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Waterborne Diseases in Monsoon : आखिर बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाता इन बीमारियों का खतरा?

Waterborne Diseases : मानसून में कई तरह की दूषित पानी से होने वाली बीमारियां फैलने लग जाती है, जिससे हमें सुरक्षित रहने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं इस बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Updated : July 2, 2026 3:02 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Bhanu Mishra

Waterborne Diseases in Monsoon : मानसून अपने साथ हरियाली और ठंडक जरूर लेकर आता है, लेकिन यही मौसम कई संक्रामक बीमारियों के फैलने का कारण भी बन जाता है। बारिश के दिनों में अक्सर अस्पतालों में दस्त, उल्टी, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। इन बीमारियों की एक बड़ी वजह होती है वॉटर बोर्न डिजीज यानी ऐसी बीमारियां जो दूषित पानी या उससे तैयार भोजन के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में हर साल करोड़ों लोग दूषित पानी के कारण बीमार पड़ते हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग होते हैं। इसलिए मानसून के दौरान सुरक्षित पानी पीना और साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। आइए विषय की अधिक जानकारी के लिए हमने शालीमार बाग स्थित फॉर्टिस हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट कंसल्टेंट  डॉ. भानु मिश्रा से बातचीत की है। आइए जानते हैं-

वॉटर बोर्न डिजीज क्या होती हैं?

सीडीसी के मुताबिक, वॉटर बोर्न डिजीज वे बीमारियां हैं, जो ऐसे पानी के सेवन से होती हैं जिसमें बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट्स या अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हों। कई बार दूषित पानी से धोए गए फल, सब्जियां या उससे तैयार भोजन भी संक्रमण का कारण बन जाते हैं।Water Borne diseases

मानसून के दौरान लगातार बारिश होने से सीवर का पानी नालियों और जल स्रोतों में मिल जाता है। कई जगह पाइपलाइन भी डैमेज हो जाती हैं, जिससे पीने का पानी दूषित हो सकता है। अगर यही पानी बिना उबाले या फिल्टर किए पी लिया जाए, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

वॉटर बोर्न डिजीज और वेक्टर बोर्न डिजीज में क्या अंतर है?

मानसून में लोग अक्सर वॉटर बोर्न और वेक्टर बोर्न डिजीज को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग होती हैं। वॉटर बोर्न डिजीज दूषित पानी या खाने के जरिए फैलती हैं। इनमें डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस A व E शामिल हैं। वहीं, वेक्टर बोर्न डिजीज मच्छरों या अन्य कीड़ों के काटने से फैलती हैं, जैसे- डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया इत्यादि। यानी अगर बीमारी गंदे पानी के सेवन से हो रही है, तो वह वॉटर बोर्न डिजीज है, जबकि मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी वेक्टर बोर्न डिजीज कहलाती है।

मानसून में वॉटर बोर्न डिजीज क्यों तेजी से फैलती हैं?

बारिश के मौसम में संक्रमण बढ़ने के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई वैज्ञानिक कारण होते हैं।

1. सीवर का पानी पीने के पानी में मिल जाना

भारी बारिश के दौरान कई शहरों में सीवर ओवरफ्लो हो जाता है। इससे गंदा पानी पाइपलाइन या जल स्रोतों तक पहुंच सकता है। अगर दूषित पानी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बनता है।

2. जलभराव में तेजी से पनपते हैं बैक्टीरिया और वायरस

बरसात के दौरान जगह-जगह पानी जमा हो जाता है। यह पानी कई तरह के बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। यदि यह पानी किसी तरह खाने-पीने के संपर्क में आ जाए, तो संक्रमण फैल सकता है।

Water Borne diseases

3. खाने की चीजें हो जाती हैं जल्दी खराब

WHO के मुताबिक, मानसून में हवा में नमी अधिक होती है। इससे भोजन जल्दी खराब होता है और उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। खुले में रखा स्ट्रीट फूड या लंबे समय तक रखा भोजन खाने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

4. साफ पानी की कमी

बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में लोग टैंकर, हैंडपंप या असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं। यदि पानी को उबाले बिना पी लिया जाए, तो वाटर बोर्न डिजीज का खतरा काफी बढ़ जाता है।

किन लोगों को होता है वॉटर बोर्न डिजीज का अधिक खतरा?

