
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Bhanu Mishra
Waterborne Diseases in Monsoon
Waterborne Diseases in Monsoon : मानसून अपने साथ हरियाली और ठंडक जरूर लेकर आता है, लेकिन यही मौसम कई संक्रामक बीमारियों के फैलने का कारण भी बन जाता है। बारिश के दिनों में अक्सर अस्पतालों में दस्त, उल्टी, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। इन बीमारियों की एक बड़ी वजह होती है वॉटर बोर्न डिजीज यानी ऐसी बीमारियां जो दूषित पानी या उससे तैयार भोजन के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में हर साल करोड़ों लोग दूषित पानी के कारण बीमार पड़ते हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग होते हैं। इसलिए मानसून के दौरान सुरक्षित पानी पीना और साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। आइए विषय की अधिक जानकारी के लिए हमने शालीमार बाग स्थित फॉर्टिस हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. भानु मिश्रा से बातचीत की है। आइए जानते हैं-
सीडीसी के मुताबिक, वॉटर बोर्न डिजीज वे बीमारियां हैं, जो ऐसे पानी के सेवन से होती हैं जिसमें बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट्स या अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हों। कई बार दूषित पानी से धोए गए फल, सब्जियां या उससे तैयार भोजन भी संक्रमण का कारण बन जाते हैं।
मानसून के दौरान लगातार बारिश होने से सीवर का पानी नालियों और जल स्रोतों में मिल जाता है। कई जगह पाइपलाइन भी डैमेज हो जाती हैं, जिससे पीने का पानी दूषित हो सकता है। अगर यही पानी बिना उबाले या फिल्टर किए पी लिया जाए, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
मानसून में लोग अक्सर वॉटर बोर्न और वेक्टर बोर्न डिजीज को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग होती हैं। वॉटर बोर्न डिजीज दूषित पानी या खाने के जरिए फैलती हैं। इनमें डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस A व E शामिल हैं। वहीं, वेक्टर बोर्न डिजीज मच्छरों या अन्य कीड़ों के काटने से फैलती हैं, जैसे- डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया इत्यादि। यानी अगर बीमारी गंदे पानी के सेवन से हो रही है, तो वह वॉटर बोर्न डिजीज है, जबकि मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी वेक्टर बोर्न डिजीज कहलाती है।
बारिश के मौसम में संक्रमण बढ़ने के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई वैज्ञानिक कारण होते हैं।
भारी बारिश के दौरान कई शहरों में सीवर ओवरफ्लो हो जाता है। इससे गंदा पानी पाइपलाइन या जल स्रोतों तक पहुंच सकता है। अगर दूषित पानी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बनता है।
बरसात के दौरान जगह-जगह पानी जमा हो जाता है। यह पानी कई तरह के बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। यदि यह पानी किसी तरह खाने-पीने के संपर्क में आ जाए, तो संक्रमण फैल सकता है।

WHO के मुताबिक, मानसून में हवा में नमी अधिक होती है। इससे भोजन जल्दी खराब होता है और उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। खुले में रखा स्ट्रीट फूड या लंबे समय तक रखा भोजन खाने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में लोग टैंकर, हैंडपंप या असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं। यदि पानी को उबाले बिना पी लिया जाए, तो वाटर बोर्न डिजीज का खतरा काफी बढ़ जाता है।
हालांकि, ये बीमारियां किसी को भी हो सकती हैं, लेकिन कुछ लोगों में इनके गंभीर होने की संभावना अधिक रहती है, जैसे-
इन लोगों में संक्रमण के साथ डिहाइड्रेशन और अन्य जटिलताएं जल्दी विकसित हो सकती हैं।
मानसून में कई तरह की वाटर बोर्न डिजीज हो सकता है, जैसे-
बारिश के मौसम में सबसे अधिक देखी जाने वाली बीमारी डायरिया है। यह बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी किसी भी कारण से हो सकती है। जब दूषित पानी या भोजन शरीर में जाता है, तो ये सूक्ष्मजीव आंतों में पहुंचकर संक्रमण पैदा करते हैं। इससे शरीर पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से खोने लगता है।
Water Borne diseases
डायरिया के शुरुआती लक्षण
अगक समय पर ORS और इलाज न मिले, तो डिहाइड्रेशन जानलेवा भी हो सकता है। मुख्य रूप से बच्चों को इस स्थिति में विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
हैजा विब्रियो कोलेरा नामक बैक्टीरिया से होता है। यह दूषित पानी के जरिए फैलने वाली सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। इस बीमारी में मरीज को अचानक बहुत अधिक पानी जैसे दस्त होने लगते हैं। शरीर से पानी इतनी तेजी से निकलता है कि कुछ ही घंटों में गंभीर डिहाइड्रेशन हो सकता है।
हैजा के लक्षण क्या हैं?
