World Cancer Day: 30 की उम्र के बाद वे कौन से 5 टेस्ट हैं जो हर भारतीय को कराने चाहिए? जानें हर टेस्ट में कितना खर्चा आता है?

World Cancer Day 2026: आजकल कैंसर एक ऐसी बीमारी बन गई है जिसके केस साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं। इससे बचने के लिए 30 की उम्र के बाद आपको कुछ टेस्ट कराना बहुत जरूरी होता है। आइए इन टेस्ट के बारे में जानते हैं।

WrittenBy

Written By: Vidya Sharma | Updated : January 30, 2026 11:56 AM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr. Kanika sood Sharma

World Cancer Day के अवसर पर यह समझना जरूरी है कि कैंसर अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है। भारत में बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, बढ़ता तनाव, प्रदूषण और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण 30 वर्ष की उम्र के बाद कैंसर का जोखिम धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। दुर्भाग्य से, अधिकतर मामलों में कैंसर की पहचान तब होती है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। जबकि अगर समय रहते कुछ जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट करा लिए जाएं, तो कई प्रकार के कैंसर को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सकता है।

धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल की क्लिनिकल लीड और डायरेक्टर, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर कनिका सूद शर्मा बताती हैं कि ‘शुरुआती स्टेज में कैंसर का इलाज न केवल आसान होता है, बल्कि इलाज पर आने वाला खर्च और शारीरिक-मानसिक परेशानी भी काफी हद तक कम हो जाती है।’ आइए अब हम उनसे थोड़ा विस्तार से जानते हैं कि 30 की उम्र के बाद कैंसर का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट करवाने चाहिए और यह टेस्ट एक आम आदमी के जेब पर कितना असर डाल सकते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर

महिलाओं में सबसे आम कैंसर ब्रेस्ट कैंसर है और इसके मामले भारत में लगातार बढ़ रहे हैं। 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित रूप से ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। 30–40 वर्ष की उम्र की महिलाओं के लिए डॉक्टर द्वारा किया जाने वाला क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन उपयोगी होता है, जबकि 40 वर्ष के बाद मैमोग्राफी को स्क्रीनिंग का अहम हिस्सा माना जाता है।

फैमिली हिस्ट्री या अन्य जोखिम कारक होने पर अल्ट्रासाउंड या MRI की सलाह भी दी जा सकती है। शुरुआती स्टेज में पकड़ा गया ब्रेस्ट कैंसर 90% से अधिक मामलों में सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है, जिससे यह जांच बेहद महत्वपूर्ण है।

सर्वाइकल कैंसर

सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है, जबकि यह सबसे अधिक रोके जा सकने वाले कैंसरों में से एक है। 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को पैप स्मियर टेस्ट या HPV DNA टेस्ट जरूर कराना चाहिए, भले ही कोई स्पष्ट लक्षण मौजूद न हों। हर 3–5 साल में यह टेस्ट कराने से सर्वाइकल कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और शुरुआती बदलावों का समय रहते इलाज संभव हो जाता है।

ओरल कैंसर

ओरल कैंसर भारत में पुरुषों और महिलाओं दोनों में आम है, खासकर तंबाकू, गुटखा, पान मसाला या सिगरेट का सेवन करने वालों में। शुरुआती लक्षण मुँह में घाव, सफेद या लाल धब्बे, या लंबे समय तक न भरने वाले छाले के रूप में दिखाई देते हैं। 30 की उम्र के बाद नियमित ओरल कैंसर स्क्रीनिंग, जिसमें डॉक्टर द्वारा मुँह की विज़ुअल जांच होती है, बेहद जरूरी है। समय पर जांच से इस कैंसर को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

कैंसर का प्रकारकिस उम्र में कौन सा कैंसर टेस्टखर्चा
ब्रेस्ट कैंसर
  • ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग (30 की उम्र के बाद)
  • क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन (30-40 की उम्र में
  • मैमोग्राफी (40 वर्ष के बाद)
  •  इन कैंसर के टेस्ट में 500 से 5,000 रुपये तक का खर्चा आ जाता है
सर्वाइकल कैंसर
  • पैप स्मियर टेस्ट
  • HPV DNA टेस्ट (दोनों 30  की उम्र के बाद)
  • ₹800–₹1,500 (पैप स्मियर टेस्ट)
  • ₹2,500–₹4,500 (HPV टेस्ट)
ओरल कैंसर
  • ओरल कैंसर स्क्रीनिंग
  • बायोप्सी
  • ₹300–₹800 (कैंसर स्क्रीनिंग)
  • ₹2,000–₹5,000 (बायोप्सी)
कोलोरेक्टल (आंतों का) कैंसर
  • स्टूल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट
  • कोलोनोस्कोपी
  • ₹500–₹1,200 (स्टूल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट)
  • ₹6,000–₹15,000 (कोलोनोस्कोपी)
प्रोस्टेट कैंसर
  • बेसलाइन स्क्रीनिंग
  • PSA ब्लड टेस्ट
₹800–₹1,500

कोलोरेक्टल (आंतों का) कैंसर

कोलोरेक्टल कैंसर 30 की उम्र के बाद धीरे-धीरे उभरता है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण अक्सर गैस, एसिडिटी या सामान्य पेट की समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। स्टूल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट से मल में छुपे हुए खून का पता लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर कोलोनोस्कोपी की जाती है। लंबे समय से कब्ज, मल में खून, अचानक वजन कम होना या फैमिली हिस्ट्री होने पर इस जांच को गंभीरता से लेना चाहिए।

प्रोस्टेट कैंसर

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम 50 वर्ष के बाद बढ़ता है। 30–50 वर्ष की उम्र में केवल वे पुरुष जिन्हें फैमिली हिस्ट्री है या अन्य जोखिम कारक मौजूद हैं, उन्हें बेसलाइन स्क्रीनिंग करानी चाहिए। PSA ब्लड टेस्ट के जरिए प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेतों का पता लगाया जाता है। शुरुआती स्टेज में प्रोस्टेट कैंसर का इलाज सरल होता है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।

यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को ये सभी जांचें हर साल करानी हों, लेकिन 30 की उम्र के बाद बेसिक कैंसर स्क्रीनिंग को अपनी हेल्थ रूटीन का हिस्सा बनाना बेहद आवश्यक है। जांच की फ्रीक्वेंसी व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली, फैमिली हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करती है।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source