हालांकि, ये बीमारियां किसी को भी हो सकती हैं, लेकिन कुछ लोगों में इनके गंभीर होने की संभावना अधिक रहती है, जैसे-

  • 5 साल से कम उम्र के बच्चे
  • 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग
  • गर्भवती महिलाएं
  • डायबिटीज के मरीज
  • किडनी या लिवर रोग से पीड़ित लोग
  • कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज
  • कुपोषित बच्चे, इत्यादि

इन लोगों में संक्रमण के साथ डिहाइड्रेशन और अन्य जटिलताएं जल्दी विकसित हो सकती हैं।

मानसून में सबसे ज्यादा फैलने वाली वाटर बोर्न डिजीज?

मानसून में कई तरह की वाटर बोर्न डिजीज हो सकता है, जैसे-

1. डायरिया फैलने का होता है खतरा

बारिश के मौसम में सबसे अधिक देखी जाने वाली बीमारी डायरिया है। यह बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी किसी भी कारण से हो सकती है। जब दूषित पानी या भोजन शरीर में जाता है, तो ये सूक्ष्मजीव आंतों में पहुंचकर संक्रमण पैदा करते हैं। इससे शरीर पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से खोने लगता है।

Water Borne diseases Water Borne diseases

डायरिया के शुरुआती लक्षण

  • बार-बार पतले दस्त
  • पेट में ऐंठन
  • उल्टी
  • हल्का या तेज बुखार
  • शरीर में कमजोरी
  • प्यास अधिक लगना, इत्यादि।

अगक समय पर ORS और इलाज न मिले, तो डिहाइड्रेशन जानलेवा भी हो सकता है। मुख्य रूप से बच्चों को इस स्थिति में विशेष देखभाल की जरूरत होती है।

2. फैल सकता है हैजा

हैजा विब्रियो कोलेरा नामक बैक्टीरिया से होता है। यह दूषित पानी के जरिए फैलने वाली सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। इस बीमारी में मरीज को अचानक बहुत अधिक पानी जैसे दस्त होने लगते हैं। शरीर से पानी इतनी तेजी से निकलता है कि कुछ ही घंटों में गंभीर डिहाइड्रेशन हो सकता है।

हैजा के लक्षण क्या हैं?

  • चावल के माड़ जैसे पतले दस्त
  • बार-बार उल्टी होना
  • मांसपेशियों में ऐंठन
  • मुंह सूखना
  • कमजोरी
  • ब्लड प्रेशर गिरना, इत्यादि।

अगर समय पर इलाज न मिले, तो मरीज की जान भी जा सकती है।

3. टाइफाइड होने का भी रहता है खतरा

टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है। यह भी दूषित पानी और भोजन से फैलता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं, इसलिए कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।

टाइफाइड के लक्षण

  • लगातार बढ़ता हुआ बुखार
  • सिरदर्द
  • शरीर में दर्द
  • भूख कम लगना
  • कब्ज या दस्त
  • पेट दर्द

अगर इलाज में देरी हो जाए, तो संक्रमण आंतों तक गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

4. हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E

बारिश के मौसम में हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E के मामले भी बढ़ जाते हैं। ये दोनों वायरस मुख्य रूप से फीकल-ओरल रूट (Fecal-Oral Route) से फैलते हैं। यानी जब संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंचता है, तो संक्रमण फैल सकता है।

मानसून में सीवर लाइन और पीने के पानी की पाइपलाइन के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस मौसम में वायरल हेपेटाइटिस के मामले बढ़ सकते हैं।

शरीर पर कैसे असर डालता है?

