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मानसून में तेजी से बढ़ सकता है Ringworm का खतरा, जानें कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

मानसून आते ही कुछ लोगों के शरीर में जैसे हाथ, पैर, गर्दन या पैरों की उंगलियों के बीच लाल रंग की रिंग सी बन जाती है जो अंदर से खाली होती है। इसे दाद कहते हैं जो एक तरह का खुजलीदार इंफेक्शन होता है। आइए डॉक्टर से इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में जानें।

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Written By: Vidya Sharma | Updated : July 2, 2026 9:49 AM IST

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Medically Verified By: Dr Gaurav Jain

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मानसून अपने साथ कुछ बीमारियां भी लेकर आता है। खासकर इंफेक्शन की बात करें तो त्वचा का संक्रमण सबसे आम है। उमस, लगातार पसीना, देर तक पसीने से गीले कपड़े पहने रहना और बंद जूतों में घंटों पैर रहना, यह सब स्किन पर फंगस के पनपने के लिए माहौल बना देते हैं। यही कारण है कि मानसून के दौरान किसी को घमौरियां हो जाती हैं, किसी को लाल चकत्ते और किसी की स्किन ड्राई होकर फटने लगती है। इन्हीं त्वचा संक्रमणों में से एक है रिंगवार्म, जिसे आम बोलचाल की भाषा में दाद कहा जाता है।

डॉक्टर बताते हैं कि मानसून में दाद के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जाती है। शुरुआत में मामूली खुजली या छोटे से दाने जैसा दिखने वाला यह संक्रमण समय रहते ध्यान न देने पर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। बहुत से लोग इसे अनदेखा कर देते हैं, लेकिन जब समस्या बढ़ जाती है और त्वचा जलन से और खुजलाकर छिलने लगती है तो समझ आता है कि समय रहते डॉक्टर को दिखा देना चाहिए था। इसलिए आज हम आपको धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉक्टर गौरव जैन द्वारा बताए मानसून में दाद होने के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के बारे में बताने जा रहे हैं। ताकि आप भी समय रहते समस्या को ठीक कर पाएं।

रिंगवर्म क्या होता है?

रिंगवर्म यानी कि दाद एक फंगल इंफेक्शन है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में टीनिया कहा जाता है। यह संक्रमण डर्माटोफाइट्स नाम के फंगस के कारण होता है, जो त्वचा, बालों और नाखूनों में मौजूद केराटिन नामक प्रोटीन पर पनपता है। स्किन पर बनने वाले इसके गोले और उभरे हुए घेरे की वजह से ही इसे रिंगवर्म कहा जाता है। दाद की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन इसे कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए। आइए जानें कि यह संक्रमण मानसून में ही तेजी से क्यों फैलता है।

मानसून में यह संक्रमण तेजी से क्यों फैलता है?

डॉक्टर बताते हैं "फंगस को बढ़ने के लिए गर्म और नम वातावरण की जरूरत होती है। और मानसून में यही परिस्थितियां सबसे अधिक होती हैं। पसीना देर तक त्वचा पर बना रहता है, त्वचा को पर्याप्त हवा नहीं मिलती और नमी भी बनी रहती है। जिसकी वजह से संक्रमण के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।"

यह इंफेक्शन संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क, तौलिया, कपड़े, कंघी और बिस्तर इस्तेमाल करने, जिम और सार्वजनिक शॉवर जैसी जगहों का इस्तेमाल और संक्रमित पालतू जानवरों के संपर्क में आने से भी फैल सकता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

लोगों को चेतावनी देते हुए डॉक्टर कहते हैं "रिंगवर्म के शुरुआती लक्षण अक्सर साधारण खुजली जैसे लगते हैं। प्रभावित हिस्से पर लाल, भूरे या गहरे रंग का छोटा दाना दिखाई दे सकता है, जो धीरे-धीरे गोल आकार में फैलने लगता है। इसके किनारे उभरे हुए और पपड़ीदार हो सकते हैं। जबकि बीच का हिस्सा साफ दिखाई देता है।"

यह होते हैं दाद के सामान्य लक्षण

  • लगातार खुजली और जलन
  • गोल या छल्ले जैसे निशान
  • त्वचा का सूखना और पपड़ी बनना
  • प्रभावित हिस्से में हल्की सूजन
  • सिर में संक्रमण होने पर बालों का टूटना
  • नाखूनों में संक्रमण होने पर उनका मोटा, पीला या भुरभुरा होना

आम दाग और रिंगवर्म में अंतर कैसे पहचानें?

आम दाग और रिंगवर्म में अंतर कैसे पहचानें? आम दाग और रिंगवर्म में अंतर

डॉक्टर अहम जानकारी देते हैं और बताते हैं "हर गोल निशान फंगल संक्रमण नहीं होता। सामान्य पिग्मेंटेशन या पुराने दाग अक्सर एक जैसे बने रहते हैं और उनमें खुजली या पपड़ी नहीं होती। इसके विपरीत रिंगवर्म का आकार समय के साथ बढ़ता है, इसके किनारे सक्रिय रहते हैं और खुजली लगातार बनी रहती है। यदि कोई निशान धीरे-धीरे फैल रहा हो और उसका बाहरी हिस्सा उभरा हुआ दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

शरीर के अलग-अलग हिस्सों में रिंगवर्म के अलग नाम

शरीर के जिस हिस्से में यह संक्रमण होता है, उसके आधार पर इसके नाम भी बदल जाते हैं जैसे-