अगर समय पर इलाज न मिले, तो मरीज की जान भी जा सकती है।
टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है। यह भी दूषित पानी और भोजन से फैलता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं, इसलिए कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
टाइफाइड के लक्षण
अगर इलाज में देरी हो जाए, तो संक्रमण आंतों तक गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
बारिश के मौसम में हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E के मामले भी बढ़ जाते हैं। ये दोनों वायरस मुख्य रूप से फीकल-ओरल रूट (Fecal-Oral Route) से फैलते हैं। यानी जब संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंचता है, तो संक्रमण फैल सकता है।
मानसून में सीवर लाइन और पीने के पानी की पाइपलाइन के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस मौसम में वायरल हेपेटाइटिस के मामले बढ़ सकते हैं।
शरीर पर कैसे असर डालता है?
हेपेटाइटिस A और E वायरस सीधे लिवर पर हमला करते हैं। लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन को पचाने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और ऊर्जा के भंडारण जैसे कई जरूरी काम करता है। संक्रमण होने पर लिवर में सूजन आ जाती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
हेपेटाइटिस A और E लक्षण क्या हैं?
शरीर में काफी ज्यादा थकान होना।
भूख कम लगना
जी मिचलाना और उल्टी
हल्का या तेज बुखार
आंखों और त्वचा का पीला पड़ना
गहरे रंग का पेशाब
पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, इत्यादि।
डॉक्टर का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस E गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए उनमें इसके लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अमीबायसिस एंटअमीबा हिस्टोलिटिका नामक परजीवी पैरासाइट के कारण होने वाला संक्रमण है। यह दूषित पानी, बिना धोए फल-सब्जियों और संक्रमित भोजन के जरिए फैलता है।
यह परजीवी आंतों में पहुंचकर उनकी अंदर परत को नुकसान पहुंचाता है। कुछ मामलों में यह लिवर तक भी पहुंच सकता है और लिवर एब्सेस जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
अमीबायसिस के लक्षण क्या हैं?
अगर कई दिनों तक दस्त बने रहें, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।
वाटर बोर्न की अधिकतर बीमारियों में सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन होता है। जब शरीर से दस्त और उल्टी के जरिए बहुत अधिक पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग ठीक से काम नहीं कर पाते। 
बच्चों में रोते समय आंसू न आना, सुस्ती और दूध पीने से इनकार करना भी डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ओआरएस देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर हॉस्पिटल ले जाना चाहिए।
मानसून में दस्त या उल्टी होने पर हर बार घबराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर मरीज में ये लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, जैसे-
समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
डॉक्टर का कहना है कि बारिश के मौसम में कुछ छोटी-छोटी लापरवाहियां संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।
नहीं, सभी वाटर बोर्न डिजीज बैक्टीरिया से नहीं होतीं। कई मामलों में वायरस या पैरासाइट्स जिम्मेदार होते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से फायदा नहीं, बल्कि नुकसान हो सकता है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है।
Disclaimer : ध्यान रखें कि मानसून में कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। ऐसे में इस सीजन में सुरक्षित रहने की बहुत ही जरूरत है। मुख्य रूप से साफ-सफाई का ध्यान जरूर रखें।