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शरीर के इस 1 अंग पर सबसे ज्यादा खराब करता है तंबाकू, बढ़ जाता है कैंसर होने का जोखिम

What 1 organ does tobacco affect badly  : तंबाकू या फिर तंबाकू युक्त चीजों का प्रयोग करने से शरीर का कई अंग प्रभावित होता है। लेकिन कुछ अंग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में-

शरीर के इस 1 अंग पर सबसे ज्यादा खराब करता है तंबाकू, बढ़ जाता है कैंसर होने का जोखिम
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Written by Kishori Mishra |Updated : May 30, 2024 4:29 PM IST

What 1 organ does tobacco affect badly  : तंबाकू सिगरेट, गुटखा किसी भी रूप में लेना सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्य के अन्य देशों की तुलना में भारत में तंबाकू के सेवन से मरने वाले बहुत अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में तंबाकू का सेवन करने से प्रतिवर्ष करीब 4 लाख लोगों की मौत हो रही है। ऐसे में यह काफी ज्यादा चिंता का विषय है। तंबाकू के सेवन से होने वाले रोगों के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विश्व धूम्रपान निषेध दिवस (World No-Tobacco Day ) मानाया जाता है।

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में तंबाकू के सेवन से होने वाले लोगों को प्रति जागरुकता फैलाने के साथ-साथ तंबाकू उत्पादों को छोड़ने के लिए राजी कराना है। तंबाकू के कई गंभीर रोग होते हैं, यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है। लेकिन अगर सबसे ज्यादा प्रभावित अंग की बात की जाए, तो इस लिस्ट में लंग्स शामिल है। तंबाकू या फिर तंबाकू के किसी भी तरह के उत्पादन का प्रयोग करने से फेफड़ों से जुड़ी परेशानी सबसे अधिक होती है। इसके साथ-साथ कैंसर का भी खतरा रहता है। आइए डॉ. प्रतिभा डोगरा, वरिष्ठ सलाहकार - पल्मोनोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल, गुरुग्राम से जानते हैं तंबाकू से फेफड़े किस तरह से होते हैं प्रभावित?

तम्बाकू स्मोकिंग फेफड़ों को कैसे नुकसान पहुंचाता है? ( How smoking tobacco damages your lungs )

तंबाकू युक्त स्मोकिंग फेफड़ों में वायुमार्ग और छोटी वायु थैलियों को नुकसान पहुंचाता है। यह स्थिति किसी व्यक्ति द्वारा धूम्रपान शुरू करने के तुरंत बाद शुरू हो सकती है और यह स्थिति तबतक होती है, जबतक व्यक्ति धूम्रपान करता है। तंबाकू युक्त स्मोकिंग करने से फेफड़ों की कार्य क्षमता पर बुरी तरह से असर पड़ता है। इसकी वजह से फेफड़ों से जुड़ी निम्न परेशानी हो सकती है-

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 क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) का खतरा

धूम्रपान की वजह से फेफड़ों को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचता है, जिसकी वजह से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी गंभीर बीमारी का खतरा रहता है। इस स्थिति से पीड़ित व्यक्तियों को क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फसीमा (Emphysema in hindi ) का खतरा रहता है। COPD से ग्रसित रोगियों को एक साथ ये दोनों स्थितियां हो सकती हैं, लेकिन उनमें से प्रत्येक की गंभीरता व्यक्ति से व्यक्ति में भिन्न होती है।

COPD में फेफड़ों में छोटे वायुमार्गों को नुकसान होने से फेफड़ों के लिए शरीर के बाकी हिस्सों में ऑक्सीजन पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। धूम्रपान अब तक COPD का सबसे आम कारण है। सीओपीडी के कुछ शुरुआती लक्षणों में छाती में आवाज, सांस लेने में तकलीफ़ और बलगम की परेशानी होना शामिल है। 

क्रोनिक ब्रोंकाइटिस

लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों को क्रोनिक ब्रोंकाइटिस हो सकता है। इस स्थिति में वायुमार्ग बहुत अधिक बलगम बनाते हैं, जिसकी वजह से व्यक्ति को काफी ज्यादा खांसी आती है। यह खांसी पुरानी (लंबे समय तक चलने वाली) हो जाती है।  क्रोनिक ब्रोंकाइटिस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन धूम्रपान छोड़ने से लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। 

एम्फसीमा  

एम्फसीमा एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़ों में छोटी हवा की थैलियों के बीच की दीवारें टूट जाती हैं, जिसकी वजह से बड़ी लेकिन कम थैलियां बनती हैं। इससे ब्लड तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। समय के साथ ये थैलियां इस हद तक टूट सकती हैं कि एम्फसीमा  से पीड़ित व्यक्ति को आराम करते समय भी पर्याप्त एयर पाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

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फेफड़ों के कैंसर का खतरा

धूम्रपान करने वाले लोगों को फेफड़े के कैंसर होने का खतरा सबसे अधिक होता है। धूम्रपान की अवधि और सिगरेट की संख्या के साथ फेफड़े के कैंसर का जोखिम बढ़ता है। कई सालों तक धूम्रपान करने के बाद भी धूम्रपान छोड़ने से फेफड़े के कैंसर के होने की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, फेफड़े का कैंसर उन लोगों को भी हो सकता है, जिन्होंने अपनी लाइफ में कभी भी धूम्रपान नहीं किया हो।