India-Pak War: युद्ध के कारण दिमाग पर लग सकता है गहरा सदमा, जानें क्या है PTSD के लक्षण और इलाज

India Pakistan War News: भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च करते हुए पाकिस्तान को पहलगाम आंतकी हमले का जवाब दिया है। लेकिन युद्ध जैसी भयावह स्थिति से लोग पीटीएसडी जैसी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

India-Pak War: युद्ध के कारण दिमाग पर लग सकता है गहरा सदमा, जानें क्या है PTSD के लक्षण और इलाज

Written by priya mishra |Published : May 7, 2025 3:28 PM IST

India Pakistan War: भारत में हुए पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते कुछ खास नहीं चल रहे हैं। ऐसे में 7 मई देर रात में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च करते हुए पाकिस्तान में जवाबी कार्यवाही की है। इस हमले में भारतीय सेना ने पाकिस्तान आतंकियों के 9 जगहों पर कुल 21 आतंकी ठिकानों को बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। ऐसे में, अब दोनों देशों के बीच युद्ध के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन युद्ध जैसी भयावह स्थिति के कारण न केवल, दोनों देशों को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि इससे लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। युद्ध में होने वाली हिंसा और परिजनों की मौत के कारण दिमाग पर सदमा लग सकता है। अधिक मानसिक तनाव झेलने के कारण लोगों को इससे पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी (PTSD) जैसे मानसिक बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है। तो आइए, जानते हैं पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षण और इलाज के बारे में विस्तार से -

युद्ध का मानसिक स्वास्थ्य क्या असर पड़ता है?

अक्सर जब भी किसी देश में युद्ध जैसी भयावह स्थिति होती है, तो इससे लोग नकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं। दरअसल युद्ध में होने वाली जान-माल की हानि, अपनों को खोने का डर, अत्यधिक हिंसा के कारण लोग इससे बहुत ज्यादा सहम जाते हैं, जिसका सीधा असर उनके दिमाग पर होता है। युद्ध के कारण लोगों को तनाव, चिंता और अवसाद की समस्या होने लगती है, जिससे वह पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) का शिकार हो जाते हैं। खासतौर पर, इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ता है।

पीटीएसडी क्या होता है?

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर दिमाग के स्वास्थ्य से संबंधित बीमारी होती है। यह बीमारी व्यक्ति को तब होती है, जब किसी व्यक्ति के साथ ऐसी कोई घटना हो, जिसके कारण वह लंबे वक्त तक सदमे में रहता है और उससे बाहर नहीं आ पाता है। जैसे बचपन की कोई घटना, परिवार में किसी की मौत या अत्यधिक हिंसा देखने के कारण भी यह बीमारी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। इसका सीधा असर व्यक्ति के दिमाग पर पड़ता है, जिसके कारण वह इस सदमे से बाहर नहीं आ पाता है।

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पीटीएसडी के लक्षण

  • इसके बीमारी के कारण व्यक्ति को बार-बार वह घटना याद आती है और उसे सोते वक्त बुरे सपने भी आते है, जिसके कारण उनके लिए सदमे से बाहर आना और ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
  • इस बीमारी के कारण लोगों का आत्मविश्वास कम हो जाता है। वह दूसरों से मिलने से कतराता है और हमेशा स्वयं को अन्य लोगों की तुलना में कमतर समझने लगता है।
  • इस प्रभावित लोग छोटी-छोटी बात पर अत्यधिक चिंता और तनाव लेने लगते है, जिसके कारण उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो जाता है।
  • करीबी लोगों से रिश्ते बनाए रखने में दिक्कत होना।
  • परिवार और दोस्तों से अलग महसूस करना।
  • दूसरे लोगों को शक की निगाहों से देखते है और कभी-कभी को खुद को ही नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते है।

पीटीएसडी का इलाज

यदि आप या आपके आस-पास कोई व्यक्ति पीटीएसडी से पीड़ित हैं, तो बगैर किसी देरी के उन्हें मनोवैज्ञानिक चिकित्सक को दिखाना चाहिए। साथ ही, कुछ दवाएं और काउंसलिंग इस बीमारी को काबू करने में आपकी सहायता कर सकती हैं। इसके अलावा, इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति से अधिक बात करें और उनकी बात को इत्मीनान से सुनें। परिवार व दोस्तों के मदद से भी इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।