
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Viresh Prashant Mehta
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दिल्ली में भले ही मौसम विभाग ने जुलाई के आखिर में मानसून आने की जानकारी सांझा की हो, लेकिन बारिश जून में ही शुरू हो गई है। ऐसे में डेंगू, मरेलिया जैसी कई मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बरसाती मौसम में भीषण गर्मी से राहत तो मिलती है, लेकिन कई तरह की बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी आती हैं। जैसे कि इस मौसम में जगह-जगह जलभराव होना एक आम समस्या है। अक्सर लोग मजबूरी में या फिर लापरवाही की वजह से सड़कों पर जमे या ठहरे गंदे पानी में पैदल ही चल पड़ते हैं।
कुछ बच्चे इस तरह के बारिश के गंदे पानी में छलांग लगाते हैं। अगर हम नॉर्मली देखें तो पानी में खेलना कोई बुरी बात नहीं। बल्कि ऐसे करने से तो बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। लेकिन जब यही गंदा पानी गंभीर बीमारियों का घर लेकर आ जाए तो, तब समस्या बढ़ जाती है। हमने धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट- जनरल मेडिसिन डॉक्टर वीरेश प्रशांत मेहता से बात की और उनसे जाना कि “सड़क पर भरे इस पानी में तैरते बैक्टीरिया, वायरस और फंगस सेहत को किस तरह नुकसान पहुंचा सकते हैं और इनसे बचाव के लिए कौन से उपाय अपनाएं जा सकते हैं? आइए डॉक्टर से विस्तार से समझते हैं।
सड़कों पर जमा पानी सिर्फ बारिश का शुद्ध जल नहीं होता, बल्कि इसमें सीवर का पानी, कचरा, जानवरों का मल-मूत्र और केमिकल्स भी मिले होते हैं। डॉक्टर ने बताया कि इस पानी के संपर्क में आने से कई गंभीर संक्रमण हो सकते हैं जैसे-
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यह एक गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो लेप्टोस्पाइरा (Leptospira) नाम के बैक्टीरिया के कारण होता है।
यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों (विशेषकर चूहों, कुत्तों और मवेशियों) के मूत्र के माध्यम से पानी में मिल जाता है। जब कोई व्यक्ति इस दूषित पानी के संपर्क में आता है, तो यह बैक्टीरिया त्वचा के कट, खरोंच या आंखों और मुंह के म्यूकस मेम्ब्रेन के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है।
इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में गंभीर दर्द (विशेषकर पिंडलियों में), आंखों का लाल होना, उल्टी और दस्त शामिल हैं।
अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी 'वील्स डिजीज' (Weil's Disease) का रूप ले लेती है। इसके कारण किडनी फेलियर, लिवर को नुकसान (पीलिया), मेनिन्जाइटिस (दिमागी बुखार) और सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
अक्सर ऐसा होता है कि अगर हम घर से बाहर हों और बारिश के पानी रहें तो ऐसे में घंटों तक पैरों के गंदे पानी में भीगे रहने या नमी बने रहने के कारण फंगल इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसमें सबसे आम एथलीट फुट है। इसमें पैर की उंगलियों के बीच की त्वचा सफेद, सड़ने जैसी और बहुत ही ज्यादा खुजलीदार हो जाती है। इसके अलावा, नाखूनों में फंगस लगना (Onychomycosis) और दाद (Ringworm) जैसी समस्याएं भी आम हैं।
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अक्सर लोग पैरों में लगी छोटी सी चोट, खरोंच या फटी एड़ियों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब आप सड़क पर भरे गंदे पानी में कदम रखते हैं, तो यह छोटा सा कट बैक्टीरिया और वायरस के लिए एक खुला दरवाजा बन जाता है।
गंदे पानी में मौजूद खतरनाक जीवाणु इस छोटे से कट के रास्ते रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं। इससे न सिर्फ लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है, बल्कि सेल्युलाइटिस (Cellulitis) जैसी गंभीर त्वचा की बीमारी भी हो सकती है, जिसमें त्वचा में गहरा संक्रमण, सूजन और मवाद बन जाता है। इसके अलावा, अगर टेटनस का टीका न लगा हो, तो टेटनस इन्फेक्शन का खतरा भी पैदा हो जाता है।
