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आज कल के बच्चों की आंखें बचपन से ही खराब हो रही हैं। स्थिति यह है कि छोटे-छोटे बच्चों की आंखों पर चश्मा लगा हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल माता-पिता द्नारा बच्चे की परवरिश और उनके खान-पान पर उठता है। जी हां, आज कल के बच्चे पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड्स को ज्यादा खाना पसंद करते हैं। वे फलों और हरी सब्जियों से दूर रहते हैं। साथ ही इनएक्टिव लाइफस्टाइल की वजह से भी बच्चों की आंखें खराब हो रही हैं। आइए, जानते हैं माता-पिता की वो कमियां जो बच्चों की आंखों को कमजोर बनाते हैं।
बच्चों को देसी चीजें ना खिलाना खास कर कि गाजर, चुकंदर और जामून व शहतूत जैसे फल आपकी आंखों को कमजोर करते हैं। इन फलों में कैरोटीनॉयड (Carotenoids) होते हैं जो कि आंखों के लिए जरूरी होता है। लेकिन, जब आपके बच्चे इन फलों का सेवन नहीं करते हैं तो, उनकी आंखें बचपन से ही कमजोर हो जाती हैं।
विटामिन ए (Vit A) आंखों के लिए सबसे जरूरी विटामिन में से एक है। इसकी कमी से रेटिना और आंखों की सेहत पूरी तरह से प्रभावित होती है। ऐसे में बच्चों की आंखों को हेल्दी रखने के लिए जरूरी यह है कि आप उन्हें हरी पत्तेदार सब्जियोंकी आदत डलवाएं। जैसे पालक, मूली के पत्ते और सरसों का साग। इन सब्जियों को खाने से बच्चों की आंखें लंबे समय तक स्वस्थ रहेंगी।
कुछ बच्चे दूध, मीट और अंडा जैसी चीजों से दूरी बनाते हैं। दरअसल, कुछ बच्चों को दूध पचता नहीं है या उन्हें पीने से लैक्टोज इंफेक्शन हो जाता है। ऐसे बच्चों में विटामिन बी12 की कमी होती है जिससे आंखों को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा कुछ लोग शाकाहारी होते हैं और अपने बच्चों को भी मीट और अंडा नहीं खाने देते। तो, इससे उनकी आंखें कमजोर हो जाती हैं।
इनएक्टिव लाइफस्टाइल विटामिन डी की कमी से भी जुड़ा हुआ है। विटामिन डी ग्लूकोमा, कैटरेक्ट और मस्कुलर डिजनरेशन की समस्या हो सकती है। विटामिन डी शरीर तब बनाता है जब कोलेस्ट्रॉल के लिपीड धूप के प्रभाव में आते हैं। इसलिए धूप जरूरी है और इनएक्टिव लाइफस्टाइल वाले बच्चे घर में रहते हैं, बाहर खेलने और घुमने नहीं जाते जिससे आंखें कमजोर हो सकती हैं।