
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : April 10, 2026 11:15 AM IST
Medically Verified By: Dr. Rupam Borgohain
Image credits by: पार्किंसन का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है
पार्किंसन रोग (Parkinson's Disease) एक न्यूरोलॉजिकल डिजीज है। यह मुख्य रूप से शरीर के चलने- फिरने की क्षमता को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, पार्किंसन रोग किसी व्यक्ति को तब होता है, जब दिमाग के एक हिस्से Substantia Nigra में डोपामाइन (Dopamine) बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर पार्किंसन रोग के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। भारत में पार्किंसन जैसे गंभीर रोग को छुआ- छूत और अंधविश्वास के साथ जोड़कर देखा जाता है। सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में पार्किंसन रोग के बारे में लोगों के मन में कई प्रकार की गलत धारणाएं हैं। पार्किंसन रोग से जुड़ी गलत धारणाओं को खत्म करने के लिए हर साल 11 अप्रैल को वर्ल्ड पार्किंसन डे मनाया जाता है। वर्ल्ड पार्किंसन डे के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं इसके विभिन्न प्रकारों के बारे में।
हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स में सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और प्रोग्राम डायरेक्टर-PDMDR डॉ. रूपम बोरगोहेन बताती हैं कि पार्किंसन रोग में शरीर की एक्टिविटी धीमी पड़ जाती है। दरअसल, इस बीमारी में मांसपेशियों में अकड़न आ जाती है और संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण हाथों में कंपन (Tremor), मांसपेशियों का कठोर होना और शरीर के संतुलन की समस्या होती है। इसके अलावा पार्किंसन में डिप्रेशन, नींद की समस्या, और पाचन संबंधी दिक्कतें भी देखी जाती है।
पार्किंसन गंभीर बीमारी है।
डॉ. रूपम बोरगोहेन बताती है कि पार्किंसन रोग 1 या 2 नहीं बल्कि 4 प्रकार का होता है। इसमें शामिल हैः
इडियोपैथिक पार्किंसन रोग पार्किंसन का सबसे सामान्य प्रकार है। पार्किंसन के 80 फीसदी मामलों में यही प्रकार सामने आता है। इसका मतलब यह है कि आपको यह बीमारी क्यों हुई है, इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं है। यह दिमाग के Substantia Nigra में डोपामिन बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं, जिससे शरीर के मूवमेंट पर असर पड़ता है
इडियोपैथिक पार्किंसन के लक्षण
यह पार्किंसन जैसा दिखता जरूर है, लेकिन यह उससे अलग और ज्यादा जटिल होता है। इसमें लक्षण तेजी से बढ़ते हैं और दवाओं का असर कम होता है। पार्किंसन के इस प्रकार में शरीर की मूवमेंट के साथ-साथ शरीर के ऑटोमैटिक फंक्शन प्रभावित होते हैं। इससे ब्लड प्रेशर गिरना, पेशाब की समस्या, आंखों की मूवमेंट में दिक्कत (Vertical gaze palsy), गर्दन में जकड़न की समस्या देखी जाती है।
जब पार्किंसन 50 वर्ष की उम्र से पहले शुरू होता है, तो इसे यंग-ऑनसेट कहा जाता है। पार्किंसन का यह प्रकार मुख्य रूप से जेनेटिक कारणों से होता है। यह बीमारी धीरे - धीरे बढ़ती है। इसलिए इसका पता काफी देरी से चलता है। हालांकि यंग - ऑनसेट पार्किंसन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दवाओं से इसे मैनेज किया जा सकता है।
जेनेटिक या फैमिलियल पार्किंसन पार्किंसन का वह प्रकार है जो परिवार में चलता है और जीन से जुड़ा होता है। लगभग 10 से 15% मामलों में जेनेटिक या फैमिलियल पार्किंसन पाया जाता है। यह अलग-अलग जीन जैसे SNCA, PRKN से जुड़ा हुआ होता है। डॉक्टर बताते हैं कि जिन लोगों के परिवार में पार्किंसन का इतिहास रहा हो, उन्हें इस विषय में अपने डॉक्टर से बात जरूर करनी चाहिए और समय- समय पर मेडिकल जांच भी करवानी चाहिए।
| आधार | इडियोपैथिक | एटिपिकल पार्किंसन | यंग-ऑनसेट | जेनेटिक |
| शुरुआत | धीरे-धीरे | तेजी से | कम उम्र में | परिवारिक इतिहास के कारण होता होता है। |
| दवा का असर | अच्छा | कम अच्छा | अच्छा | हर व्यक्ति में दवा का असर अलग हो सकता है। |
| लक्षण | कंपन | बीपी कम होना | Dyskinesia | जीन आधारित |
| प्रगति | धीमी | तेज | धीमी | वैरिएबल |
हां, लेकिन पूरी तरह से नहीं। डॉक्टर का कहना है कि पार्किंसन जैसी बीमारी का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो इसे डॉक्टर द्वारा बताए गए तरीकों से मैनेज किया जा सकता है। लेकिन पार्किंसन को जड़ से खत्म किया जा सकता है। यह कहना बिल्कुल गलत होगा।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.