बच्चों की इम्यूनिटी वयस्कों की तुलना में कमजोर होती है, जिससे वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। बच्चे अक्सर जलभराव वाले पानी को देखकर खुश हो जाते हैं और उसमें खेलने या तैरने की कोशिश करते हैं। बच्चों की स्किन ज्यादा सेंसिटिव होती है, जिससे फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन तेजी से फैल सकता है। इसके अलावा, खेलते समय गंदे पानी के छींटे उनके मुंह, आंखों या नाक में जाने का खतरा रहता है, जिससे गंभीर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इन्फेक्शन जैसे उल्टी-दस्त, हैजा, टाइफाइड होने की आशंका बढ़ जाती है।
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वैसे तो गंदे पानी से हर किसी को बचना चाहिए, लेकिन कुछ श्रेणियों के लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है:
डायबिटीज (मधुमेह) के मरीज- मधुमेह के रोगियों में घाव भरने की प्रक्रिया धीमी होती है और संक्रमण का खतरा अधिक होता है। पैरों में छोटा सा संक्रमण भी 'डायबिटिक फुट अल्सर' का रूप ले सकता है।
कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग- बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, या जो लोग किसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे हैं।
पैरों की पुरानी बीमारी वाले- जिन्हें पहले से एक्जिमा, सोरायसिस या पैरों में छाले हों।
अगर आप गंदे पानी के संपर्क में आए हैं और अगले कुछ दिनों में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। जैस-
अचानक तेज बुखार आना और ठंड लगना।
मसल्स में असहनीय दर्द, खासकर पिंडलियों और पीठ में।
आंखों का अत्यधिक लाल होना या पीला पड़ना (पीलिया के संकेत)।
पैरों की त्वचा पर लालिमा, सूजन, गर्मी महसूस होना या मवाद निकलना।
लगातार उल्टी, दस्त या पेट में मरोड़ होना।
अगर किसी एमरजेंसी में आपको जलभराव वाले पानी से गुजरना ही पड़े, तो तुरंत ये कदम उठाएं-
जल्द से जल्द धोएं- घर या सुरक्षित स्थान पर पहुंचते ही पैरों को साफ बहते पानी और एंटीसेप्टिक साबुन से अच्छी तरह धोएं।
पूरी तरह सुखाएं- पैरों को, खासकर उंगलियों के बीच के हिस्से को, एक साफ तौलिये से पूरी तरह सुखाएं। नमी बिल्कुल न रहने दें।
एंटीसेप्टिक का प्रयोग- अगर पैर में कोई कट या खरोंच है, तो उसे साफ करके एंटीसेप्टिक क्रीम या लोशन लगाएं।
गर्म पानी का सेक- अगर पैर ज्यादा देर पानी में रहे हों, तो हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा नमक डालकर पैर कुछ देर रख सकते हैं, फिर सुखा लें।
गीले जूते-चप्पल दोबारा पहनना- नमी वाले जूतों को बिना सुखाए दोबारा पहनने से फंगस तेजी से पनपता है।
नंगे पैर या खुले सैंडल में बाहर निकलना- जलभराव वाले क्षेत्रों में स्लीपर या खुले सैंडल पहनने से गंदा पानी सीधे त्वचा के संपर्क में आता है।
पैरों की स्वच्छता पर ध्यान न देना- बाहर से आने के बाद पैरों को बिना धोए सो जाना या वैसे ही बैठे रहना।
लक्षणों को सामान्य फ्लू समझना- बुखार या बदन दर्द होने पर खुद से दवाइयां (self-medication) लेना और डॉक्टर को न दिखाना।
दिखने में भले ही कोई पानी साफ लगे, लेकिन अगर वह सड़क पर जमा है, तो वह दूषित ही है। ठहरे हुए पानी में कुछ ही घंटों के भीतर बैक्टीरिया और मच्छरों के लार्वा पनपने लगते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार के जलभराव को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। साफ दिखने वाले पानी में भी लेप्टोस्पायरोसिस के बैक्टीरिया या इनविजिबल केमिकल एलिमेंट मौजूद हो सकते हैं।
सड़क के गंदे पानी के खतरों और मानसून की अन्य बीमारियों से बचने के लिए इन १० नियमों का पालन करें:
डिस्क्लेमर: मानसून का आनंद लें, लेकिन सतर्कता के साथ। थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को इस मौसम की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है। लेकिन लापरवाही कई बीमारियों को बुलावा दे सकती है। अगर अगर में किसी को अधिक उल्टी, दस्त, बदन दर्द या अन्य कोई लक्षण दिखते हैं तो घरेलू उपायों की बजाय डॉक्टर से परामर्श लें।