हेपेटाइटिस A और E वायरस सीधे लिवर पर हमला करते हैं। लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन को पचाने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और ऊर्जा के भंडारण जैसे कई जरूरी काम करता है। संक्रमण होने पर लिवर में सूजन आ जाती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

हेपेटाइटिस A और E लक्षण क्या हैं?

शरीर में काफी ज्यादा थकान होना।

भूख कम लगना

जी मिचलाना और उल्टी

हल्का या तेज बुखार

आंखों और त्वचा का पीला पड़ना

गहरे रंग का पेशाब

पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, इत्यादि।

डॉक्टर का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस E गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए उनमें इसके लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

5. अमीबायसिस फैलने की संभावना

अमीबायसिस एंटअमीबा हिस्टोलिटिका नामक परजीवी पैरासाइट के कारण होने वाला संक्रमण है। यह दूषित पानी, बिना धोए फल-सब्जियों और संक्रमित भोजन के जरिए फैलता है।

यह परजीवी आंतों में पहुंचकर उनकी अंदर परत को नुकसान पहुंचाता है। कुछ मामलों में यह लिवर तक भी पहुंच सकता है और लिवर एब्सेस जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

अमीबायसिस के लक्षण क्या हैं?

  • बार-बार दस्त
  • पेट में मरोड़
  • मल में म्यूकस या खून
  • वजन घटना
  • कमजोरी, इत्यादि।

अगर कई दिनों तक दस्त बने रहें, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।

डिहाइड्रेशन है वाटर बोर्न डिजीज की सबसे बड़ी जटिलता

वाटर बोर्न की अधिकतर बीमारियों में सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन होता है। जब शरीर से दस्त और उल्टी के जरिए बहुत अधिक पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग ठीक से काम नहीं कर पाते।  Dehydration

डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत क्या हैं?

  • बार-बार प्यास लगना
  • मुंह सूखना
  • पेशाब कम आना
  • चक्कर आना
  • कमजोरी
  • आंखें धंस जाना, इत्यादि।

बच्चों में रोते समय आंसू न आना, सुस्ती और दूध पीने से इनकार करना भी डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ओआरएस देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर हॉस्पिटल ले जाना चाहिए।

कब डॉक्टर को दिखाने की होती है जरूरत?

मानसून में दस्त या उल्टी होने पर हर बार घबराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर मरीज में ये लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, जैसे-

  • 24 से 48 घंटे से ज्यादा दस्त बने रहना
  • मल में खून आना
  • लगातार तेज बुखार
  • बार-बार उल्टी होना
  • बहुत कम पेशाब आना
  • काफी ज्यादा कमजोरी
  • बेहोशी या भ्रम की स्थिति
  • गर्भवती महिला या छोटे बच्चे में लगातार दस्त, इत्यादि।

समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

मानसून में लोग कौन-सी गलतियां करते हैं?

डॉक्टर का कहना है कि बारिश के मौसम में कुछ छोटी-छोटी लापरवाहियां संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।

  • बिना उबाला या बिना फिल्टर किया पानी पीना।
  • सड़क किनारे खुले में बिकने वाला खाना खाना।
  • कटे हुए फल और खुला सलाद खरीदना।
  • हाथ धोए बिना खाना खाना।
  • घर की पानी की टंकी की सफाई न कराना।
  • दस्त शुरू होने पर भी ORS न लेना।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक शुरू कर देना।

क्या हर दस्त में एंटीबायोटिक जरूरी होती है?

नहीं, सभी वाटर बोर्न डिजीज बैक्टीरिया से नहीं होतीं। कई मामलों में वायरस या पैरासाइट्स जिम्मेदार होते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से फायदा नहीं, बल्कि नुकसान हो सकता है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है।

Disclaimer : ध्यान रखें कि मानसून में कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। ऐसे में इस  सीजन में सुरक्षित रहने की बहुत ही जरूरत है। मुख्य रूप से साफ-सफाई का ध्यान जरूर रखें।