विटिलिगो एक स्किन डिसऑर्डर है, जिसमें मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाएं नष्ट होने लग जाते हैं और परिणामस्वरूप त्वचा मे मेलेनिन की कमी हो जाती है। मेलेनिन की कमी के कारण त्वचा के कुछ हिस्सों पर सफेद रंग के दाग पड़ने लग जाते हैं।
विटिलिगो (vitiligo in hindi) एक प्रकार का त्वचा रोग है, जिसे हिन्दी में “श्वेत कुष्ठ” और अंग्रेजी में “व्हाइट लेप्रोसी” (White leprosy) के नाम से जाना जाता है। इस रोग में त्वचा कुछ हिस्सों से अपना सामान्य रंग खो देती है और वहां पर सफेद रंग के धब्बे बन जाते हैं। ये धब्बे धीरे-धीरे बड़े होते रहते हैं, जिस कारण से अक्सर लोगों में आत्मसम्मान की कमी हो जाती है। विटिलिगो त्वचा के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में यह बालों व मुंह की अंदरूनी त्वचा को भी प्रभावित कर देता है। हमारी त्वचा को रंग प्रदान करने का काम मेलेनिन का होता है और जब मेलानिन बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या किसी अन्य कारण से मेलानिन बनना बंद हो जाता है, तो विटिलिगो रोग विकसित होता है।
विटिलिगो के प्रकार
(Types of Vitiligo in hindi) विटिलिगो को चार अलग-अलग प्रकारों में बांटा गया है, जिनमें निम्न शामिल हैं -
जनरलाइज्ड - यह विटिलिगो का सबसे सामान्य प्रकार है, जिसमें शरीर के कई हिस्सों पर विटिलिगो के धब्बे (मैक्यूल) दिखाई देते हैं।
सेगमेंटल - इसमें शरीर के किसी विशेष हिस्से पर ही सफेद धब्बे बनते हैं, जैसे हाथ या पैर।
म्यूकोसल - यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों में होता है, जहां पर म्यूकस मेम्बरेन होती है जैसे मुंह व जननांग।
फोकल - यह विटिलिगो का एक दुर्लभ प्रकार है, इसमें सफेद धब्बे शरीर के किसी छोटे हिस्से पर होते हैं और कई सालों तक उसी आकार में रहते हैं।
यूनिवर्सल - यह भी विटिलिगो का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें शरीर का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा विटिलिगो से प्रभावित हो जाता है।
विटिलिगो के लक्षण
त्वचा पर सफेद रंग के धब्बे बन जाना विटिलिगो का सबसे प्रमुख लक्षण है। हालांकि, कुछ मामलों में इसमें होने वाले धब्बे हल्के गुलाबी, ग्रे या ब्राउन रंग के भी हो सकते हैं। समय से पहले सिर, दाढ़ी, मूंछ या भौंहों के बालों का रंग सफेद या ग्रे हो जाना भी विटिलिगो का लक्षण हो सकता है। हालांकि, अधिकतर मामलों में विटिलिगो से शरीर के निम्न हिस्सों में सफेद दाग होते हैं -
जहां त्वचा की तह होती है, जैसे कांख व गर्दन आदि
पहले किसी हिस्से में चोट लगी हुई होना
त्वचा के उन हिस्सों में जो सूरज के संपर्क में अधिक आते हैं
तिल व मस्से के आसपास
विटिलिगो से स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं होती है, हालांकि, फिर भी यदि आपकी त्वचा पर सफेद दाग बनने लग गए हैं तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं। ऐसा आमतौर पर इसलिए किया जाता है, ताकि धब्बों के बढ़ने की गति को धीमा किया जा सके।
विटिलिगो के कारण
(Vitiligo causes in hindi) विटिलिगो रोग तब विकसित होता है, जब मेलेनोसाइट्स (Melanocytes) नामक कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या फिर मेलानिन बनाना बंद कर देती हैं। मेलेनिन खास प्रकार का पिगमेंट होता है, जो त्वचा, बाल व आंखों को उसका रंग प्रदान करता है। हालांकि, अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया कि मेलेनोसाइट्स नष्ट क्यों होती हैं या फिर किस कारण से मेलेनिन बनाना बंद कर देती हैं।
हालांकि, कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित समस्या हो सकती है। जबकि कुछ अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि यह जीन से संबंधित समस्या हो सकती है।
विटिलिगो के जोखिम कारक
(Vitiligo risk factor in hindi) कुछ स्थितियां हैं, जिनमें विटिलिगो होने का खतरा बढ़ जाता है -
परिवार में किसी अन्य व्यक्ति को विटिलिगो होना
परिवार में अन्य किसी व्यक्ति को प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी समस्या होना
शारीरिक व मानसिक तनाव होना
त्वचा का कोई घाव लंबे समय तक धूप के संपर्क में आना
त्वचा किसी रसायन के संपर्क में आना
विटिलिगो के बचाव
