• हिंदी

निमोनिया में काम करना बंद कर सकते हैं फेफड़े, जानें बच्चों में निमोनिया होने के बड़े नुकसान

निमोनिया में काम करना बंद कर सकते हैं फेफड़े, जानें बच्चों में निमोनिया होने के बड़े नुकसान

निमोनिया बच्चों के लंग्स यानि फेफड़ों पर बुरा असर डालता है। निमोनिया में बच्चों के फेफड़ों को होनेवाले कुछ ऐसे ही बड़े नुकसानों के बारे में पढ़ें यहां।

Written by Sadhna Tiwari |Updated : December 3, 2023 8:32 AM IST

Pneumonia in kids long effects: निमोनिया (Pneumonia) श्वसन मार्ग से जुड़ी से एक बीमारी (respiratory illness) है जो बैक्टेरिया या वायरस के कारण होता है। छोटे बच्चों में निमोनिया एक कॉमन बीमारी है। वैसे तो निमोनिया का इलाज संभव है और इससे पीड़ित ज्यादातर बच्चे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। लेकिन, बच्चों में इस बीमारी का असर लम्बे समय तक दिखायी दे सकता है। बार-बार बीमार होने वाले बच्चों में यह समस्या काफी गम्भीर हो सकती है। निमोनिया बच्चों के लंग्स यानि फेफड़ों (lungs) पर बुरा असर डालता है। निमोनिया में बच्चों के फेफड़ों को होनेवाले कुछ ऐसे ही बड़े नुकसानों के बारे में पढ़ें यहां। (Ways Pneumonia affects kid's lungs in Hindi)

फेफड़े नहीं कर पाते ठीक तरह से काम

गम्भीर निमोनिया के कारण फेफड़ों में घाव हो जाता है।  घाव की वजह से फेफड़ों को ठीक तरीके से काम करने में दिक्कत आती है। जब फेफड़े ठीक तरह से काम नहीं कर पाते तो बच्चों को सांस लेने में दिक्कत(breathing related problems) होती है और उनमें स्टैमिना भी कम होता है।

ब्रोंकाइटिस (​Bronchiectasis​)

निमोनिया की वजह से ब्रोंकाइल ट्यूब्स को नुकसान पहुंच सकता है। ये फेफड़ों तक हवा को लाने-ले जाने का काम करती हैं। कुछ मामलों में ब्रोंकाइटिस की समस्या हो सकती है। जिसकी वजह से बच्चों में खांसी, कफ, लंग इंफेक्शन और सांस लेने से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

Also Read

More News

अस्थमा

बच्चों में निमोनिया होने के बाद अस्थमा होने का रिस्क भी बढ़ जाता है। दरअसल, निमोनिया से श्वसन मार्ग में सूजन होने लगती हैं। जिसके चलते घुर्घराहट, खांसी, छींकने जैसे अस्थमा के लक्षण (symptoms of Asthama) दिखायी दे सकते हैं।

इम्यूनिटी कमजोर होना

मरीज की रोग-प्रतिरोधक शक्ति निमोनिया होने के बाद बहुत कमजोर हो सकती है। जिससे बार-बार इंफेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

मानसिक समस्याएं

कुछ स्टडीज में ऐसा देखा गया है कि निमोनिया होने के बाद बच्चों में मानसिक और भावनात्मक समस्याएं भी हो सकती हैं। उन्हें एंग्जायटी और तनाव महसूस हो सकता है।

बच्चों में निमोनिया के साइड-इफेक्ट्स को कम करने के उपाय

टीकाकरण:

बच्चों का वैक्सीनेशन कराएं। वैक्सीन लगवाने से बच्चों में निमोनिया और संक्रमण का रिस्क कम होता है।

सही इलाज:

बच्चे में अगर निमोनिया के लक्षण दिखायी दें तो डॉक्टर को दिखाएं और उसका इलाज कराएं।

साफ-सफाई का ध्यान रखें:

बच्चों को हाइजिन का ध्यान रखने में मदद करें। उन्हें बार-बार हाथ धोने, सैनिटाइजर, मास्क का इस्तेमाल करना सिखाएं।

बच्चों को अन्य बीमार लोगों से दूर रखें।