
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : June 16, 2026 11:24 AM IST
Medically Verified By: Dr R.S. Mishra
bacterial vs viral infection (AI generated image)
स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों के नजरिए से बात की जाए तो इंफेक्शन यानी संक्रमण अपने आप में एक बहुत बड़ी कैटेगरी है। हम सब जानते हैं कि इंफेक्शन कई अलग-अलग तरह का होता है। इंफेक्शन से जुड़ी समस्याएं ज्यादातर बदलते मौसम में होती हैं और अक्सर इन्हें लोग मौसमी बीमारियां समझ लेते हैं। इंफेक्शन से जुड़े ज्यादातर मामलों में मरीज को बुखार, गले में खराश, जुकाम, सर्दी और खांसी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। ऐसे में जब मरीज डॉक्टर के पास जाता है, तो उसे पता चलता है कि उसे इंफेक्शन हो गया है। ऐसे में जिन्हें इंफेक्शन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी है वे ये जरूर पूछते हैं कि वायरल इंफेक्शन हुआ है या बैक्टीरियल इंफेक्शन। डॉ. आर. एस. मिश्रा, प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष, इंटरनल मेडिसिन और को-चेयर ऑफ एकेडमिक्स, मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत ने इस लेख में कुछ ऐसी ही जरूरी जानकारियां दी, जिनसे हमें पता चलेगा कि आखिर बैक्टीरियल व वायरल इंफेक्शन में क्या अंतर है।
कोई भी बाहरी रोगाणु जब शरीर के अंदर चला जाता है, जो शरीर की सुरक्षा करने वाली प्रणाली उसके खिलाफ रिएक्शन शुरू कर देती है और उसी रिएक्शन को इंफेक्शन कहा जाता है। ये रोगाणु मुख्य रूप से 4 प्रकार के होते हैं, जिन्हें बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और पैरासाइट कहा जाता है। ज्यादातर बैक्टीरिया और वायरस से होने वाले संक्रमण देखे जाते हैं जिन्हें बैक्टीरियल इंफेक्शन और वायरल इंफेक्शन के नाम से जाना जाता है, जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।
वायरस से होने वाला संक्रमण यानी वायरल इंफेक्शन होता है जैसे सर्दी-जुकाम, फ्लू (इन्फ्लूएंजा) और अधिकतर मौसमी बुखार जैसी समस्याएं शामिल होती हैं। इसमें आमतौर पर नाक बहना, छींक आना, हल्का या मध्यम बुखार, गले में खराश, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ज्यादातर मामलों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कुछ दिनों में खुद ही संक्रमण से लड़ लेती है। ऐसे में आराम, पर्याप्त पानी पीना और लक्षणों के अनुसार इलाज ही पर्याप्त होता है।
किटाणुओं के कारण होने वाला संक्रमण यानी बैक्टीरियल इंफेक्शन में आमतौर पर टायफाइड, कुछ यूरिन इंफेक्शन, स्ट्रेप थ्रोट और कुछ प्रकार के निमोनिया आदि होते हैं। बैक्टीरियल इंफेक्शन में लक्षण किसी एक हिस्से में ज्यादा दिखाई दे सकते हैं और लंबे समय तक बने रह सकते हैं। तेज बुखार, गले में बहुत ज्यादा दर्द, कान का इंफेक्शन, पेशाब करते समय जलन या कई दिनों बाद भी लक्षणों का बढ़ना बैक्टीरियल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर सही कारण का पता लगाना हमेशा संभव नहीं होता।
जैसा कि बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन दोनों अलग-अलग रोगाणुओं के कारण होते हैं, इसलिए इनका इलाज भी अलग-अलग तरीके से किया जाता है। बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज करने के लिए आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है और वायरल इंफेक्शन पर एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं कर पाती हैं। वहीं वायरल इंफेक्शन का इलाज करने के लिए एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। यहां पर इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि कुछ प्रकार के वायरल इंफेक्शन के लिए एंटीवायरल दवाएं उपलब्ध नहीं हैं और इम्यून सिस्टम धीरे-धीरे खुद ही इन्हें ठीक करता है। ऐसे में सिर्फ मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए दवाएं और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए सप्लीमेंट्स व सही डाइट आदि दी जा सकती हैं। वहीं
कई बार इन दोनों ही समस्याओं में एक जैसे लक्षण दिखते हैं और इसलिए कई बार डॉक्टर कभी-कभी ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, थ्रोट स्वैब या अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। ये टेस्ट आमतौर पर तब किए जाते हैं जब मरीज को कई दिनों तक बुखार, सांस लेने में दिक्कत या स्वास्थ्य से जुड़े अन्य लक्षण महसूस हो रहे होते हैं। जांच की मदद से मरीज के शरीर में बढ़ रहे इंफेक्शन के प्रकार का पता लगाने में मदद मिलती है, जिससे सही और प्रभावी इलाज इलाज मरीज को दिया जा सकता है।
क्योंकि अगर जरूरत से बिना एंटीबायोटिक दवाएं ली जाती हैं, तो इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या होने के खतरे को बढ़ा सकता है, जिसमें एंटीबायोटिक दवाओं का शरीर में असर कम हो जाता है और यहां तक कि कुछ दुर्लभ मामलों में ये दवाएं काम करना पूरी तरह से भी बंद कर सकती हैं।
इस सवाल का जवाब कोई सटीक नहीं है, क्योंकि कुछ प्रकार के वायरल इंफेक्शन हैं जो कुछ सामान्य बैक्टीरियल इंफेक्शन से ज्यादा खतरनाक होते हैं। ठीक इसी प्रकार कुछ बैक्टीरियल इंफेक्शन भी हैं, जो सामान्य वायरल इंफेक्शन से ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। सरल शब्दों में कहें तो किसी इंफेक्शन को खतरनाक बैक्टीरिया या फिर वायरस नहीं बनाता है, बल्कि कुछ बातें हैं जो उसे गंभीर बनाती हैं जैसे -
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल इंफेक्शन की गंभीरता से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।