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Vitamin ki Kami se Hone Wale Rog: आजकल देखा गया है कि कम उम्र में ही लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होने लगी हैं और थकान, थोड़ा बहुत काम करने पर सांस फूलना व चक्कर आना जैसी समस्याएं आम होती जा रही है। लेकिन यह आम समस्याएं नहीं होती बल्कि ऐसी हर एक समस्या वास्तव में शरीर के अंदर किसी बीमारी या किसी खास पोषक तत्व की कमी का संकेत देती हैं। डॉ. नीरज कुमार, सीनियर कंसल्टेंट जनरल मेडिसिन, शारदा केयर हेल्थसिटी के अनुसार “आज के समय में थकान, चक्कर आना और हल्का-सा काम करने पर भी सांस फूलना बहुत से लोगों में आम शिकायत बन गई है। अक्सर इन्हें काम का दबाव, उम्र या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन कई मामलों में ये लक्षण शरीर में विटामिन और खनिजों की कमी की ओर संकेत करते हैं। इस लेख में हम इसी बारे में कुछ जरूरी जानकारियों पर चर्चा करेंगे।
डॉ. नीरज कुमार के अनुसार, शरीर में कमजोरी, थकान और बार-बार चक्कर आना या सिर घूमना जैसी समस्याओं के पीछे आमतौर पर विटामिन बी12 की कमी ही देखी जाती है। वैसे तो सभी विटामिन शरीर के लिए जरूरी होते हैं, लेकिन विटामिन बी12 शरीर के लिए सबसे जरूरी विटामिनों में से एक माना जाता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और नर्वस सिस्टम के सही कामकाज के लिए जरूरी होता है। इसकी कमी से लगातार थकान, चक्कर, हाथ-पैरों में झनझनाहट और सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। हालांकि, इसके अलावा अन्य अन्य भी विटामिन बी12 की कमी के लक्षण हो सकते हैं।

शरीर के लिए विटामिन डी भी जरूरी होता है और इसकी कमी होने से भी शरार में एनर्जी की कमी, कमजोरी और मांसपेशियों की ताकत कम होने लगना आदि समस्याएं देखी जा सकती हैं। अगर शरीर में विटामिन डी की कमी है तो व्यक्ति को जल्दी थकान होने लगती है, बदन दर्द रहता है और यहां तक कि उसी इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ जाती है। शरीर में विटामिन डी की कमी होने से हड्डियों में कैल्शियम भी पूरी तरह से अवशोषित नहीं हो पाता है और इसके कारण हड्डियां भी कमजोर पड़ने लगती हैं और फ्रैक्चर (हड्डी टूटना) व जोड़ों में दर्द होना आदि लक्षण भी देखे जा सकते हैं। धूप में बैठने के अलावा भी विटामिन डी से रिच फूड्स का सेवन करना चाहिए।
विटामिन बी9 को ज्यादा फोलिक एसिड के नाम से जाना जाता है और यह भी शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण विटामिनों में से एक है। व्यक्ति के शरीर में थकान, कमजोरी, सांस फूलना और सिर घूमना या चक्कर आना आदि लक्षण फोलिक एसिड की कमी के कारण भी देखे जा सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब फोलिक एसिड की कमी होने पर शरीर पर्याप्त मात्रा में रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता है, जिससे एनीमिया होने का खतरा बढ़ने के साथ-साथ ये सभी लक्षण महसूस होने लगते हैं।
सिर्फ विटामिन ही नहीं बल्कि इनके अलावा भी कई पोषक तत्व हैं, जिनकी कमी होने के कारण शरीर में कमजोरी, सांस फूलना, बार-बार थकान और सिर घूमने जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। जिनके बारे में नीचे बताया गया है -
आयरन की कमी - ऐसा खासतौर पर महिलाओं में देखा जाता है, जिनमें आयरन की कमी के कारण सांस फूलना, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। महिलाओं में आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया आमतौर पर पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होने के कारण होता है।
मैग्नीशियम की कमी - अगर मैग्नीशियम की कमी होने लगी है, तो शरीर में एनर्जी बनना बनना बंद हो जाता है, जिससे थकान व कमजोरी महसूस होना आम है। इसके अलावा मांसपेशियों को कंट्रोल करने वाले नर्व सिग्नल भी कमजोर पड़ जाते हैं, जिसके कारण मसल क्रैंप्स होने लगते हैं और थकान महसूस होती है।
डॉ. कुमार ने बताया कि इन विटामिनों व अन्य पोषक तत्वों की कमी होने की सबसे बड़ी समस्या ये है कि शुरुआत में इनके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और अक्सर नजरअंदाज होने लगते हैं। इसके बाद भी थकान, कमजोरी, सिर घूमने जैसे लक्षणों को लोग आमतौर पर आम कमजोरी समझ कर इग्नोर करते रहते हैं, लेकिन यह समझ नही पाते कि ये सभी लक्षण शरीर में किसी बीमारी या किसी कमी का ही संकेत हो सकता है।
इसके अलावा आजकल लोग खानपान व जीवनशैली से बुरी आदतें ज्यााद अपनाने लगे हैं, जिसका सीधा असर शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों और उनके शरीर में अवशोषित होने की प्रक्रिया पर पड़ता है। सरल शब्दों में कहें तो अगर आपकी जीवनशैली अच्छी नहीं है और आप खानपान सही नहीं ले रहे हैं तो ऐसे में शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाएंगे और अगर जितने भी मिल रहे हैं वे शरीर में पूरी तरह से अवशोषित नहीं हो पाएंगे।
डॉ. कुमार ने बताया कि ऐसे लक्षणों को हल्के में लेना ठीक नहीं होगा, क्योंकि थकान, चक्कर या सांस फूलने की समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो यह गंभीर बीमारी पैदा भी कर सकता है। ऐसे में ब्लड टेस्ट के जरिए सही कारण का पता लगाना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज व रोकथाम की जा सके। साथ ही में इस बात का ध्यान भी रखना है कि इलाज सिर्फ सप्लीमेंट लेने तक सीमित नहीं होता, बल्कि संतुलित आहार, सही दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार भी उतना ही आवश्यक है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।