकता है। संक्रमण के कारण सूजन व लालिमा के साथ-साथ जलन की समस्या भी होती है। संक्रमण के कारण गले में खराश या श्वसन संक्रमण के कारण भी देखा जाता है, क्योंकि यूस्टेशियन ट्यूब अवरुद्ध हो जाती है और इसके कारण तीव्र दर्द भी होता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार साइनस का इलाज करना भी जरूरी है अगर अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह कान के लिए कई समस्याएं पैदा कर देता है। ठंड सर्दियों के मौसम के दौरान, लोगों को कानों में अत्यधिक सूखापन और एलर्जिक राइनाइटिस के कारण कान में संक्रमण होता हैं। जिससे कान में फंगल संक्रमण हो सकता है जिसे ओटोमाइकोसिस कहा जाता है। खांसी और सर्दी के साथ-साथ एक्यूट ओटिटिस मीडिया (एओएम) जैसे सामान्य कान संक्रमण के मामलों में वृद्धि भी देखी जा रही है। यहां तक कि ठंड का मौसम भी कान में दर्द का कारण बनता है। ठंड का मौसम ईयर कनैल यानी कान की नलिकाओं में असुविधा पैदा कर सकता है और संवेदनशील ऊतकों की जलन के कारण कान में दर्द हो सकता है। ठंड के महीनों में रक्त संचार कम होने से कान में संक्रमण बढ़ सकता है।
कान का संक्रमण कान में दर्द, चक्कर आना, सिरदर्द, सूजन, असामान्य स्राव और अस्थायी सुनवाई हानि यह कान में संक्रमण होने के लक्षण हैं। खुली जगह में ठंडी हवा के संपर्क में आने पर कान का दर्द गंभीर हो सकता है और इसके लिए तत्काल चिकित्सा करना जरूरी है। कान में संक्रमण हो तो तुरंत कान की बूंदों का उपयोग करें और उपचार करने वाले डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार के तरीके का पालन करें। डॉक्टर की सलाह लेकर एंटीबायोटिक्स, एंटीहिस्टामाइन और दर्द निवारक दवा लें। डॉक्टर की सलाह बिना कोई भी दवा न ले या किसी ओवर-द-काउंटर इयर ड्रॉप का उपयोग न करें।
कान के दर्द को कम करने के लिए आइस पैक या गर्म सेक जैसे हीटिंग पैड या नम कपड़े का उपयोग करें। कानों में पानी जमा होने न दे। टोपी, हेड बैंड या स्कार्फ पहनकर कानों को गर्म रखें। हवा से बचाने के लिए कानों में रुई का प्रयोग न करें। ऐसा करने से कान की नलिका में सूजन आ सकती है। अपने हाथों को साबुन और पानी से धोकर कीटाणुओं को दूर रखने की कोशिश करें। फ्लू का टीका लें। धूम्रपान से दूर रहें, जो वायु मार्ग में जलन पैदा कर सकता है। कान में संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए ईयर मफ पहनने और सामान्य सर्दी, फ्लू और साइनसाइटिस से बचाव के लिए कदम उठाने पर विचार करें।
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