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Vitamin D Side Effects in Hindi: विटामिन डी का सेवन हड्डियों को मजबूती (Healthy Bones) देने के लिए बहुत जरूरी होता है। साथ ही विटामिन डी (Vitamin D Benefits in hindi) शरीर में कई अन्य पोषक तत्वों का निर्माण भी करता है। विटामिन डी का मुख्य स्रोत वैसे तो धूप है, लेकिन इसकी कमी की पूर्ति आप कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन से भी कर सकते हैं। धूप से बनने वाली विटामिन डी (Vitamin D) शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के लेवल को बनाए रखता है। हड्डियों को मजबूत रखने और कैल्शियम की आपूर्ति के लिए विटामिन डी बेहद आवश्यक तत्व है। विटामिन डी प्रतिरक्षा प्रणाली, मांसपेशियों और कोशिका वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण विटामिन है, क्योंकि यह सूजन कम करता है, रक्तचाप नियंत्रित करता है और हृदय को हेल्दी रखता है।
कैल्शियम शरीर में तभी एब्जॉर्ब होता है, जब विटामिन डी (Vitamin D Side Effects in Hindi) की उपस्थिति हो और इस प्रकार कैल्शियम चयापचय (Metabolism) में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। हालांकि, कुछ लोग अपनी हड्डियों को मजबूती देने के लिए अधिक मात्रा में विटामिन डी का सेवन करने लगते हैं, जो शरीर को लाभ पहुंचाने की बजाय नुकसानदायक साबित होता है। विटामिन डी के कम सेवन से शरीर में इसकी कमी और अधिक सेवन से विषाक्तता (Toxicity) का कारण बनता है।
विटामिन डी का मुख्य स्रोत सूरज है। आपका शरीर सही तरीके से अपना सारा काम करे सके, उसके लिए विटामिन डी फैट-सॉल्यूबल विटामिंस में से एक है। विटामिन डी कैल्शियम का निर्माण करता है। फूड्स, सूर्य और सप्लीमेंट्स में पाए जाने वाले विटामिन डी पोषक तत्वों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। अत्यधिक मात्रा में विटामिन डी के सेवन से शरीर में विषाक्तता (Vitamin D Toxicity) हो जाती है। यह विषाक्तता तब होती है, जब रक्त का स्तर 150 मिलीग्राम/एमएल से ऊपर हो जाता है, क्योंकि विटामिन शरीर में वसा में संग्रहित होता है और धीरे-धीरे रक्तप्रवाह में छोड़ा जाता है, लेकिन इसके बावजूद विषाक्तता आम नहीं है। विटामिन डी टॉक्सिसिटी उन लोगों को हो सकता है, जो बिना अपने ब्लड लेवल को मॉनिटर किए ही, लंबे समय तक उच्च खुराक वाले डायटरी सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं।
विटामिन डी सप्लीमेंट्स या इससे भरपूर फूड्स का सेवन अधिक मात्रा में करने से आपको उल्टी, जी मिचलाना जैसी समस्याएं शुरू हो सकती है। खून में कैल्शियम के उच्च स्तर के कारण व्यक्ति को उल्टी और मतली का अनुभव (Side Effects of too much intake of Vitamin D in Hindi) होता है। हालांकि, ये हर व्यक्ति में आम नहीं है।
विटामिन डी कैल्शियम को चयापचय करने में मदद करता है, जो स्वस्थ हड्डियों के लिए आवश्यक है, लेकिन शरीर में बहुत अधिक विटामिन डी रक्त में विटामिन के2 के निम्न स्तर का कारण बन सकता है। विटामिन K2 स्वस्थ हड्डियों को बनाए रखने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है, इसलिए सामान्य मात्रा में विटामिन डी पूरक (vitamin D supplement) लेना महत्वपूर्ण है।
हमारी कि़डनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। विटामिन डी का ओवरडोज किडनी के कार्यों को प्रभावित करता है। अधिक विटामिन डी के सेवन से किडनी फेल भी हो सकते हैं।
ये तीनों ही समस्याएं पाचन संबंधी होती हैं, जो अक्सर फूड इन्टॉलरेंस या इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम से जुड़ी होती हैं। ये समस्याएं हाई ब्लड कैल्शियम लेवल के कारण (Vitamin D side effects) भी हो सकती हैं।
विटामिन डी के अत्यधिक सेवन से शरीर में कैल्शियम की मात्रा में वृद्धि होती है, जिससे ऊतकों और त्वचा पर कैल्शियम का जमाव होने लगता है। यह हड्डियों को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, इसलिए रक्त में कैल्शियम की अधिक मात्रा होने से हाई ब्लड प्रेशर, हड्डियों का कमजोर होना, किडनी डैमेज, थकान, चक्कर आना आदि समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
Vitamin-D Deficiency: शरीर में विटामिन डी की कमी के संकेत और लक्षण
विटामिन डी की कमी से हो सकता है डायबिटीज़ और डिप्रेशन, ये हैं Vitamin D की कमी के लक्षण