
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Smriti Jhunjhunwala
ashwagandha
आजकल हर कोई इतना तनाव में है कि अगर कोई सलाह दे कि आप फलां चीज खाएं या करो तो लोग तुरंत करने लगते हैं। स्ट्रेस, खराब नींद, थकान जैसी समस्याएं इतनी बढ़ गई हैं कि हर कोई इनका उपाय ढूंढने के लिए या तो थेरेपी के लिए जा रहा है, दवाइयां खा रहा है, कोई जिम जा रहा है तो कोई अपनी पसंदीदा एक्टिविटी करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन हम अपनी प्रकृति में मौजूद उन प्राकृतिक चीजों को भूल जाते हैं, जो न सिर्फ काफी सस्ती हैं, बल्कि कई वैज्ञानिक शोधों में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद भी मानी गई हैं।
हम बात कर रहे हैं अश्वगंधा की, जो एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। इसका वैज्ञानिक नाम विथानिया सोम्निफेरा (Withania somnifera) है। इसके कुछ मुख्य कम्पाउंड हैं जैसे- विथानोलाइड्स, अल्कलॉइड्स और फ्लेवोनॉइड्स। यह कंपाउंड इसके अधिकांश जैविक प्रभावों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। यह स्ट्रेस कम करने, दिमाग तेज करने, ताकत बढ़ाने और इम्यूनिटी मजबूत करने में फायदेमंद होती है। आज हम आपको इस लेख में आम लेकिन कमाल के फायदों वाली जड़ी-बूटी अश्वगंधा के फायदों के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें विज्ञान ने भी मंजूरी दी है।
अश्वगंधा से मिलती है घोड़े जैसी ताकत
अश्वगंधा का पौधा बहुत ही खूबसूरत दिखता है, जिसमें चेरी जैसे फल भी आते हैं। इस इंडियन जिनसेंग को इंडियन विंटर चेरी, अश्वगंधा या विथानिया सोमनिफेरा के नाम से भी जाना जाता है। इसकी जड़ों का उपयोग पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। जैसा कि आप नाम से समझ सकते हैं, अश्वगंधा शब्द अश्व से बना है, जिसका मतलब है घोड़ा।
माना जाता है कि इसकी जड़ के सेवन से घोड़े जैसी ताकत मिलती है। नाम का दूसरा हिस्सा गंधा है, जिसका मतलब है खुशबू। जो साफ है कि यह इस पौधे की ताजी जड़ों की खास महक को बताता है। आयुर्वेद में इसे ऊर्जा और ताकत बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी के रूप में बताया किया गया है, लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके प्रभाव व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकते हैं।
रोज अश्वगंधा खाने से दिमाग को क्या फायदा होता है?
पुराने समय से ही आयुर्वेदिक दवा में इसका इस्तेमाल व्यक्ति के नर्वस सिस्टम को मजबूत करने वाली चीज के तौर पर किया जाता रहा है। इसके एडाप्टोजेनिक असर और औषधीय इस्तेमाल से यह बात साबित होती है। आइए आपको नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (PubMed) में प्रकाशित "Ashwagandha (Withania somnifera): Current Research on the Health-Promoting Activities – A Narrative Review" स्टडी में अश्वगंधा के उपयोग से दिमाग से जुड़े फायदों के बारे में बताते हैं।
स्टडी में पाया गया कि अगर आप अश्वगंधा का सेवन करते हैं तो यह कोर्टीसोल जैसा स्ट्रेस हार्मोन कम होता है, तनाव का सामना करने की क्षमता और कुछ लोगों में एंग्जायटी के लक्षण को कम करने में मदद करता है। लेकिन साथ में रिसर्चर्स का यह भी कहना है कि ये सभी स्टडीज छोटी थीं, इसलिए और बड़े शोध की जरूरत है।