(Vitiligo preventions in hindi) जैसा कि अभी तक विटिलिगो के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है इसलिए इससे बचाव करने के तरीकों के बारे में भी अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि, त्वचा की सामान्य रूप से देखभाल करना और स्वास्थ्यकर आहार लेना त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है और परिणामस्वरूप विटिलिगो के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
विटिलिगो का निदान
(Vitiligo Diagnosis in hindi) विटिलिगो के धब्बों की जांच करके डॉक्टर आसानी से इस रोग का पता लगा लेते हैं। हालांकि, स्थिति की पुष्टि करने के लिए “वुड लैंप” नामक एक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। वुड लैंप में पराबैंगनी किरणों की मदद से विटिलिगो के धब्बों की पहचान की जाती है।
इसके अलावा स्किन बायोप्सी व अन्य कुछ टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनकी मदद से यह पता लगाया जाता है कि विटिलिगो के साथ कोई अन्य रोग तो नहीं हैं।
विटिलिगो का इलाज
(Vitiligo treatment in hindi) विटिलिगो का कोई स्थायी इलाज नहीं है, सिर्फ इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और इसके बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है। इसके इलाज का मुख्य लक्ष्य त्वचा की दिखावट में सुधार करना है। विटिलिगो का इलाज प्रमुख रूप से रोग की गंभीरता पर निर्भर करता है, जो कुछ इस प्रकार हैं -
क्रीम व लोशन आदि - ऐसी कई प्रकार की क्रीम, जेल, लोशन आदि हैं, जिनमें कोर्टिकोस्टेरॉयड होता है। ये दवाएं त्वचा की रंगत को वापस लाने में मदद करती हैं। हालांकि, ये दवाएं विटिलिगो के शुरुआती चरणों में ही काम कर सकती हैं।
डीपिगमेंटेशन या ब्लीचिंग - यह ट्रीटमेंट विटिलिगो के गंभीर मामलों में ही इस्तेमाल किया जाता है। इनकी मदद से त्वचा के क्षतिग्रस्त अवशेषों को हटा दिया जाता है।
सोरालेन फोटो कीमोथेरेपी - इसे विटिलिगो के लिए एक प्रभावी उपचार माना जाता है, जिसमें सोरालेन की मदद से त्वचा को फिर से रंजकता प्रदान की जाती है।
इसके अलावा विटिलिगो का इलाज करने के लिए अन्य ट्रीटमेंट प्रोसीजरों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिनमें मुख्य रूप से स्किन ग्राफ्टिंग, मेलानोसाइट्स ट्रांसप्लांट और टैटू बनाना आदि शामिल हैं।
विटिलिगो की जटिलताएं
(vitiligo complications in hindi) विटिलिगो से ग्रस्त मरीजों के शरीर में मेलेनिन की कमी हो जाती है, जिससे वे धूप के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। विटिलिगो के मरीजों को आंखों संबंधी समस्याएं होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा त्वचा की दिखावट में बदलाव होने के कारण विटिलिगो के मरीजों को सामाजिक व भावनात्मक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सफेद दाग को लेकर कई मिथ्य फैले हुए हैं। ऐसे में इसके बारे में जानना बेहद जरूरी है। तो आज इस लेख में सफेद दाग के लक्षण, इसके होने के पीछे कारण और इससे बचाव के तरीके जानते हैं।
विटिलिगो के मेडिकल कारणों से इतर एक ऐसा कारण भी है जिसे अनजाने में कर आप सफेद दाग की चपेट में आ सकते हैं। आपको बता दें कि खाने की कुछ चीजों का कॉम्बिनेशन भी आपको सफेद दाग का शिकार बना सकता है। आज हम आपको कुछ ऐसे फूड कॉम्बिनेशन बता रहे हैं जिन्हें आपको कभी नहीं अपनाना चाहिए।
सफेद दाग के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 25 जून को वर्ल्ड विटिलिगो डे मनाया जाता है। आज इसी मौके पर हम आपको सफेद दाग के संदर्भ में समाज में फैली भ्रांतियां और उसके निवारण के तरीके बता रहे हैं। मेडिकल भाषा में सफेद दाग को एक बीमारी नहीं बल्कि ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर कहा जाता है। यह स्थिति तब होती है जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) शरीर को ही प्रभावित करने लगती है।
आयुर्वेद के अनुसार मछली-दूध या मांस के साथ डेयरी उत्पादों को खाने से बचना चाहिए। आयुर्वेद मानता है कि मछली एक मांसाहारी भोजन है और दूध एक शाकाही भोजन है। अब एक मांसाहार और दूसरा शाकाहारी है तो ये असंगत हैं। आयुर्वेद मानता है कि दूध और मांस एक साथ खाने से शरीर में तमस गुण बढ़ने लगता है जिससे कई तरह की बीमारी हो सकती है।
सफेद दाग एक तरह का त्वचा रोग है जो किसी एलर्जी या त्वचा की समस्या के कारण होता है। कई बार ये अनुवांशिक भी होता है। इसका इलाज आप लाल मिट्टी के इस्तेमाल से भी कर सकते हैं।
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