रिंगवर्म के प्रकारशरीर का हिस्सा
टीनिया कैपिटिससिर और खोपड़ी में होने वाला संक्रमण
टीनिया कॉरपोरिसहाथ, पैर और शरीर की सामान्य त्वचा पर होने वाला दाद
टीनिया क्रूरिसजांघों और ग्रोइन क्षेत्र में होने वाला संक्रमण, जिसे जॉक इच भी कहा जाता है
टीनिया पीडिसपैरों और उंगलियों के बीच होने वाला संक्रमण, जिसे एथलीट्स फुट कहा जाता है
ओनिकोमाइकोसिसनाखूनों में होने वाला फंगल संक्रमण

इनमें से अधिकांश संक्रमण अत्यधिक पसीना, नमी, बंद जूते और व्यक्तिगत वस्तुएं साझा करने की आदतों से जुड़े होते हैं।

क्या घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं?

कुछ घरेलू सावधानियां संक्रमण के बढ़ने से रोकने और असुविधा को कम करने में मदद कर सकती हैं। प्रभावित हिस्से को साफ और सूखा रखना सबसे जरूरी कदम माना जाता है। नहाने के बाद त्वचा को अच्छी तरह सुखाना चाहिए, खासकर उंगलियों के बीच और शरीर की सिलवटों वाले हिस्सों को। खुजली या जलन होने पर ठंडे और साफ कपड़े से सिकाई की जा सकती है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि घरेलू उपाय केवल राहत देते हैं, फंगस को खत्म नहीं करते।

इलाज के लिए कौन सा मेडिकल ट्रीटमेंट जरूरी होता है?

हल्के और सीमित संक्रमण में एंटीफंगल क्रीम, लोशन या पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से कई हफ्तों तक लगाना जरूरी होता है। अगर संक्रमण सिर, नाखूनों या शरीर के बड़े हिस्से में फैल चुका हो, बार-बार लौट रहा हो या लंबे समय से बना हुआ हो, तो मुंह से ली जाने वाली एंटीफंगल दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। त्वचा साफ दिखने के बाद भी दवा को बीच में बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण दोबारा उभर सकता है।

रिंगवर्म होने पर लोग कौन सी गलतियां करते हैं?

सबसे आम गलती स्टेरॉयड युक्त क्रीम का बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल करना है। ऐसी क्रीम शुरुआती खुजली को कम कर देती हैं, लेकिन संक्रमण को त्वचा के भीतर और गहराई तक फैलने का मौका देती हैं। इसके अलावा कई लोग खुजली कम होते ही दवा बंद कर देते हैं, तौलिये और कपड़े साझा करते रहते हैं या प्रभावित हिस्से को बार-बार खुजलाते हैं। ये आदतें संक्रमण के फैलने और दोबारा होने के जोखिम को बढ़ाती हैं।

रिंगवर्म से बचने के आसान तरीके

अगर आप चाहते हैं कि इस मानसून आपको दाद या अन्य कोई स्किन इंफेक्शन न हो, तो इसके लिए डॉक्टर के बताए इन टिप्स को जरूर फॉलो करें। जैसे-

नहाकर आते हैं या आपको पसीना आता है तो हवा में रहें, ताकि गीले अंगों में इंफेक्शन न हो। अपने शरीर और त्वचा को सूखा रखें।

गर्मी और मानसून में उमस की वजह से पसीना बहुत आता है, ऐसे में कपड़े भी भीग जाते हैं और मोजों में नमी हो जाती है। यह रिंगवर्म जैसे इंफेक्शन के बढ़ने की संभावना को बढ़ाते हैं। इसलिए गीले कपड़ों में न रहें और मोजे तुरंत बदलें।

इस मौसम में टाइट कपड़े पहनने से बचें क्योंकि ये त्वचा पर रगड़ पैदा करते हैं। और फिर फंगल इंफेक्शन के खतरे को बढ़ाता है। मानसून में रिंगवर्म से बचने के लिए ढीले और सूती कपड़े पहनें।

कई परिवारों में लोग 2-3 तौलिए आपस में शेयर करते हैं, लेकिन यह गलती न करें क्योंकि यह दाद होने की संभावना को बढ़ा सकती है। साथ ही अगर किसी को पहले से दाद है तो उसे फैला सकती है। इसलिए अपना तौलिया, कंघी और कपड़े किसी से साझा न करें।

अगर आप जिम जाते हैं, ध्यान दें कि मशीनें साफ हों। साथ ही सार्वजनिक शॉवर में फुटवियर का इस्तेमाल करें।

अगर आपके अगर में पालतू जानवर हैं तो उनका भी ख्याल रखें और उन्हें त्वचा संबंधी होने पर या कोई बदलाव दिखने पर जांच कराएं।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर दो से चार सप्ताह तक एंटीफंगल उपचार के बावजूद संक्रमण बढ़ता रहे, बार-बार लौट आए या शरीर के बड़े हिस्से में फैल जाए, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है। खोपड़ी, चेहरे और नाखूनों में होने वाले संक्रमण को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मवाद, तेज दर्द, सूजन या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: अगर आपको अपनी त्वचा पर अधिक खुजली हो रही है, दाद, खुजली या जलन महसूस हो रही है या जलन महसूस हो रही है। ऐसी स्थिति में आप घरेलू उपाय आजमाने की बजाय डॉक्टर से परामर्श लें। साथ ही इस तरह के मानसून में स्किन इंफेक्शन को अनदेखा न करें।