इसी स्टडी में यह भी पाया गया कि अगर आप अश्वगंधा का सेवन करते हैं, तो स्लीप क्वालिटी बेहतर होती है, जल्दी नींद आने में मदद मिलती है और इंसोमनिया वाले लोगों को भी लाभ मिलता है। लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखें कि यह फायदे सभी लोगों के लिए सामान्य नहीं है, क्योंकि अभी यह साबित नहीं हुआ है।
कुछ शुरुआती रिसर्च में अटेंशन, मेमोरी और कॉग्निटिव परफॉर्मेंस में सुधार देखने को मिला। कॉग्निटिव परफॉर्मेंस का मतलब सोचने, याद रखने, सीखने और ध्यान केंद्रित करने जैसी मानसिक क्षमताओं से है। इसमें मुख्य रूप से सोचना, याद रखना और सीखना शामिल है। लेकिन अभी इसे ब्रेन बूस्ट करने वाली जड़ीबूटी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि यह जो स्टडीज हुई हैं, यह बड़े क्लिनिकल ट्रायल नहीं हैं।
शोध में पाया गया कि अश्वगंधा मसल स्ट्रेंथ को बढ़ाने, एक्सरसाइज के बाद रिकवरी को बेहतर बनाने और फिजिकल परफॉर्मेंस को सुधारने का काम करती है। इसके अलावा लैब में की गई एनिमल स्टडी में पाया गया कि
क्या रोज खाना सुरक्षित है?
स्टडी में पाया गया कि ज्यादातर हेल्दी लोगों में सीमित अवधि (आमतौर पर 8–12 सप्ताह) तक अश्वगंधा का सेवन अधिकांश स्वस्थ लोगों में अच्छी तरह सहन किया गया। लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में, जैसे लिवर इंजरी और पीलिया की रिपोर्ट भी मिली है। इसलिए इसे पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता।
NIH की दूसरी रिपोर्ट के अनुसार, "उपलब्ध अध्ययनों में अश्वगंधा का सेवन लगभग 3 महीने तक सामान्यतः सुरक्षित पाया गया। लेकिन कुछ लोगों में हल्के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे- पेट खराब होना, मतली, दस्त और नींद या सुस्ती महसूस होना। लेकिन लंबे समय तक रोजाना सेवन की सुरक्षा पर अभी पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।"
भले ही अश्वगंधा नेचुरल है, लेकिन इस जड़ी-बूटी पर हुई स्टडीज में बताया गया है कि कुछ लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। वह लोग हैं-
क्योंकि अश्वगंधा कई दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकता है।
होम्योपैथी डॉक्टर स्मृति झुनझुनवाला इस सवाल का जवाब देते हुए कहती हैं कि नहीं, यह कोई सुपरफूड नहीं है जिसे हर व्यक्ति रोज लेना शुरू कर दे। कुछ लोगों को तनाव कम करने और अच्छी नींद पाने में फायदा हो सकता है या कुछ अन्य फायदे दिख सकते हैं, लेकिन सभी दावे मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणों से साबित नहीं हुए हैं। इसलिए अगर आप किसी बीमारी के लिए इलाज ले रहे हैं या लंबे समय तक इसका सेवन करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।
अश्वगंधा का उपयोग
अश्वगंधा पर PIB की प्रेस रिलीज "Ashwagandha’s Scientific Surge: Research Doubles in Five Years" भी जारी हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि अश्वगंधा पर वैज्ञानिक रिसर्च तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यह प्रेस रिलीज दावा नहीं करती कि अश्वगंधा हर बीमारी का इलाज है। इसमें उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और आयुष मंत्रालय की पहल का सार दिया गया है।
अश्वगंधा भारतीय जड़ी-बूटी है, जिसके फायदों को लेकर कई रिसर्च हो चुकी हैं और कुछ चल रही हैं। बढ़ती वैज्ञानिक रुचि को देखते हुए आयुष मंत्रालय ने कुछ कदम उठाए हैं जो इस प्रकार हैं-
