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सारा दिन ऑनलाइन रहने के क्या नुकसान हैं? डॉक्टर ने बताया डिजिटल लाइफ का शरीर और दिमाग पर क्या असर होता है

Online Rehne Se Kya Hota Hai: आप, आपके घर में या आपको कोई न कोई ऐसा दोस्त जरूर होगा, जो दिनभर या दिन का अधिकतम समय ऑनलाइन रहता है और रील्स भेजता रहता है। यह आदत समय की बर्बादी तो है ही, साथ ही आपके दिमाग पर बुरा असर भी डाल रही है।

Written By Vidya Sharma
Updated : June 6, 2026 9:00 AM IST

Iage Credit- ChatGPT

मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। काम हो, पढ़ाई हो या मनोरंजन, ज्यादातर लोग दिन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन और इंटरनेट के साथ बिताते हैं। लेकिन क्या सारा दिन ऑनलाइन रहना हमारी सेहत पर असर डाल सकता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार डिजिटल दुनिया से जुड़े रहना सिर्फ आंखों को ही नहीं, बल्कि दिमाग, नींद और शरीर को भी प्रभावित कर सकता है। कैसे?

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS) के चेयरमैन डॉ. प्रवीण गुप्ता बताते हैं कि “लंबे समय तक स्क्रीन टाइम कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। यह धीरे-धीरे काम करना शुरू करता है, इसलिए लोग अक्सर लैपटॉप और फोन पर दिखने वाली थकान को रोजमर्रा के असुविधा के रूप में देखते हैं।” आइए इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं कि कैसे पूरे दिन ऑनलाइन रहना हमारे दिमाग पर असर डाल रहा है।

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Image Credit- ChatGPT

आंखों और नींद पर भी असर

सारा दिन स्क्रीन देखने से सबसे पहले असर आंखों पर पड़ता है। इसे डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है। इसमें आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखना और सिरदर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं। इसके अलावा मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद को नियंत्रित करने वाले हार्मोन मेलाटोनिन को प्रभावित कर सकती है।

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इसका असर यह होता है कि व्यक्ति को देर से नींद आती है या नींद की क्वालिटी खराब हो जाती है। डॉक्टर बताते हैं कि “रात में फोन या लैपटॉप का लंबे समय तक उपयोग शरीर के स्लीप साइकल को प्रभावित कर सकता है, जिसके चलते आगे चलकर नींद की कमी और लगातार तनाव, थकान तथा काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।”

मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी हो सकता है असर

साइकोलॉजिस्ट मालिनी सबा के अनुसार लगातार नोटिफिकेशन, तुलना और उपलब्ध रहने की चुनौती भी मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है, जिसके चलते लोग चिंता और तनाव के स्तर में गहराई से दबाव पैदा कर सकते हैं| कुछ लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट के लगातार उपयोग के कारण डिजिटल डिपेंडेंसी या इंटरनेट की लत जैसी स्थिति में भी फंस कर फोन या इंटरनेट के न होने पर बेचैन हो सकते हैं। अत्यधिक स्क्रीन टाइम ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और उत्पादकता को भी प्रभावित कर सकता है।

शरीर पर भी हो सकता है असर

ऑनलाइन रहने से व्यक्ति की भौतिक गतिविधि में कमी आ सकती है, जिससे वजन बढ़ना, नेक और पीठ दर्द, खराब पोश्चर और मांसपेशियों में अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉ. कहते हैं, "लंबे समय तक लोगों का बैठा-बैठा हो जाना, शारीरिक मूवमेंट को घटा देता है। बहुत सामने लंबे समय तक सिर्फ पैसिवेशन लाइफस्टाइल, मोटापा, मेटाबॉलिक डिसफंक्शन और पूरे स्वास्थ्य पर असर डालती है।"

क्या ऑनलाइन रहना पूरी तरह से गलत है?

इंटरनेट या डिजिटल डिवाइस को दोष देने के बजाय, एक्सपर्ट्स कहते हैं कि “हमें अपने अधिक और असंतुलित डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल पर ध्यान देने की जरुरत है। स्क्रीन काम और पढ़ाई के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, लेकिन डिजिटल और रियल लाइफ के बीच संतुलन बनाने के लिए भी उतनी ही जरुरत है।

डिजिटल हेल्थ कैसे बनाए रखें?

डॉक्टर कुछ आसान टिप्स देते हैं, जैसे आप हर 20-30 मिनट में स्क्रीन से नजर हटाएं, 20-20-20 नियम यानी कि हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें, सोने से कम से कम एक घण्टे पहले स्क्रीन टाइम कम करें और नियमित व्यायाम और आउटडोर गतिविधि करें। इनके साथ-साथ फैमिली और सोशल लाइफ के लिए भी समय निकालें।

डिस्क्लेमर: डिजिटल दुनिया से दूरी नहीं, बल्कि उससे हेल्दी संबंध बनाना चाहिए। बैलेंस स्क्रीन टाइम लेने से शरीर और दिमाग दोनों स्वस्थ रह सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टेक्नोलॉजी जीवन को आसान बना सकती है, लेकिन अगर इसका उपयोग सीमित और समझदारी से न हो तो वही सुविधा सेहत पर बोझ बन सकती है।