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Written By: Anshumala | Published : November 5, 2018 7:11 PM IST
कैल्शियम रखता है डायबिटीज को नियंत्रित। © Shutterstock
डायबिटीज आज दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है। भारत में लगभग 4.5 करोड़ लोग डायबिटीज के रोग से पीड़ित हैं। पहले डायबिटीज को बुढ़ापे में होने वाली बीमारी कहा जाता था लेकिन आज यह रोग युवाओं के साथ बच्चों में भी देखने को मिल रहा है। डायबिटीज होने पर रक्त में शुगर की मात्रा अधिक हो जाती है जिससे शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। यह खतरनाक बीमारी कई अन्य गंभीर रोगों को भी जन्म देती है। डायबिटीज के रोगियों में कैल्शियम की कमी होने पर कूल्हे, पैर और रीढ़ की हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं।
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कुदरती आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र के संस्थापक मोहम्मद यूसुफ एन शेख कहते हैं कि डायबिटीज की रोकथाम करने या डायबिटीज हो जाने पर विभिन्न प्रकार के आहार का सेवन करने की सलाह आमतौर पर दी जाती है। किंतु एक खास रासायनिक तत्व का जिक्र कम किया जाता है जो डायबिटीज के रोग से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और वह है कैल्शियम। नियमित तौर पर कैल्शियम का सेवन करने से न सिर्फ डायबिटीज का खतरा कम होता है बल्कि यह रोग हो जाने पर कैल्शियम उससे मुकाबला करने में भी शरीर को सक्षम बनाता है। विश्व भर में किए गए अनेक शोधों से साबित हुआ है कि कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा लेने से शरीर ग्लूकोज को नियंत्रित करने में सझम होता है। एक रिसर्च के अनुसार, छह माह तक कैल्शियम और विटामिन डी की खुराक दिए जाने पर डायबिटीज के रोगियों की इंसुलिन संवेदनशीलता में काफी सुधार आ जाता है। स्वस्थ रहने के लिए 19 से 51 वर्ष की महिला-पुरुषों को प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम कैल्शियम लेना चाहिए। आयु 71 वर्ष हो जाने के बाद 1200 मिलीग्राम कैल्शियम प्रतिदिन लेना चाहिए।
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डायबिटीज का मुकाबला करना है तो करें कैल्शियम का सेवन। © Shutterstock
प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से पाएं कैल्शियम की उपयुक्त मात्रा
डायबिटीज के रोगियों को कैल्शियम की उपयुक्त मात्रा लेने के लिए एलोपैथी दवाएं लेने की बजाय प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के माध्यम से प्राप्त कैल्शियम की मात्रा अधिक होने पर भी शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। गेहूं, बाजरा, राजमा, सोयाबीन, मूंग, मोठ और चना जैसे अनाजों में कैल्शियम काफी मात्रा में मौजूद होता है। वहीं, सब्जियां जैसे ककड़ी, गाजर, भिंडी, मेथी, करेला, अरबी, मूली, टमाटर, और चुकंदर को सेवन करने से भी शरीर में कैल्शियम की पूर्ति होती है। अनानास, आम, संतरा और नारियल जैसे फल भी शरीर को कैल्शियम प्रदान करते हैं।
डायबिटोलॉजिया जर्नल में छपी एक शोध के अनुसार, दही के नियमित सेवन से डायबिटीज टाइप-2 का जोखिम 28 प्रतिशत तक कम हो जाता है। वहीं, दूध व दूध से बने अन्य खाद्य पदार्थ जैसे पनीर आदि का सेवन करने से भी शरीर में कैल्शियम की मात्रा नियंत्रित रहती हैं। मखाने में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। इनका सेवन जोड़ों के दर्द, गठिया जैसे मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। इसके सेवन से शरीर में इंसुलिन बनने लगता है और शुगर की मात्रा कम हो जाती है। हालांकि, कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा लेना भी आवश्यक है इसलिए विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ को सेवन भी अवश्य करें और यथासंभव धूप में समय अवश्य बिताएं।
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आयुर्वेदिक दवाएं होती हैं बेहद लाभकारी
मोहम्मद यूसुफ एन शेख कहते हैं कि कई बार शरीर विभिन्न कारणों से कैल्शियम युक्त पदार्थों को अवशोषित करने में सक्षम नहीं होता। ऐसे में लोग एलोपैथी दवाओं का सहारा लेते हैं, जिसका दुष्प्रभाव शरीर पर पड़ने की भी संभावना रहती है। ऐसे में आयुर्वेदिक दवाएं रामबाण उपचार साबित होती हैं क्योंकि इनका साइड इफेक्ट शरीर पर नहीं पड़ता और यह संतुलित मात्रा में शरीर को कैल्शियम प्रदान करती हैं। अत: डायबिटीज का मुकाबला करने के लिए महंगी और शरीर पर दुष्प्रभाव डालने वाली दवाओं की बजाए आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेकर आयुर्वेदिक दवाओं का नियमित सेवन करें। इससे डायबिटीज रहेगी नियंत्रण में और शरीर हमेशा बना रहेगा स्वस्थ।
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