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Written By: Anshumala | Published : November 17, 2018 5:12 PM IST
आधुनिक युग में मधुमेह या डायबिटीज एक विकराल महामारी के रूप में फैल रहा है। © Shutterstock
आधुनिक युग में मधुमेह या डायबिटीज एक विकराल महामारी के रूप में फैल रहा है। यह रोग इतना फैल गया है कि आज लगभग हर चौथा व्यक्ति मधुमेह की चपेट में है। आरामदायक जीवनशैली, भोजन में वसा, मैदा, अति मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का समावेश करने से हमारे स्वास्थ्य को बेहद नुकसान पहुंचा है। निरामय अस्पताल, नागपुर के डॉ. उल्हास बुराड़े बता रहे हैं आयुर्वेदानुसार मधुमेह से मुक्ति पाने के उपायों के बारे में... इसे भी पढ़ें- नियमित करेंगे ये 5 आसन, तो डायबिटीज रहेगा कंट्रोल में
पथ्य भोजन (Dietary food)
सम्यक मात्रा (Equal quantity) में भोजन करें। न ज्यादा खाएं, न अधिक समय तक भूखे रहें। पुराने चावल का उपयोग करें। गेहूं की जगह संभव हो तो ज्वार, बाजरा इत्यादि उपयोग करें या दो-तीन तरह का आटा मिलाकर रोटी बनाएं। भोजन बनाने के लिए कुकर का उपयोग न करें। अतिपौष्टिक, मीठी, अतितैलीय, वसायुक्त (फैट), मैदा आदि से बने पदार्थों का सेवन न करें।
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व्यायाम
अतिरिक्त शर्करा एवं ऊर्जा (कैलोरी) को शारीरिक श्रम द्वारा अर्थात् व्यायाम से पचाया जा सकता है, इसीलिए व्यायाम आवश्यक है। इससे चयापचय क्रिया (मेटाबॉलिज्म) में सुधार होता है तथा शर्करा का पाचन होता है। व्यायाम से इन्सुलिन के प्रति मांसपेशियों की संवेदनशीलता में वृद्धि होती है। इन्सुलिन के बनने और काम करने में भी इजाफा होता है। मधुमेह में पैदल चलना सबसे अच्छा व्यायाम माना गया है, इसलिए रोज ज्यादा से ज्यादा पैदल चलें। वर्ल्ड डायबिटीज डे 2018 : डायबिटीज को देना है मात, तो रोज करें ये तीन आसन
ध्यान एवं योग
मानसिक तनाव भी मधुमेह का कारक होता है। योग एवं ध्यान की प्रक्रिया से मानसिक तनाव कम होता है। तनाव के कारण कोर्टिसोल, एड्रेनैलिन, नॉर-एड्रेनैलिन के रूप में स्ट्रेस हार्मोन्स निर्मित होते हैं, जो की शरीर में अतिरिक्त शर्करा और ऊर्जा निर्माण करने का कार्य करते हैं। मानसिक तनाव (स्ट्रेस) के कारण इन्सुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता भी कम होती है, जिससे मधुमेह बढ़ता है। तनाव से होने वाली तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) की प्रतिक्रियाजन्य प्रक्रिया को योगाभ्यास एवं ध्यान रोकते हैं।
पंचकर्म
आयुर्वेदीय पंचकर्म शरीर शोधन की विधि है, जिसमें शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकाल कर शुद्धि की जाती है।
करेले की पत्ती या इसके रस का एक कप सेवन करने से भी डायबिटीज में लाभ होता है। © Shutterstock
औषधि
चंद्रप्रभा वटी, वसंतकुसुमाकर रस, त्रिफला चूर्ण, अमृतादि गुग्गुल, शिलाजीत, मधुनाशिनी वटी आदि का प्रयोग वैद्य की सलाह से लें। नवजात शिशु भी नहीं हैं डायबिटीज से सुरक्षित, बचाव के लिए करें ये काम
इन आयुर्वेदिक नुस्खों को भी आजमाएं
- बेल की पत्तियों का आधा कप रस में चुटकी भर काली मिर्च डालकर प्रात: सेवन करें।
- मेथीदाना पाउडर 1 चम्मच रोज सुबह लें।
- नीम के चार-पांच पत्ते नियमित चबाकर खाएं।
- करेले की पत्ती या फल के रस का एक कप सेवन करें या करेले के फल से बीज निकालकर और सुखाकर पाउडर बना लें। रोज सुबह एक चम्मच इस पाउडर सेवन करें।
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- जामुन के बीजों का 1 चम्मच पाउडर रोज सुबह मलाई निकली छांछ के साथ सेवन करें।
- गुड़मार की पत्तियों के पाउडर का सेवन सुबह-शाम करें।
- विजयसार का चूर्ण या छाल को एक गिलास पानी में रातभर भिगो कर रख दें और सुबह सेवन करें। ऐसा ही शाम में भी करें।
- ग्रीन टी में पॉलिफेनोल नामक तत्वा होता है जो शर्करा को कम करता है। इसका भी सेवन किया जा सकता है।
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