
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : June 10, 2026 2:37 PM IST
Medically Verified By: Dr. Venkat Raman Kola
Image Credit : ChatGPT
विशाखापट्टनम में फैक्ट्री में लगी आग की घटना के बाद बर्न इंजरी को लेकर चिंता बढ़ गई है। आग से होने वाली चोटें सिर्फ स्किन को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि गंभीर मामलों में शरीर में पानी की कमी, संक्रमण, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और शॉक जैसी जानलेवा स्थितियां भी पैदा कर सकती हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जलने पर तुरंत क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के गहन चिकित्सा एवं क्रिटिकल केयर डॉ. वेंकट रमन कोला का कहना है कि अक्सर लोग जलने पर तुरंत तेल, घी, टूथपेस्ट या घरेलू नुस्खे लगाने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना स्थिति को और गंभीर बना सकता है। समय पर सही प्राथमिक उपचार गंभीर जटिलताओं और संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है।
डॉक्टर का कहना है कि जलने की चोटें मामूली लालिमा और दर्द से लेकर जानलेवा स्थिति तक हो सकती हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि त्वचा कितनी गहराई तक जली है, शरीर का कितना हिस्सा प्रभावित हुआ है और चोट किस स्थान पर हुई है।
सुपरफिशियल बर्न में स्किन लाल हो जाती है और दर्द होता है, जबकि गहरे बर्न और फुल थिकनेस बर्न्स स्किन की कई परतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे संक्रमण, शरीर में तरल पदार्थों की कमी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और यहां तक कि शॉक का खतरा भी बढ़ जाता है।
डॉ.वेंकट रमन कोला का कहना है कि फैक्ट्री और औद्योगिक क्षेत्रों में होने वाले बर्न अक्सर थर्मल, केमिकल या इलेक्ट्रिकल कारणों से होते हैं। ऐसे मामलों में त्वचा के अलावा मांसपेशियां, नसें और अंदरूनी ऊतक भी प्रभावित हो सकते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जनरल मेडिकल साइंस के मुताबिक, गंभीर बर्न शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा सकते हैं।
डॉ. कोला बताते हैं कि सबसे पहला कदम जलने की प्रक्रिया को रोकना है। यदि कपड़ों में आग लगी हो तो व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। इसके बाद जले हुए हिस्से को कम से कम 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें।
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) और अमेरिका बर्न असोशिएट भी जलने के बाद ठंडे बहते पानी से प्रभावित हिस्से को ठंडा करने की सलाह देती हैं, क्योंकि इससे त्वचा के अंदर हो रहे नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि जले हुए हिस्से पर घी, तेल, टूथपेस्ट, मक्खन, हल्दी या अन्य घरेलू नुस्खे नहीं लगाने चाहिए। ये पदार्थ संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं और डॉक्टरों के लिए घाव का सही आकलन करना मुश्किल बना सकते हैं। इसके अलावा, फफोले बनने पर उन्हें फोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे बैक्टीरिया के प्रवेश का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. कोला का कहना है कि अगर जलन चेहरे, हाथों, पैरों, जननांगों या बड़े हिस्से में हुई हो तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। इसी तरह धुएं के संपर्क में आने के बाद सांस लेने में परेशानी, खांसी या गले में जलन महसूस हो तो यह इनहेलेशन इंजरी का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।
रिसर्च बताती है कि गंभीर बर्न के मामलों में शुरुआती घंटों में सही उपचार, फ्लूइड मैनेजमेंट, संक्रमण नियंत्रण और जरूरत पड़ने पर स्किन ग्राफ्टिंग मरीज की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बर्न सेंटर में रेफर किए जाने से मृत्यु और जटिलताओं का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।