| समस्या | शोध में मिले निष्कर्ष |
| तनाव कम करना | अच्छे प्रमाण |
| चिंता (Anxiety) | अच्छे प्रमाण |
| नींद में सुधार | अच्छे प्रमाण |
| इम्यूनिटी पर प्रभाव | संभावित लाभ, और रिसर्च जारी |
| एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव | प्रयोगशाला व शुरुआती अध्ययन |
| हार्मोनल सिस्टम पर प्रभाव | सीमित क्लिनिकल प्रमाण |
| हार्ट और फेफड़ों पर प्रभाव | प्रारंभिक अध्ययन |
| मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र | शुरुआती सकारात्मक परिणाम |
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की अश्वगंधा और कैंसर से जुड़ी रिसर्च बताती है कि कुछ प्रीक्लिनिकल अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि अश्वगंधा कुछ कीमोथेरेपी दवाओं के साथ मिलकर बेहतर प्रभाव दिखा सकता है और ड्रग रेसिस्टेंस कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन यह निष्कर्ष अभी तक प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों पर आधारित है। इंसानों में इसे नियमित रूप से कीमोथेरेपी के साथ देने के लिए पर्याप्त क्लिनिकल प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए अगर आप कैंसर से पीड़ित हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के अश्वगंधा का सेवन न करें।
कैंसर से जुड़ी इसी स्टडी में पाया गया कि कैंसर सेल्स में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) बढ़ाकर उन्हें नष्ट करने में अश्वगंधा मदद कर सकता है।। इससे कैंसर कोशिकाओं की नेचुरल डेथ एक्टिव हो सकती है। NF-κB, STAT3 और VEGF जैसे कैंसर की वृद्धि और फैलाव से जुड़े सिग्नलिंग पाथवे को प्रभावित करने से लेकर Bcl-2, Survivin, cIAP1/2 जैसे सेल सर्वाइवल प्रोटीन की गतिविधि कम करने में भी अश्वगंधा फायदेमंद साबित हो सकता है।
साथ ही स्टडी से p53 और p21 जैसे ट्यूमर-सप्रेसर प्रोटीन की गतिविधि बढ़ाने के संकेत मिले हैं और पता चला है कि यह नई ब्लड वेसल्स के बनने को कम करने का काम करता है, जिससे ट्यूमर की वृद्धि धीमी पड़ सकती है।
वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के मर्डोक यूनिवर्सिटी रिसर्च पोर्टल में छपी रिपोर्ट में देखा गया कि कुछ पुरुषों में अश्वगंधा का सेवन करने से स्पर्म काउंट बढ़ा, स्पर्म मोटीलिटी में सुधार हुआ, टेस्टोस्टेरोन में कुछ सुधार देखा गया और फर्टिलिटी पैरामीटर्स भी बेहतर हुए। लेकिन सभी पुरुषों में समान परिणाम नहीं मिले।
इसी के साथ कुछ अध्ययनों में थायरॉयड हार्मोन में बदलाव देखा गया और सबक्लिनिकल हाइपरथायरॉयडिज्म वाले मरीजों में अच्छे संकेत देखे गए। इसलिए फिर भी जिन लोगों को थायरॉयड की बीमारी है, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के अश्वगंधा नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों के दर्द और क्रोनिक पेन से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ की सलाह पर आधारित है, लेकिन यह किसी चिकित्सीय परामर्श या उपचार का विकल्प नहीं है। अश्वगंधा भले ही असरदार जड़ी-बूटी है, लेकिन अभी भी इसके शरीर में अलग-अलग फायदों को लेकर स्टडी जारी है। अगर आपको कोई भी मानसिक या शारीरिक समस्या है और अश्वगंधा का सेवन शुरू करने का विचार कर रहे हैं, तो पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। इंटरनेट पर मौजूद नुस्खों के बहकावे में न आएं।